लोकसभा चुनाव 2024 से पहले अखिलेश यादव के सामने कड़ी चुनौती पेश करेंगे शिवपाल !

लखनऊ, 29 सितंबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव सम्पन्न होने के बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के चीफ अखिलेश यादव (Akhilsh Yadav) 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर चुके हैं। अखिलेश यादव की अगुवाई में एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी लखनऊ में राष्ट्रीय अधिवेशन में जुटी है वहीं दूसरी तरफ अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) सपा की जड़ें कमजोर करने के लिए यदुकुल पुनर्जागरण अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के तहत वो यादव समाज को एकजुट करने की कवायद में जुटे हुए हैं। राजनितिक विश्लेषकों की माने तो शिवपाल जितना ही इस अभियान को धार देंगे अखिलेश यादव की मुश्किलें उतनी ही बढ़ेंगी।

यादव लैंड में अखिलेश की पकड़ कमजोर करने की कोशिश

यादव लैंड में अखिलेश की पकड़ कमजोर करने की कोशिश

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में हालांकि समाजवादी पार्टी शिवपाल को अपने साथ मिलाने में सफल रही थी। लेकिन चुनाव में केवल शिवपाल को टिकट देकर और उनके करीबियों को दरकिनार कर बड़ा संदेश देने की की कोशिश की गई थी। शिवपाल समाजवादी पार्टी के टिकट पर यशवंत नगर विधानसभा सीट से चुनाव लडे़ थे लेकिन उनके अन्य करीबियों को टिकट नहीं मिला था। इससे शिवपाल काफी नाराज थे। शिवपाल की इस नाराजगी की अखिलेश ने कोई परवाह नहीं की थी। विधानसभा चुनाव के नतीजे जब सामने आए तो समाजवादी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद शिवपाल ने कहा था कि अखिलेश ने उनसे कोई सलाह नहीं ली इसीलिए पार्टी को इस तरह की हार का सामना करना पड़ा है।

अखिलेश को कमजोर करने के लिए शिवपाल ने की बगावत

अखिलेश को कमजोर करने के लिए शिवपाल ने की बगावत

उत्तर प्रदेश चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के बाद भी शिवपाल ने राष्ट्रपति के चुनाव में न केवल अखिलेश से बगावत की बल्कि 5 विधायकों को भी सपा के खिलाफ बगावत करने के लिए राजी कर लिया। इससे यही संदेश गया था कि शिवपाल अखिलेश से नाराज हैं और उनको कमजोर करने के लिए ही इस तरह के कदम उठा रहे हैं। राष्ट्रपति के चुनाव के दौरान ही शिवपाल यादव ने सीएम योगी से मुलाकात भी की थी। शिवपाल के इस कदम से भी अखिलेश को असहज होना पड़ा। बाद में अखिलेश ने एक बयान जारी कर कहा था कि उन्होंने शिवपाल को गठबंधन से अलग होने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। इसके बाद ही शिवपाल और अखिलेश के बीच औपचारिक अलगाव हो गया था।

डीपी यादव के साथ मिलकर शिवपाल ने बनाया नया मंच

डीपी यादव के साथ मिलकर शिवपाल ने बनाया नया मंच

अखिलेश से अलगाव होने के बाद ही शिवपाल यादव कई बार सोशल मीडिया के माध्यम से अखिलेश पर हमला बोल रहे थे और यादवों के एकजुट होने का आह्वान कर रहे थे। आखिरकार शिवपाल ने डीपी यादव को साथ लेकर यदुकुल पुनर्जागरण मंच बनाया। इस मंच के जरिए वो पूरे उत्तर प्रदेश या यूं कहें कि मैनपुरी, इटावा, कन्नौज, फिरोजाबाद, एटा, संभल समेत आधा दर्जन जिलों में लगतार बैठक करके यादवों को एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं। चूंकि इस इलाके में डीपी यादव को खास पकड़ है इसलिए ही शिवपाल ने अखिलेश के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए डीपी यादव का साथ लिया। हालाकि डीपी यादव ने सफाई देते हुए कहा था कि यदुकुल पुनर्जागरण मंच के जरिए अखिलेश को कमजोर करने की कोशिश नहीं है बल्कि इस मंच को यादवों को एकजुट करने के लिए बनाया गया है।

बीजेपी के सहयोग से अखिलेश को कमजोर करने की रणनीति

बीजेपी के सहयोग से अखिलेश को कमजोर करने की रणनीति

उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में भी शिवपाल की बीजेपी के साथ नजदीकियों की काफ़ी चर्चा थी। बात यहां तक आई थी की शिवपाल बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार हो गए थे। लेकिन एन वक्त पर मामला बिगड़ गया था। बीजेपी के सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव को कमजोर करने के लिए बीजेपी को शिवपाल की और शिवपाल को बीजेपी की काफी जरूरत है। राजनितिक विश्लेषकों की माने तो बीजेपी शिवपाल को मध्यम बनाकर अखिलेश को कमजोर करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है। शिवपाल भी अपने अपमान का बदला लेने के लिए किसी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। शिवपाल कई बार ये संकेत दे चुके हैं कि वो जल्द ही सरकार में भी शामिल हो सकते हैं।

कन्नौज के बाद मैनपुरी में अखिलेश को झटका देने की तैयारी

कन्नौज के बाद मैनपुरी में अखिलेश को झटका देने की तैयारी

उत्तर प्रदेश में बीजेपी उन सीटों के लिए अलग से रणनीति बना रही है जिसको वो 2019 के लोकसभा चुनाव में हार चुकी है। इसी रणनीति के तहत अमेठी और कन्नौज को जीतने के बाद अब बीजेपी ने अगले लोकसभा चुनाव में रायबरेली और मैनपुरी पर फोकस कर दिया है। मैनपुरी से अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव सांसद हैं। मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से अखिलेश यादव चुनाव लडे़ थे। मैनपुरी में जीत हासिल करने के लिए बीजेपी को शिवपाल की जरूरत पड़ेगी और शिवपाल अखिलेश को कमजोर करने के लिए बीजेपी के साथ कदमताल करते को तैयार हैं। वरिष्ठ राजनितिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि, ''शिवपाल और बीजेपी दोनों का मिशन एक ही है। बीजेपी भी शिवपाल की तरह अखिलेश को कमजोर करना चाहती है। इसका नमूना यूपी में रामपुर और आजमगढ़ में हुए लोकसभा उपचुनाव में दिख चुका है। इन दोनो सीटों को जीतने के बाद बीजेपी को लग रहा है की अब मैनपुरी में अखिलेश को कमजोर किया जा सकता है।''

आज़म को शिवपाल ने दिया PSP में शामिल होने का ऑफर

आज़म को शिवपाल ने दिया PSP में शामिल होने का ऑफर

सूत्रों की माने तो शिवपाल यादव अपनी बेइज्जती के बाद अब अखिलेश और मुलायम सिंह यादव को कमजोर करने में जुट गए हैं। मुलायम सिंह यादव के प्रति शिवपाल का मोहभंग होना शिवपाल के राजनीतिक करियर का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। शिवपाल हमेशा ही मुलायम का सम्मान करने के लिए जाने जाते रहे हैं और ऐसा कहा जाता है कि मुलायम की सरकार बनवाने में बाहुबलियों का समर्थन लेने के लिए हर समय शिवपाल ने आगे बढ़कर काम किया लेकिन बदले में उन्हें अपमानित करने के सिवाय कुछ नहीं मिला। इसी से खिन्न होकर उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई थी। उन्हेांने आजम को पीएसपी में शामिल होने का ऑफर पकड़ाया था।

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