'वकीलों को डराने की कोशिश', सीनियर वकील को समन भेजने पर भड़का Supreme Court Bar Body, ED को लगाई फटकार
Supreme Court Bar Body slams ED: सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार को समन भेजे जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। एसोसिएशन ने इस कदम को न केवल अनावश्यक बल्कि कानूनी पेशे की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला बताया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार को एक निजी फर्म को कानूनी परामर्श देने के बाद ईडी द्वारा समन भेजा गया था। जिसे SCAORA ने न्यायपालिका समुदाय को डराने वाला संदेश करार दिया। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई हर नागरिक के उस मूलभूत अधिकार को चुनौती देती है, जिसके तहत वह बिना डर के स्वतंत्र कानूनी सलाह प्राप्त कर सकता है।

SCAORA के अध्यक्ष, अधिवक्ता विपिन नायर ने कहा कि यह कदम पूरी तरह से अनावश्यक है और जांच एजेंसियों द्वारा बढ़ते दुरुपयोग की चिंता को उजागर करता है। यह प्रवृत्ति न केवल कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को खतरे में डालती है, बल्कि हमारे कानून के शासन की नींव को भी कमजोर करती है।
Supreme Court Bar Body ने क्या कहा?
SCAORA के सचिव, अधिवक्ता निखिल जैन ने बयान में कहा, "अरविंद दातार एक प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, जिनकी ईमानदारी और व्यावसायिक आचरण पर कभी कोई सवाल नहीं उठा। उन्हें उनके पेशेवर दायित्व निभाने पर समन भेजा जाना अधिकारों का दुरुपयोग और अधिवक्ताओं की भूमिका की पवित्रता का अपमान है।"
- न्यायपालिका और बार की स्वतंत्रता पर चोट
SCAORA ने अपने बयान में दो टूक कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और बार की स्वतंत्रता संविधानिक लोकतंत्र के दो मजबूत स्तंभ हैं। अदालतों के प्रभावी संचालन के लिए निडर और स्वतंत्र अधिवक्ताओं की आवश्यकता है। जब जांच एजेंसियां केवल कानूनी राय देने के लिए अधिवक्ताओं को दबाव में लेने लगती हैं, तो यह सिर्फ व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि न्याय व्यवस्था के पूरे ढांचे पर आघात है।
- न्यायिक निर्णयों का हवाला
एसोसिएशन ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने निर्णयों का भी हवाला दिया, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि एक अधिवक्ता केवल कानूनी परामर्श देने के लिए अपने मुवक्किल की कथित आपराधिक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
बार एसोसिएशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ईडी की यह कार्रवाई कानूनी सलाह और आपराधिक संलिप्तता के बीच की सीमा को धुंधला करती है, जो न केवल असंवैधानिक है बल्कि पूरी तरह से विधिक दृष्टि से भी गलत है।
कानूनी प्रणाली की नींव को खतरा: SCAORA
SCAORA ने चेताया कि अगर अधिवक्ताओं को केवल कानूनी राय देने पर ही दबाव में लाया जाएगा, तो इससे पूरी न्यायिक व्यवस्था ठप हो सकती है और आम जनता का न्याय व्यवस्था पर से भरोसा खत्म हो जाएगा।
भले ही ईडी ने बाद में अपना समन वापस ले लिया, लेकिन SCAORA ने इस कार्रवाई को "मनमाना और अनुचित तरीके से कार्यपालिका द्वारा शक्ति का प्रयोग" बताया और इसके खिलाफ अपना "कड़ा विरोध" दर्ज किया।
यह मामला केवल एक वरिष्ठ अधिवक्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की न्यायिक स्वतंत्रता, नागरिकों के मूल अधिकारों और पूरे कानूनी तंत्र की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है। SCAORA का यह विरोध एक बड़ा संदेश है कि कानूनी पेशे को डराने या नियंत्रित करने की कोशिशें लोकतंत्र के मूलभूत ढांचे को झकझोर सकती हैं।












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