UP की सियासत में दो कदम आगे तो एक कदम पीछे आ रहे SBSP चीफ ओम प्रकाश राजभर, BJP से नजदीकियां बढाएंगी मुश्किलें

लखनऊ, 09 अगस्त: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के मुखिया और पूर्व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर यूपी की सियासी पिच पर कभी 'फ्रंटफुट' पर तो 'बैकफुट' पर खेलते नजर आ रहे हैं। राजभर ने पिछले दिनों अचानक ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी। हालांकि इस मुलाकात के बाद राजभर ने कहा था कि यह मुलाकात केवल औपचारिक थी इससे उनके भाजपा विरोधी तेवरों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन उनके इस कदम ने उनके सहयोगी दलों को तो भ्रम में डाल ही दिया है साथ ही उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इस बीच राजभर की पार्टी ने साफतौर पर कहा है कि उसे भाजपा की नीतियों से परहेज है उनके नेताओं से नहीं।

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ओम प्रकाश राजभर जब से योगी मंत्रिमंडल से हटे हैं तब से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार किए हुए हैं। विरोध के बीच अचानक उनका स्वतंत्रदेव सिंह से मिलना यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले नए सियासी समीकरण की आहट माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि राजभर समय से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाहते हैं ताकि भाजपा के साथ ही विरोधी खेमे में भी उनकी अहमियत बनी रहे। हालांकि उनकी इस मुलाकात के बाद क्या वह अपने सहयोगियों के बीच अपनी विश्वसनीयता बनाए रख पाएंगे यही सबसे बड़ा सवाल है।

स्वतंत्रदेव सिंह से मुलाकात के बाद और अपने उपर उठ रहे सवालों के बीच राजभर ने रविवार को वाराणसी में यह बयान देना पड़ा। भाजपा से नजदीकियों की बात को ओम प्रकाश राजभर ने नकाराते हुए कहा कि हम कभी मित्र नहीं बन सकते। यूपी के सीएम की तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही उनकी पहली पसंद हैं। योगी को राजपाठ से दूर ही रहना चाहिए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रत देव सिंह और सुभासपा के चीफ राजभर की मुलाकात को लेकर सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने वन इंडिया डॉट कॉम से बातचीत के दौरान कहा कि इस मुलाकात को लेकर विरोधियों की ओर से जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। शिष्टाचार मुलाकात तो हर पार्टी के नेता करते रहते हैं लेकिन तब तो इस तरह के सवाल नहीं पूछे जाते हैं।

अरुण राजभर कहते हैं '' यह एक औपचारिक मुलाकात थी। सुभासपा को भाजपा की नीतियों से परहेज है उनके नेताओं से नहीं। यदि किसी नेता के साथ सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के रिश्ते हैं तो वह जरूर उनसे मुलाकात करेंगे। इस मुददे को जानबूझकर तूल दिया जा रहा है। भाजपा के साथ तब तक समझौता नहीं हो सकता जब तक वह सामाजिक न्याय की रिपोर्ट को लागू नहीं कर देती।''

कई दलों के नेताओं से मिल चुके हैं ओम प्रकाश राजभर
एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी और सुभासपा के मुखिया ओम प्रकाश राजभर की कुछ दिनों पहले ही लखनऊ में मुलाकात हुई थी। उस समय राजभर ने कहा था कि अगला विधानसभा चुनाव ओवैसी के साथ मिलकर जनभागीदारी मोर्चा के तहत लड़ा जाएगा। ओवैसी से पहले राजभर ने समाजवादी प्रगतिशील गठबंधन के अध्यक्ष शिवपाल यादव, समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव से भी मुलाकात की थी। उनकी कोशिश है कि चुनाव से पहले बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार किया जाए। हालांकि उस दौरान अखिलश यादव ने भी कहा था कि वह बड़े दलों की बजाए छोटे दलों के साथ ही मिलकर चुनाव में उतरना चाहते हैं। हालांकि इस गठबंधन में अभी सीटों को लेकर किसी तरह का फार्मूला तैयार नहीं हुआ था। लेकिन राजभर के इस कदम ने ओवैसी और अखिलेश को एक बार फिर सोचने पर पर मजबूर कर दिया है।

राजभर की विश्वसनीयता खत्म करना चाहती है बीजेपी
यूपी की राजनीति को करीब से जानने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का हालांकि कहना है कि राजभर के इस कदम से उनकी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होगा। भले ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह से उनकी मुलाकात औपचारिक बतायी जा रही है लेकिन सियासत में इसके अपने मायने होते हैं। यूपी की राजनीति की समझ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज कहते हैं, '' जब आप किसी पार्टी को लीड कर रहे होते हैं तो आपका हर एक मूव अहमियत रखता है। राजभर और स्वतंत्रदेव की मुलाकात के दो ही मायने हैं। पहला यह कि या तो राजभर और भाजपा के बीच रिश्ते सुधर रहे हैं जो आने वाले समय में नया गुल खिला सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो ओवैसी और अखिलेश दोनों के लिए ही नुकसान दायक होगा। दूसरा यह कि यदि भाजपा राजभर को लेकर सीरियस नहीं है तो क्या वह राजभर की विश्वसनीयता समाप्त करना चाहती है। निजी मुलाकातों की खबरें मीडिया में लीक करवाना क्या बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है। क्योंकि उसे भी पता है कि यदि एक बार राजभर की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग गया तो उनका खेल चुनाव से पहले ही खत्म हो जाएगा।''

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