अयोध्या के सभी मंदिर टैक्स- फ्री या फिर है कोई पेंच, महंतों की क्यों बढ़ी टेंशन, जानिए

अयोध्या नगर निगम प्रशासन ने मठ, मंदिरों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स माफ कर दिया। जबकि कुछ मंदिरों को महंतों का कहना है कि इससे सभी मठ या फिर मंदरों को फायदा नहीं होने वाला।

अयोध्या में निगम प्रशासन ने मठ मंदिरों के लिए एक सिंबोलिक टैक्स का प्रावधान पेश किया है। इसके लिए यूपी के सीएम के वादे को अयोध्या नगर निगम ने पूरा किया है। नगर निगम ने मंदिरों, मठों के लिए प्रॉपर्टी, वॉटर और सीवेज टैक्स माफ कर दिया है। नए वित्तीय वर्ष 2023-24 में लागू किए एक सांकेतिक टैक्स को लेकर कुछ मंदिरों को पुजारी और महंत संतुष्ट नहीं हैं। उनका मानना है कि ये सिर्फ बड़े ट्र्स्ट या फिर मंदिरों को फायदा पहुंचाने के लिए है।

क्या है सांकेतिक टैक्स के प्रावधान?
अयोध्या (Ayodhya) में मठ मंदिरों पर सांकेतिक टैक्स मंदिर के परिसर के आकार पर निर्भर करेगा। यानी मंदिर 1000 वर्गफुट तक का है तो 1,000 रुपये और (1,000-3,000 वर्ग फुट) तक 3000 रुपए और अगर 3,000 वर्ग फुट से ऊपर तो मंदिर प्रशासन को 5,000 रुपये टैक्स देना होगा। पिछले साल सीएम योगी ने मठ और मंदिरों को प्रापर्टी टैक्स माफ करने का ऐलान किया था, जिसे बाद अब नगर निगम प्रशासन बड़ी राहत दी है।

Ayodhya Tax-free Temple

कुछ महंत पुजारियों टेंशन क्यों?
सीएम के मठ मंदिरों के टैक्स माफी की वादे के बाद कर विभाग के अधिकारियों ने अयोध्या के 1,080 मंदिर व मठों की सूची तैयार की थी, जिन्हें संपत्ति, पानी और सीवेज के करों से छूट दी जानी थी। लेकिन बाद में कुछ मंदिर व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए। जिनकी वजह से उनका नाम सूची से हटा दिया गया। एक रिपोर्ट के मुताबित दाव किया जा रहा है कि टैक्स से छूट के लिए बनी संशोधित सूच में अब केवल कुछ 783 मठ या मंदिर शामिल हैं, जिन्हें कर से छूट (Tax-free Temple) मिलेगी। अब इन 783 मंदिरों में करीब 500 मंदिर हैं, जो टैक्स चुका रहे हैं, ऐसे में सरकार की घोषणा का लाभ सिर्फ इन्हें ही मिलेगा।

संतों ने क्या कहा?
निर्वाणी अनी अखाड़े के प्रमुख महंत धर्मदास का कहना है कि छोटे मठों पर शुल्क लगाया जा रहा है जबकि बड़े मंदिर व मठ बड़े कर से बच रहे हैं। जबकि कई मंदिरों के पुजारियों ने दावे के साथ कहा कि छोटे मठ, मंदिर कर का भुगतान का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि वे ये मानते हैं छोटे में से टैक्स वसूला जा रहा है, जबकि 5000 वर्ग फुट से अधिक बड़े मंदिरों को बहुत ही कम कर देना पड़ रहा है। उनका सवाल है कि टैक्स के मामले में 5,000 वर्ग फुट में स्थापित मठ की तुलना 15,000 वर्ग फुट में फैले मंदिर या फिर मठ से कैसे की जा सकती है।

व्यावसायिक गतिविधि वाले मंदिरों पर हो एक्शन
निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत धर्मदास ने कहा कि जो मंदिर या फिर मठ धर्मकार्य में लिप्त हैं, उन्हें टैक्स भुगतान की बाध्यता से मुक्त किया जा रहा है, तो ये स्वागतयोग्य कदम है। लेकिन जो मठ या फिर मंदिर व्यावसायिक गतिविधि करते हैं, उन पर एक्शन होना चाहिए।

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