यूपी की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं सुचेता कृपलानी, 20 साल बड़े आचार्य कृपलानी से किया था प्रेम विवाह
लखनऊ, 18 नवंबर। सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश ही नहीं, आजाद भारत में बनने वाली पहली महिला मुख्यमंत्री थीं। 1962 के विधानसभा चुनाव में सुचेता कृपलानी ने कांग्रेस के टिकट पर मेंहदावल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। वो तत्कालीन कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाई गई थीं। उस समय के मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता के त्यागपत्र के बाद कांग्रेस ने सुचेता कृपलानी को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था। 1963-67 के बीच यूपी की पहली मुख्यमंत्री के तौर पर सुचेता कृपलानी को सख्त प्रशासक के तौर पर याद किया जाता है। सुचेता कृपलानी ने उत्तर प्रदेश की गिरती अर्थव्यवस्था को संभाला था। उसी दौरान जब प्रदेश के कर्मचारियों ने हड़ताल की थी जो 62 दिन तक चला था। जब कर्मचारी समझौते के लिए तैयार हुए तभी सीएम सुचेता कृपलानी ने उनकी मांगों को स्वीकार किया था।

बीएचयू में हुई थी आचार्य कृपलानी से मुलाकात
25 जून 1908 को सुचेता कृपलानी का जन्म हुआ था। सुचेता जब बड़ी हुईं तो वह आजादी की लड़ाई में कूदना चाहती थीं लेकिन 1929 में बहन और पिता के निधन के बाद उनके कंधों पर अपने परिवार को संभालने की जिम्मेदारी आ गई थी। सुचेता कृपलानी ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर पढ़ाना शुरू किया था। शिक्षक के तौर पर भी सुचेता स्टूडेंट्स को आजादी का पाठ पढ़ाया करती थीं। 1930 में सुचेता की मुलाकात आचार्य जे बी कृपलानी से हुई थी। आचार्य कृपलानी बीएचयू में आजादी की लड़ाई के लिए कुछ कार्यकर्ताओं की तलाश में आए थे। बिहार में आए बड़े भूकंप के राहत कार्य के दौरान दोनों करीब आ गए थे। 1936 में सुचेता कृपलानी ने अपने से 20 साल बड़े आचार्य जे बी कृपलानी से शादी कर ली थी।

गांधी ने कहा था- सुचेता किसी और से शादी करो
सुचेता कृपलानी से आचार्य जे बी कृपलानी बीस साल बड़े थे और यही बात महात्मा गांधी को खटकी थी। आचार्य कृपलानी महात्मा गांधी के शिष्य थे। गांधी ने यह कहा था कि अगर यह शादी हुई तो वह आजादी की लड़ाई में साथ देने वाले आचार्य कृपलानी को खो देंगे। गांधी आचार्य कृपलानी को अपना दायां हाथ मानते थे। गांधी की इस बात पर सुचेता ने जवाब दिया था कि इस शादी से उनको आजादी के लिए लड़ने वाले दो लोग मिलेंगे। 1936 में शादी करने के बाद आचार्य कृपलानी और सुचेता कृपलानी गांधी के साथ अंग्रजों के राज से आजादी के लिए संघर्ष करते रहे थे। सुचेता कृपलानी उन 15 महिलाओं में से एक थीं जिनको संविधान सभा में शामिल किया गया था।

पति से अलग सुचेता ने पकड़ी राजनीतिक राह
आचार्य कृपलानी प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कड़े आलोचक थे। उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर 1951 में किसान मजदूर प्रजा पार्टी बनाई थी जिसमें सुचेता कृपलानी भी थीं। लेकिन कुछ समय बाद ही वह पति की पार्टी छोड़कर कांग्रेस में लौट गई थीं। कांग्रेस के ही टिकट पर उन्होंने 1957 में नई दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। महिलाओं को संगठित करने में भी सुचेता कृपलानी ने काफी काम किया था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने महिलाओं को आजादी की लड़ाई में भाग लेने के लिए प्रेरित किया था और उन्होंने ही 1940 में कांग्रेस की महिला विंग बनाई थी।

ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की संस्थापक
कांग्रेस के बैनर तले महिलाओं को संगठित करने का पहला काम सुचेता कृपलानी ने ही किया था। सुचेता कृपलानी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि हजारों महिलाओं ने संघर्ष के कई मोर्चों पर कांग्रेस का साथ दिया लेकिन महिलाएं सही से संगठित नहीं थीं। महिलाओं का कोई अपना संगठन नहीं था यहां तक कि कांग्रेस के अंदर भी नहीं। सुचेता कृपलानी ने कहा था कि महिलाओं को संगठित करने के लिए वो हर राज्य में गई थीं और कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक कर महिलाओं की यूनिट बनाई थी। 1971 में सुचेता कृपलानी ने राजनीति से संन्यास ले लिया था और 1974 में उनका देहांत हो गया।












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