सोनिया गांधी ने क्यों चुना राज्यसभा का रास्ता, रायबरेली में कांग्रेस के हालिया प्रदर्शन में छिपा है राज?
उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट भारतीय लोकतंत्र के चुनावी इतिहास में कांग्रेस के लिए गढ़ साबित हुई है। पार्टी यहां सिर्फ तीन ही लोकसभा चुनाव हारी है। जिसमें से एक बार इमरजेंसी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हार शामिल है। पार्टी 1996 और 1998 में भी यह सीट गंवा चुकी है।
लेकिन, 2004 में जबसे सोनिया गांधी ने बेटे राहुल गांधी के लिए अमेठी छोड़कर रायबरेली का रुख किया है, यह कांग्रेस का अजेय दुर्ग बना रहा है। पहली बार सोनिया ने इस सीट पर 2,49,765 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी, जो 2009 में बढ़कर 3,72,165 वोटों के अंतर तक पहुंच गया।

2014 से रायबरेली में घटने लगा सोनिया की जीत का मार्जिन
लेकिन, 2014 के चुनावों से कांग्रेस और उसकी उम्मीदवार सोनिया गांधी का जलवा यहां धीरे-धीरे फीका पड़ना शुरू हो गया। 2014 में सोनिया को बसपा प्रत्याशी ने टक्कर दी और पांच साल पहले के मुकाबले उनके जीत का अंतर घटकर 3,52,713 रह गया।
2019 में सिर्फ 1,67,178 वोटों के अंतर से हारा भाजपा उम्मीदवार
लेकिन, 2019 में बीजेपी उम्मीदवार ने पहली बार यहां अन्य सभी उम्मीदवारों को पीछे छोड़कर सोनिया को बड़ी चुनौती दी। इस चुनाव में सोनिया गांधी की जीत का अंतर घटकर मात्र 1,67,178 वोटों तक पहुंच गया।
कांग्रेस की दिग्गज नेता का गांधी-नेहरू परिवार की पारंपरिक सीट पर जीत का ये हाल तब हुआ, जब सपा-बसपा और रालोद गठबंधन ने उनके खिलाफ उम्मीदवार भी नहीं उतारे। मतलब, कांग्रेस के रणनीतिकारों के कानों में खतरे की घंटी शायद तभी बजनी शुरू हो चुकी थी।
यह वही चुनाव था, जब पड़ोस में परिवार की और एक पारंपरिक सीट अमेठी में उनके बेटे और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भाजपा नेता स्मृति ईरानी के हाथों हार का कड़वा घूंट पीना पड़ गया।
2022 के परिणाम ने दिखाया राज्यसभा का रास्ता!
कांग्रेस उस चुनावी चोट से आजतक नहीं उबर पाई है। लगता है कि उसके बाद यूपी की राजनीति ने जो करवट ली है, उसने सोनिया गांधी को नई दिल्ली में 10 जनपथ वाला बंगला सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान से राज्यसभा का टिकट कटवाने को मजबूर किया है।
रायबरेली की सभी 5 विधानसभा सीट हार गई कांग्रेस
दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद 2022 में यूपी विधानसभा के चुनावों में रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के दायरे में पड़ने वाले विधानसभा क्षेत्रों के जो नतीजे आए, उसने कांग्रेस नेताओं के पैरों के नीचे से जमीन खींच ली थी।
चार सीट पर तीसरे और एक पर चौथे नंबर पर रही
2022 में कांग्रेस सिर्फ रायबरेली की सभी 5 विधानसभा सीटें हारी नहीं, बल्कि 4 पर वह तीसरे नंबर पर पहुंच गई। वहीं 1 सीट पर वह चौथे नंबर पर छूट गई।
रायबरेली में कांग्रेस का कुल वोट शेयर 13.2% रह गया
इन पांचों सीटों में से 4 समाजवादी पार्टी के खाते में गई और 1 पर बीजेपी उम्मीदवार को जीत मिली। अगर वोट शेयर की बात करें तो पाचों विधानसभा क्षेत्र मिलाकर सपा को 37.6% वोट मिले तो बीजेपी ने 29.8% वोट हासिल किए। वहीं, कांग्रेस पार्टी किसी तरह से 13.2% वोट जुटा सकी।
सिर्फ रायबरेली ही नहीं। 2022 के चुनाव में कांग्रेस का यूपी में जो परिणाम रहा, उससे पार्टी को यह स्पष्ट संदेश मिला कि वह अब राज्य में प्रभावहीन हो चुकी है। क्योंकि, उस चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर सिर्फ 2.3% पर पहुंच गया और वह केवल 2 सीटें ही जीत सकी।












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