कांवड़ यात्रा मार्ग पर अवैध होटल-ढाबों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, बिना लाइसेंस नहीं चलेंगे दुकान
Kanwar Yatra hotel license order Supreme Court: श्रावण महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों से हरिद्वार, गंगोत्री और अन्य पवित्र स्थलों की ओर यात्रा करते हैं। इस दौरान मार्ग में लगने वाले होटल, ढाबे और स्टॉल यात्रियों को भोजन और विश्राम की सुविधा प्रदान करते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में इन अस्थायी व्यवस्थाओं को लेकर कानूनी, सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर संचालित सभी होटलों, लॉज और अस्थायी आवासीय इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे वैधानिक लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्रों के अनिवार्य प्रावधानों का पूरी तरह पालन करें।

कोर्ट ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश सरकार की एक नीति के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'इस चरण पर सभी संबंधित होटल मालिक वैधानिक रूप से आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र का पालन करेंगे। हम स्पष्ट कर देते हैं कि अभी हम इस मामले के अन्य तर्कों में नहीं जा रहे हैं। आवेदन को बंद किया जाता है।' इससे यह साफ हो गया कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर बगैर लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के कोई होटल या लॉज संचालित नहीं किया जा सकेगा।
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QR कोड पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
याचिका में एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु था QR कोड की अनिवार्यता। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर लगे हर खाद्य स्टॉल और दुकान पर QR कोड लगाना अनिवार्य होगा, जिससे दुकानदार की पहचान और विवरण सार्वजनिक रूप से सामने आ सके।
हालांकि इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस समय QR कोड से जुड़े मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा, और इस विषय को मुख्य याचिका के तहत बाद में सुना जाएगा, जो अभी अदालत में लंबित है।
क्यों है यह फैसला अहम?
कांवड़ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा, पारदर्शिता और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा, बल्कि अवैध व बिना निगरानी के चल रहे व्यवसायों पर भी अंकुश लगाएगा।
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