Mathura में चोरी-छिपे जलाई जा रही थी 'पराली', सैटेलाइट images ने खोल दी पोल, अब होगी बड़ी कार्रवाई
हर साल अक्टूबर महीने से दिल्ली और आसपास के इलाकों में ठंड की दस्तक से पहले ही प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगती है। वहीं दिवाली से पहले के इस समय में ही किसान भी अपने खेतों में पराली जलाने लगते हैं, जिससे प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे में मथुरा से पिछले दो दिन के दौरान तीन स्थानों पर पराली जलाए जाने की तस्वीरें सैटेलाइट की मदद से कैद की गई हैं।
क्या है पराली ?
सबसे पहले आपको बताते हैं कि आखिर यह पराली क्या है ? दरअसल, जब भी धान जैसी कोई फसल कटती है तो उसे जड़ से नहीं उखाड़ा जाता है, बल्कि जड़ के ऊपर का कुछ इंच का हिस्सा छोड़ कर काटा जाता है। ऐसा ज्यादातर मशीन की कटाई में होता है।
वहीं यह छूटा हुआ हिस्सा खेतों से हटाना आसान नहीं होता, इसके लिए सबसे सरल यही उपाय होता है कि इस बचे हुए हिस्से को जला दिया जाए। जिससे खेत रबी, विशेष कर गेंहू की फसल की बुआई के लिए तुरंत तैयार हो सके।

कैसे पराली जलाने से बढ़ता है प्रदूषण
अब चूंकि पराली जलाना किसानों के लिए सबसे सरल, तेज और सस्ता समाधान है, इसलिए फसल काटने के बाद किसान यही तरीका अपनाते हैं। लेकिन इससे बहुत धुंआ होता है और दिल्ली के आसपास हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश के खेतों में एक ही समय में जलने वाला धुंआ दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में प्रदूषण की बड़ी समस्या की वजह बन जाता है।
मथुरा में सैटेलाइट ने पकड़ी किसानों की चालाकी
आपको बता दें कि मथुरा में धान की फसल कटते ही पराली जलाने का दौर शुरू हो गया है। पिछले दो दिन के दौरान तीन स्थानों पर पराली जलाए जाने की तस्वीरें सैटेलाइट की मदद से कैद की गई हैं। इसमें मांट ब्लॉक में दो स्थानों पर और छाता में एक स्थान से पराली जलाने की तस्वीर सामने आई हैं। इनका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने कृषि अधिकारी और निगरानी टीमों को तलब कर लिया है।
वैसे तो फसल अवशेष जलाया जाना दंडनीय अपराध है और बिना अवशेष प्रबंधन यंत्रों की फसल कटाई पाए जाने पर तत्काल मशीन को सीज कर मालिक के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन इस सबके बावजूद मथुरा में 1-2 अक्तूबर को मांट और छाता ब्लॉक में पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। जिसके बाद जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने सभी अधिकारियों को तलब कर लिया है।
मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रम (पराली प्रबंधन) पर बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर कृषि और राजस्व कर्मियों को पराली जलाने की घटनाओं पर लगातार नजर रखनी होगी। पराली जलाने वाले किसानों पर ढाई हजार, पांच हजार और 15 हजार रुपये का तय जुर्माना लगाया जाए। साथ ही उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक और बीएसए को पराली जलाने के दुष्प्रभावों के प्रति बच्चों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।












Click it and Unblock the Notifications