एक ही दांव से BJP और अखिलेश को पटकनी देने की तैयारी, जानिए क्या है शिवपाल यादव की प्लानिंग

लखनऊ, 08 अगस्त: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के मुखिया भारतीय जनता पर्टी के साथ ही अपने भतीजे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को पटकनी देने की तैयारी में हैं। दरअसल सूत्र बता रहे हैं कि शिवपाल यादव बदायूं लोकसभा की गुन्नौर सीट से अपने लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं। कभी सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का गढ़ कहा जाने वाले बदायूं पर शिवपाल की नजर टिकी हुई है और यादव-मुस्लिम समीकरण के सहारे उन्हें जीत का भरोसा भी है। सूत्रों का दावा है कि शिवपाल जसवंत नगर की सीट अपने बेटे के लिए खाली कर सकते हैं और खुद गुन्नौर से चुनाव लड़ सकते हैं।

बदायूं लोकसभा सीट की गुन्नौर विधानसभा सीट से चुनाव की तैयारी

बदायूं लोकसभा सीट की गुन्नौर विधानसभा सीट से चुनाव की तैयारी

दरअसल 2017 के विधानसभा चुनावों में इस इस लोकसभा सीट की 6 में से 5 विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि 2012 के चुनावों में बीजेपी को यहां पर एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। बताया जा रहा है कि शिवपाल सिंह यादव अब गुन्नौर से चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। अखिलेश से गठबंधन न होने की स्थिति में यह सीट उनके लिए मुफीद साबित हो सकती है क्योंकि इसे शुरू से ही यादव बाहुल्य सीट मानी जाती है। उपर से अगर अखिलेश का साथ न भी मिले और यदि संयुक्त भागीदारी मोर्चा के तहत ओवैसी ने उनके पक्ष में प्रचार किया तो यादव-मुस्लिम समीकरण से वह यह सीट आसानी से निकाल सकते हैं।

बेटे को सौंपेंगे जसवंत नगर, खुद संभालेंगे संभल में मोर्चा

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कभी सपा के कद्दावर नेता रहे शिवपाल यादव खुद सेफ सीट की तलाश में है। वह चाहते हैं कि उनकी परम्परागत सीट जसवंत नगर से उनके बेटे आदित्य यादव चुनाव में उतरें। इसकी तैयारियों में वो जुटे हुए हैं। प्रसपा के एक सूत्र का दावा है कि जसवंतनगर से आदित्य यादव चुनाव लड़ सकते हैं और शिवपाल खुद बदायू लोकसभा सीट की गुन्नौर सीट से चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं। दरअसल बदायूं को सपा का गढ़ माना जाता रहा है और अखिलेश के भाई धर्मेंद्र यादव इस सीट से लोकसभा का चुनाव भी जीत चुके हैं। हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में धर्मेंद्र को शिवपाल की वजह से ही हार का सामना करना पड़ा था।

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    जसवंतनगर से आदित्य को मिल सकता है मौका

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    प्रसपा जिला प्रमुख महासचिव कृष्ण मुरारी गुप्ता ने बताया कि अभी इसकी अधिकृत घोषणा नहीं की गई है, यह निर्णय पार्टी हाईकमान ही लेगा। पीसीएफ चेयरमैन आदित्य यादव जिस अंदाज में लगातार जसवंतनगर क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चलाए हुए हैं उससे युवा जोश भरपूर होने से इस संभावना को नकारा भी नहीं जा सकता है। आने वाले दिनों में नए समीकरण बन सकते हैं और जसवंतनगर सीट से आदित्य को मौका मिल सकता है।

    गुन्नौर और जसवंतनगर दोनों सीटों से खुद भी लड़ सकते हैं चुनाव

    गुन्नौर और जसवंतनगर दोनों सीटों से खुद भी लड़ सकते हैं चुनाव

    प्रसपा के सूत्रों की माने तो एक समीकरण यह भी बन रहा है कि शिवपाल दोनों सीटों से खुद भी चुनाव लड़ सकते हैं। शिवपाल को इस बात का भी डर सता रहा है कि कहीं आदित्य को जसवंतनगर से उतारा और खुद गुन्नौर से चुनाव लड़े तो दो जगहों पर ध्यान बंट जाएगा और इससे विरोधी खेमे को हावी होने का मौका मिल जाएगा। खासतौर पर सपा के चाणक्य कहे जाने वाले प्रोफेसर रामगोपाल यादव की राजनीति को लेकर वो सतर्क हैं। उन्हें लगता है कि वो जसवंतनगर में खेल कर सकते हैं। इसलिए उनकी योजना है कि दोनों जगहों से चुनाव लड़कर जीत हासिल कर लें और बाद में एक सीट बेटे के लिए छोड़कर उप चुनाव कराएं। उपचुनाव में उनके पास एक ही सीट पर फोकस करने का पूरा समय रहेगा। चुनाव के बाद यदि फिर बीजेपी की सरकार बनी तो उन्हें योगी की नजदीकीयों का लाभ भी मिल सकता है।

    शिवपाल को है प्रो रामगोपाल यादव से खतरा

    शिवपाल को है प्रो रामगोपाल यादव से खतरा

    सपा की राजनीति को करीब से जानने वाले इटावा के एक वरिष्ठ पत्रकार उवैस चौधरी कहते हैं कि, '' इस बात की चर्चा है कि वो जसवंत नगर सीट बेटे के लिए छोड़ सकते हैं लेकिन उनके सामने परेशानियां भी कम नहीं हैं। शिवपाल से बदला लेने के लिए प्रो रामगोपाल तैयार बैठै हैं और यदि शिवपाल ने यह सीट छोड़ी तो वो आदित्य को हराने के लिए पूरी ताकत लगा देंगे। जो शिवपाल यादव नहीं चाहेंगे। ऐसे में उनकी प्लानिंग दोनों सीटों से चुनाव लड़ने की होगी।''

     बदायूं लोकसभा सीट सपा का गढ़ रही है

    बदायूं लोकसभा सीट सपा का गढ़ रही है

    2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 80 में से केवल पांच सीटें जीती थीं और बदायूं उनमें से एक थी। 4 लाख से अधिक यादव मतदाताओं के साथ बदायूं समाजवादी पार्टी के गढ़ के रूप में जाना जाता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यूपी के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य को उम्मीदवार बनाया था। दरअसल, जिले में मौर्य-शाक्य मतदाताओं के बीच उनके पिता की लोकप्रियता को भुनाने के लिए यह निर्णय लिया गया था, जो बदायूं में लगभग 3 लाख हैं। पेशे से डॉक्टर, संघमित्रा ने 2012 में राजनीति में प्रवेश किया। 2014 में, उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा और 14 प्रतिशत वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। पिछली बार बीजेपी से टिकट मिलने के बाद उन्होंने जीत हासिल की।

    11 अक्टूबर तक अखिलेश के जवाब का इंतजार

    11 अक्टूबर तक अखिलेश के जवाब का इंतजार

    2022 में उत्तर प्रदेश के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें अब छह महीने से भी कम का समय बचा है। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां जोर-शोर से चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। तो वहीं, समाजवादी पार्टी (एसपी) की तरफ से गठबंधन को लेकर कोई जवाब नहीं मिलने पर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव खफा नजर आए। हालांकि, कुछ दिन पहले शिवपाल सिंह यादव ने कहा था कि 11 अक्टूबर तक वो अखिलेश यादव के जवाब का इंतजार रहेगा। अगर जवाब नहीं आता है तो प्रसपा उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा से चुनाव लड़ेगी।

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