UP News: शंकराचार्य की बढ़ी मुश्किलें, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर Pocso एक्ट के तहत FIR
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर Pocso एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है। प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि पिछले महीने माघ मेले के दौरान नाबालिग शिष्यों के साथ हुए कथित यौन शोषण के मामले में इन दोनों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
एडिशनल सेशंस जज और स्पेशल जज (POCSO) विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने प्रयागराज के झूंसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी (SHO) को निर्देश दिया कि वे शिकायत और रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करें और कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ACP विमल किशोर मिश्रा ने बताया कि कोर्ट के आदेशानुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 (4) के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है और इसकी गहनता से तफ्तीश की जा रही है।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
नाबालिग पीड़ितों की ओर से कोर्ट में दी गई अर्जी के अनुसार, आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, 74, 75, 76, 79 और 109 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3, 5, 9 और 17 के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जांच के दौरान पीड़ितों की पहचान और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाए।
क्या है पूरा विवाद?
पीड़ितों (जिनमें से एक की उम्र 14 वर्ष और दूसरे की करीब साढ़े 17 वर्ष है) का आरोप है कि माघ मेला 2025-26 के दौरान धार्मिक सेवा और शिष्यत्व की आड़ में उनके साथ यौन शोषण किया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि जब उन्होंने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर और थाने में शिकायत की लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ, तब उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
इससे पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तब चर्चा में आए थे जब उन्हें संगम स्नान से रोका गया था और मेला अथॉरिटी ने उन्हें 'ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य' की उपाधि इस्तेमाल करने पर नोटिस भेजा था। अब पुलिस कमिश्नर द्वारा सौंपी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने पाया कि लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं और इस पर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।












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