Shivpal नहीं, Ram Gopal करेंगे सपा में खेला? UP में 'ऑपरेशन लोटस'! Akhilesh Yadav के 'संकटमोचक' ने बताया सच
Rajendra Chaudhary OI Exclusive Interview On Samajwadi Party Split News Hindi : महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) की दूसरी टूट ने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी है। अब उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी विपक्षी ताकत समाजवादी पार्टी में फूट की अटकलें तेज हो गई हैं। यूपी के डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि सपा के 25-26 सांसद टूटने को तैयार हैं और पार्टी का हाल TMC से भी बदतर हो सकता है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर तो पिछले तीन हफ्तों से रोजाना अखिलेश यादव और सपा पर हमलावर हैं।
लेकिन अखिलेश यादव के सबसे भरोसेमंद और संकटमोचक माने जाने वाले मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इन सारी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि BJP सुनियोजित तरीके से अफवाहें फैला रही है। सपा अखिलेश यादव के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट है।

Oneindia Hindi के चीफ सब एडिटर दिव्यांश रस्तोगी से Exclusive बातचीत में अखिलेश यादव के 'संकटमोचक' ने सपा के अंदर के हर राज खोल दिए। क्या सच में सपा में 'ऑपरेशन लोटस' चल रहा है? शिवपाल यादव या रामगोपाल यादव में से कौन बड़ा खेला कर सकता है? आइए 6 सवालों के जवाब में गहराई से समझते हैं...
सवाल 1: क्या सपा के सांसद भाजपा के संपर्क में हैं?
जवाब: राजेंद्र चौधरी ने कहा कि यह भाजपा का "कैलकुलेटिव मूव" है। सपा के बारे में जानबूझकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि सांसदों की बात छोड़िए, पार्टी का एक भी कार्यकर्ता सपा छोड़कर नहीं जा सकता।
सवाल 2: क्या अखिलेश यादव के नेतृत्व को पार्टी के भीतर चुनौती मिल रही है?
जवाब: उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव समाजवादी आंदोलन और सपा की विचारधारा के लिए अपरिहार्य नेता हैं। भारतीय राजनीति में वह एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित हैं और पार्टी पूरी तरह उनके नेतृत्व के साथ खड़ी है।
सवाल 3: ओपी राजभर लगातार सपा पर हमला क्यों कर रहे हैं?
जवाब: राजेंद्र चौधरी के मुताबिक, यह उनका व्यक्तिगत अभियान नहीं बल्कि भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उनसे इस तरह के बयान दिलवा रही है।
सवाल 4: सपा में फूट के दावे BJP क्यों कर रही है?
जवाब: सपा नेता ने कहा कि असली खतरा भाजपा और उसके सहयोगी दलों को है। उनके मुताबिक, भाजपा को डर है कि कहीं उसके विधायक या सांसद ही न टूट जाएं, इसलिए पहले से माहौल बनाया जा रहा है।
सवाल 5: 2027 विधानसभा चुनाव में सपा किसके साथ लड़ेगी?

जवाब: राजेंद्र चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि INDIA गठबंधन के सहयोगियों के साथ ही 2027 का चुनाव लड़ा जाएगा। गठबंधन को लेकर पार्टी की नीति स्पष्ट है।
सवाल 6: क्या रामगोपाल यादव सपा छोड़ने वाले हैं?
जवाब: उन्होंने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताया। चौधरी ने कहा कि इस संबंध में पहले ही स्पष्टीकरण दिया जा चुका है और यह खबर पूरी तरह झूठी है।
आइए अब समझते हैं कि शिवपाल को सपा का ताकतवर संगठनकर्ता क्यों कहते हैं...

Who Is Shivpal Yadav: कौन हैं शिवपाल सिंह यादव?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब समाजवादी पार्टी (सपा) के मजबूत संगठन, कार्यकर्ता नेटवर्क और जमीनी पकड़ की बात होती है तो सबसे प्रमुख नामों में शिवपाल सिंह यादव (66 वर्ष) का जिक्र होता है। वे सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई, अखिलेश यादव के चाचा और पार्टी के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। करीब चार दशक से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में मौजूद शिवपाल यादव को समाजवादी आंदोलन का मजबूत संगठनकर्ता माना जाता है।

- शुरुआती जीवन और शिक्षा: शिवपाल सिंह यादव का जन्म 6 अप्रैल 1955 को इटावा जिले के सैफई में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय सुगर सिंह यादव था। उन्होंने केके डिग्री कॉलेज, इटावा से 1976 में बीए की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध क्रिश्चियन कॉलेज से 1977 में बीपीएड (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) की डिग्री हासिल की।
- राजनीति में एंट्री: शिवपाल यादव ने अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के साथ समाजवादी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। मुलायम सिंह के राजनीतिक विस्तार के दौरान उन्होंने संगठन को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम किया। सपा के शुरुआती दौर में कार्यकर्ताओं को जोड़ने, बूथ स्तर का नेटवर्क तैयार करने और पार्टी को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
Shivpal Singh Yadav Politocal Career: विधायक से मंत्री तक का सफर
शिवपाल सिंह यादव 1996 से लगातार इटावा जिले की जसवंतनगर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायकों में शामिल हैं। राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
- 2003 से 2007 तक मुलायम सिंह यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे।
- 2009 से 2012 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे।
- 2012 में सपा की सरकार बनने के बाद अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में लोक निर्माण, सिंचाई समेत कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बने।
- संगठन और सरकार दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है।
अब बात करते हैं, चाचा शिवपाल-भतीजे अखिलेश के रिश्तों की...

2016 का पारिवारिक संघर्ष, सपा का दर्द: साल 2016 समाजवादी पार्टी के इतिहास का सबसे चर्चित दौर रहा। इसी दौरान अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए। पार्टी और परिवार दो खेमों में बंटता दिखाई दिया। उस समय मुलायम सिंह यादव कई मौकों पर शिवपाल यादव के पक्ष में खड़े नजर आए। हालांकि, बाद में अखिलेश यादव ने संगठन और पार्टी पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया।
अलग पार्टी बनाने का फैसला: सपा में मतभेद बढ़ने के बाद शिवपाल यादव ने 2018 में 'प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया)' का गठन किया। उन्होंने खुद को समाजवादी विचारधारा का असली वारिस बताते हुए अलग राजनीतिक राह चुनी।
हालांकि, 2022 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदले और उन्होंने अखिलेश यादव के साथ गठबंधन किया। बाद में उनकी पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया और वे फिर से सपा के सक्रिय नेतृत्व का हिस्सा बन गए।
वर्तमान भूमिका: वर्तमान में शिवपाल सिंह यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। पार्टी के भीतर उन्हें संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच सबसे मजबूत कड़ी माना जाता है। चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने में उनकी अहम भूमिका रहती है।
क्यों कहलाते हैं सपा के सबसे मजबूत संगठनकर्ता?: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुलायम सिंह यादव के दौर में समाजवादी पार्टी की जमीनी ताकत खड़ी करने में शिवपाल यादव की बड़ी भूमिका रही। बूथ स्तर तक संगठन तैयार करना, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और चुनावी प्रबंधन उनकी खास पहचान रहा है। यही वजह है कि उन्हें लंबे समय से सपा का सबसे प्रभावशाली संगठनकर्ता माना जाता है।

Shivpal Yadav Net Worth: शिवपाल यादव कितने अमीर?
- उम्र: 66 वर्ष
- विधानसभा सीट: जसवंतनगर (इटावा)
- पेशा: समाज सेवा एवं कृषि
- कुल संपत्ति: लगभग ₹11.78 करोड़
- देनदारियां: लगभग ₹3 करोड़
- शैक्षिक योग्यता: बीए, बीपीएड
- आपराधिक मामले: कोई नहीं
सोर्स- ADR
उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिवपाल सिंह यादव आज भी एक ऐसे नेता माने जाते हैं जिनकी पकड़ संगठन, कार्यकर्ताओं और यादव परिवार की राजनीति तीनों पर प्रभावशाली रही है। यही कारण है कि सपा के भीतर उनकी भूमिका आज भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अब नजर डालते हैं, सपा के 'थिंक टैंक' और सबसे बड़े रणनीतिकार का पूरा सियासी सफर पर...
Who Is Ram Gopal Yadav: कौन हैं रामगोपाल यादव?

समाजवादी पार्टी (सपा) की राजनीति में अगर मुलायम सिंह यादव को संगठन का चेहरा और अखिलेश यादव को वर्तमान नेतृत्व माना जाता है, तो प्रोफेसर रामगोपाल यादव (74 वर्ष) को पार्टी का सबसे बड़ा रणनीतिकार और वैचारिक स्तंभ कहा जाता है। वे सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के चचेरे भाई हैं और लंबे समय से पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति, संसदीय रणनीति तथा गठबंधन प्रबंधन की कमान संभालते रहे हैं। यही वजह है कि उन्हें सपा का 'थिंक टैंक' भी कहा जाता है।
शुरुआती जीवन और शिक्षा
- रामगोपाल यादव का जन्म 29 जून 1951 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय बच्ची लाल यादव था। राजनीति में आने से पहले उन्होंने शिक्षण कार्य किया और अकादमिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।
- वे उच्च शिक्षित नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से वर्ष 1993 में पीएचडी (डॉक्टरेट) की उपाधि प्राप्त की। इसी कारण राजनीतिक गलियारों में उन्हें अक्सर 'प्रोफेसर रामगोपाल यादव' के नाम से भी जाना जाता है।
अध्यापक से राजनीति तक का सफर
- राजनीति में सक्रिय होने से पहले रामगोपाल यादव अध्यापक और शिक्षाविद के रूप में कार्यरत रहे। समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर वे मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक अभियान से जुड़े और धीरे-धीरे पार्टी के प्रमुख वैचारिक चेहरों में शामिल हो गए।
- जब 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन हुआ तो रामगोपाल यादव उसकी बुनियादी रणनीति तैयार करने वाले नेताओं में शामिल थे। पार्टी के संविधान, संगठनात्मक ढांचे और राष्ट्रीय विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संसद में लंबा अनुभव
रामगोपाल यादव देश के सबसे अनुभवी सांसदों में गिने जाते हैं। वे कई बार राज्यसभा सदस्य चुने गए और संसद में समाजवादी पार्टी की आवाज बने रहे।
दिल्ली की राजनीति में सपा के अधिकांश बड़े फैसलों, संसदीय रणनीतियों और राष्ट्रीय स्तर के गठबंधनों के पीछे उनकी भूमिका मानी जाती है। वे संसद में विभिन्न स्थायी समितियों के सदस्य भी रहे हैं और स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक न्याय तथा संवैधानिक मुद्दों पर मुखर राय रखते रहे हैं।
सपा के सबसे बड़े रणनीतिकार
रामगोपाल यादव को संगठन की बजाय नीति और रणनीति का विशेषज्ञ माना जाता है। जहां शिवपाल यादव को जमीनी संगठन का नेता माना जाता है, वहीं रामगोपाल यादव दिल्ली की राजनीति, संसदीय प्रबंधन और राजनीतिक समीकरणों के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
सपा के अंदर उम्मीदवार चयन, गठबंधन रणनीति, संसदीय रुख और राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी की लाइन तय करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उन्हें सपा का 'ब्रेन' और 'थिंक टैंक' बताते हैं।
2016-17 का पारिवारिक विवाद और अखिलेश के साथ खड़े होना
समाजवादी पार्टी के इतिहास में 2016-17 का दौर सबसे बड़े राजनीतिक संकट के रूप में देखा जाता है। उस समय मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच सत्ता और संगठन को लेकर खुला संघर्ष शुरू हो गया था।
इस पूरे विवाद में रामगोपाल यादव खुलकर अखिलेश यादव के पक्ष में खड़े हुए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उसी दौरान उनकी रणनीति और संगठनात्मक कौशल ने अखिलेश यादव को पार्टी पर नियंत्रण बनाए रखने में बड़ी मदद की। यही कारण है कि आज भी उन्हें अखिलेश यादव के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सलाहकारों में गिना जाता है।
सपा में वर्तमान भूमिका क्या?
प्रोफेसर राम गोपाल यादव लंबे समय से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी का पक्ष रखने, विपक्षी दलों से संवाद बनाने और गठबंधन की रणनीति तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रहती है। इंडिया गठबंधन के दौर में भी उन्हें सपा के प्रमुख वार्ताकारों में माना गया।

Ram Gopal Yadav Net Worth: कितने अमीर राम गोपाल यादव?
- आयु: 74 वर्ष
- पार्टी: समाजवादी पार्टी (SP)
- वर्तमान पद: राष्ट्रीय महासचिव, राज्यसभा सांसद
- पेशा: कृषि एवं सामाजिक सेवा
- कुल संपत्ति: लगभग ₹14.19 करोड़
- देनदारियां: लगभग ₹89 लाख
- शैक्षिक योग्यता: पीएचडी (कानपुर विश्वविद्यालय, 1993)
- आपराधिक मामले: कोई नहीं
सोर्स- ADR
क्यों कहलाते हैं सपा के 'थिंक टैंक'?
रामगोपाल यादव को सपा का 'थिंक टैंक' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि वे संगठन की बजाय नीति निर्माण, संसदीय रणनीति, गठबंधन राजनीति और राजनीतिक प्रबंधन में अधिक सक्रिय रहे हैं। मुलायम सिंह यादव के दौर से लेकर अखिलेश यादव के नेतृत्व तक वे पार्टी के सबसे प्रभावशाली सलाहकारों में शामिल रहे हैं।
समाजवादी पार्टी में जहां शिवपाल यादव को संगठन का मजबूत चेहरा माना जाता है, वहीं रामगोपाल यादव को पार्टी का रणनीतिक दिमाग और दिल्ली की राजनीति का सबसे अनुभवी खिलाड़ी माना जाता है।
अब आपको बताते हैं कि राजेंद्र चौधरी सपा के लिए क्या मायने रखते हैं? क्यों कहते हैं इन्हें 'संकटमोचक'?
Who Is Rajendra Chaudhary: कौन हैं राजेंद्र चौधरी?

समाजवादी पार्टी (सपा) में जब भी कोई बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता है, पार्टी की ओर से सबसे पहले जिस नेता का बयान सामने आता है, वह राजेंद्र चौधरी होते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले राजेंद्र चौधरी समाजवादी राजनीति के पुराने और अनुभवी चेहरों में गिने जाते हैं। वे न केवल सपा के मुख्य प्रवक्ता हैं, बल्कि मुलायम सिंह यादव युग से लेकर अखिलेश यादव के नेतृत्व तक पार्टी की वैचारिक और राजनीतिक लड़ाइयों के प्रमुख सिपाही भी रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में उन्हें सपा का 'ट्रबलशूटर' और अखिलेश यादव का 'संकटमोचक' कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि पार्टी पर जब भी कोई बड़ा राजनीतिक हमला होता है, राजेंद्र चौधरी ही सबसे पहले मोर्चा संभालते नजर आते हैं।
शुरुआती जीवन और राजनीति में प्रवेश
राजेंद्र चौधरी का संबंध पश्चिमी उत्तर प्रदेश से है। वे छात्र जीवन से ही समाजवादी विचारधारा से प्रभावित रहे। राजनीति की शुरुआत उन्होंने चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाले भारतीय क्रांति दल से की थी।
आपातकाल के बाद हुए 1977 के विधानसभा चुनाव में वे पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने किसान, पिछड़े वर्ग और समाजवादी राजनीति के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
Mulayam Singh Yadav के साथ कैसे जुड़े?
उत्तर प्रदेश में समाजवादी आंदोलन को नई दिशा देने वाले मुलायम सिंह यादव के साथ राजेंद्र चौधरी का राजनीतिक रिश्ता कई दशक पुराना है। जब 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन हुआ तो राजेंद्र चौधरी शुरुआती दौर से ही पार्टी के साथ जुड़ गए। वे मुलायम सिंह यादव के भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे और संगठन विस्तार से लेकर वैचारिक लड़ाइयों तक अहम भूमिका निभाते रहे।
मुलायम सिंह के करीबी होने के बावजूद उन्होंने अखिलेश यादव के नेतृत्व में भी उतनी ही मजबूती से काम किया। यही वजह है कि उन्हें पार्टी के पुराने और नए नेतृत्व के बीच एक मजबूत कड़ी माना जाता है।
विधायक से मंत्री तक का सफर

राजेंद्र चौधरी ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं।
- 1977 में पहली बार विधायक बने।
- विभिन्न समाजवादी और किसान आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई।
- 2002 में उत्तर प्रदेश सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री बने।
- 2013 में अखिलेश यादव सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में जेल मंत्री तथा खाद्य एवं रसद मंत्री बनाए गए।
मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर अपनी पहचान बनाई।
सपा के मुख्य प्रवक्ता कैसे बने?
राजेंद्र चौधरी लंबे समय से समाजवादी पार्टी के सबसे प्रमुख मीडिया चेहरों में शामिल हैं। पार्टी की ओर से राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के मुद्दों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देने की जिम्मेदारी अक्सर उन्हीं के पास रहती है। टीवी डिबेट, प्रेस कॉन्फ्रेंस और राजनीतिक विवादों में पार्टी का पक्ष रखने के कारण वे सपा के सबसे प्रभावशाली प्रवक्ताओं में गिने जाते हैं।
वर्तमान में राजेंद्र चौधरी समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता (Chief Spokesperson) हैं। उत्तराखंड में पार्टी के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य के रूप में सक्रिय हैं।
अखिलेश यादव के 'संकटमोचक' क्यों कहलाते हैं?
- हर संकट में सबसे आगे: जब भी सपा पर कोई बड़ा राजनीतिक हमला होता है, राजेंद्र चौधरी सबसे पहले सामने आकर पार्टी का बचाव करते हैं। हाल के दिनों में ओम प्रकाश राजभर द्वारा सपा में टूट के दावों पर भी सबसे विस्तृत और आक्रामक जवाब राजेंद्र चौधरी ने ही दिया।
- मुलायम और अखिलेश दोनों के विश्वस्त: सपा में बहुत कम नेता ऐसे हैं जिन्हें मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों का समान भरोसा मिला हो। राजेंद्र चौधरी उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं। वे पार्टी की पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच सेतु का काम करते हैं।
- डैमेज कंट्रोल के विशेषज्ञ: 2016-17 के पारिवारिक विवाद, चुनावी हार, गठबंधन की राजनीति, दल-बदल और पार्टी के भीतर उठने वाले विवादों के दौरान उन्होंने लगातार पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि संकट के समय पार्टी की लाइन स्पष्ट करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका रहती है।
- समाजवादी विचारधारा की आवाज: राजेंद्र चौधरी को केवल प्रवक्ता नहीं बल्कि समाजवादी विचारधारा का प्रतिनिधि चेहरा भी माना जाता है। वे अक्सर सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, किसान और पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर पार्टी का वैचारिक पक्ष रखते हैं।
एक नजर में राजेंद्र चौधरी
- वरिष्ठ समाजवादी नेता
- सपा के मुख्य प्रवक्ता
- विधान परिषद सदस्य (एमएलसी)
- पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री
- पूर्व जेल एवं खाद्य-रसद मंत्री
- मुलायम सिंह यादव के पुराने सहयोगी
- अखिलेश यादव के भरोसेमंद राजनीतिक सलाहकार
- सपा के प्रमुख संकटमोचक और मीडिया रणनीतिकार
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राजेंद्र चौधरी उन नेताओं में गिने जाते हैं जो चुनाव नहीं, बल्कि संगठन, विचारधारा और राजनीतिक संदेश के जरिए पार्टी की ताकत बढ़ाने का काम करते हैं। यही वजह है कि तीन दशकों से अधिक समय बाद भी समाजवादी पार्टी में उनका प्रभाव और महत्व बरकरार है।














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