थोड़ी चाय की पत्ती भी दे दो साब, गरीब आदमी दूध कहां पीता है, चाय ही पीता है
अखिलेश यादव के मैनिफेस्टो ने बड़ी उम्मीदें जगा दी है प्रदेश के लोगों में। अखिलेश से पहले मिल चुके एक रिक्शावाला को लगा कि इतना हो सकता है तो थोड़ा और क्यों नहीं... और पहुंच गया टीपू भैया के पास।
नई दिल्ली। अखिलेश यादव का चुनावी घोषणा-पत्र सामने आ चुका है। इसमें काफी वादें अखिलेश की तरफ से किए गए हैं। अब इन्हें पढ़ा रिक्शेवाले भैया मणिराम ने, तो वो मुख्यमंत्री से मिलने पहुंच गए हैं और कर डाले मुख्यमंत्री से कई सवाल।

मणिराम एक बार पहले भी मुख्यमंत्री मिल चुके हैं, जब वो पेटीएम के सीईओ को लेकर मुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचे थे। तब मुख्यमंत्री ने उन्हें काफी कुछ चीजें दी थीं। अब वो एक बार फिर पहुंचे और कुछ फरमाइशें कर दीं लेकिन इससे पहले कि वो अपनी बात पूरी करते उनको मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकाल दिया गया।
मणिराम- नमस्कार मुख्यमंत्री जी
अखिलेश- नमस्कार... कैसे हो?
मणिराम- दरअसल, मैं आपके घोषणा पत्र से काफी प्रभावित हुआ हूं, तो आपसे कुछ बात करने चला आया। पहले आया था एक बार पेटीएम के बड़े साब को लेकर तो दरवाजे पर किसी ने रोका भी नहीं.. घोषणा से जुड़ी कुछ बातें पूछनी हैं?
अखिलेश- हां हां आओ.. साब का नाम भूल गए और पेटीएम याद है,ऐसा क्यों? खैर.. ये बताओ, वोट तो दोगे हमें इस बार?
मणिराम- वो साब पेटीएम का नाम खुद से याद नहीं है, मोदी जी डंडा मार-मार के रटा दिए हैं। और भैया वो क्यों नहीं देंगें? आप इतना कुछ देंगे और हम वोट ना दें.. लेकिन मैं कुछ जानना चाहता हूं आपसे।
अखिलेश- हां बताओ...
मणिराम- साहब, आपने ये तो अच्छा किया कि स्मार्ट फोन देने की बात कही लेकिन एक काम और करा दीजिए.. फेसबुक अकाउंट खोलना सिखा दीजिए. वर्ना वो बेकार रहेगा।
अखिलेश - अरे वो तुम्हारे लिए नहीं, पढ़ने वाले लोगों के लिए हैं।
मणिराम- प्रेशर कुकर तो देंगे ना?
अखिलेश - हां, बिल्कुल...
मणिराम- साहब, मेरे घर का चिमटा टूट गया है, वो भी दे दीजिए
अखिलेश- ये क्या बेहूदा सवाल है..
मणिराम- अरे साहब, हमारे यहां कच्चा चूल्हा है, तो चिमटा तो चाहिए ना..
अखिलेश- चिमटा भी मैं ही दूंगा क्या? जाओ यहां से..
मणिराम- साहब गुस्सा ना हों, एक बात तो बताएं.. दूध आप दे रहे हैं ना ?
अखिलेश - हां..
मणिराम- तो फिर थोड़ी चाय की पत्ती भी दे दो साब, गरीब आदमी दूध कहां पीता है, चाय ही पीता है।
अखिलेश- अरे तुम पागल हुए जा रहे हो..
मणिराम- अच्छा साब, आप गेंहू दे रहे हैं तो इसको लेकर एक काम और कर दें
अखिलेश- वो क्या?
मणिराम- आप, गेंहू की जगह आटा ही दे दें.. वो हमारे घर के पास जो आटा चक्की है, वो गेंहू बदल देता है।
अखिलेश- अरे इसे बाहर निकालो.. हम इतना काम किए हैं और ये हमसे पता नहीं क्या-क्या कह रहा है।
मणिराम- अरे भैया आखिरी बात तो सुन लीजिए.. घी के साथ थोड़ा तेल भी दे दें.. मालिश करने को चाहिए सर्दियों में.....
(यह एक व्यंग्य लेख है)












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