अखिलेश के बयान पर बोले सपा नेता- कहीं BSP का नहीं लिया नाम, BJP बोली- अखिलेश ने दिखा दी कमजोरी
अखिलेश ने गुरुवार को एक साक्षात्कार के दौरान संकेत दिए कि अगर सपा-कांग्रेस गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े को हासिल ना कर सका तो वो किसी का सहारा ले सकते हैं।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीबीसी से फेसबुक लाइव के दौरान यह संकेत दिया कि चुनाव परिणामों मे यदि उन्हें या किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलता है तो राष्ट्रपति शासन की जगह वो मायावती से हाथ मिलाना पसंद करेंगे।

इसके बाद से ही राजनीतिक हलकों, खासतौर से समाजवादी पार्टी में हलचल मच गई है। अखिलेश के इसी बयान पर सपा नेता और राज्य सभा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने (अखिलेश) बसपा या बहन जी का नाम नहीं लिया है। उनका लक्ष्य है कि सांप्रदायिक शक्तियां राज्य के बाहर रहें।
नरेश ने कहा कि उन्होंने कहा कि भाजपा को यूपी रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाने देंगे और उन्हें रोकने का पूरी ताकत लगा देंगे। अब इसमें से कोई भी मतलब निकाला जा सकता है।
अखिलेश के बयान पर भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव ने अपनी कमजोरी दिखा दी है। सिंह ने कहा कि अखिलेश ने पूर्ण बहुमत आने का दावा भी गलत साबित कर दिया है।
बता दें कि ब्रिटिश ब्रॉकास्टिंग कॉरपोरेशन की हिन्दी सेवा से फेसबुक लाइव के दौरान अखिलेश से पूछा गया कि उत्तर प्रदेश में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत न मिलने की स्थिति में समाजवादी पार्टी की रणनीति क्या होगी? इस सवाल पर अखिलेश यादव का कहना था कि हां अगर सरकार के लिए जरूरत पड़ेगी तो राष्ट्रपति शासन कोई नहीं चाहेगा।
उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि यूपी को भाजपा रिमोट कंट्रोल से चलाए। चुनाव से पहले ही पारिवारिक कलह के चलते पिता मुलायम सिंह यादव के नाराज होने के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि नेताजी का जहां मन किया वहां प्रचार करने गए। हमने उनसे कुछ नहीं कहा।
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