Saharanpur Kisan Mahapanchayat: 'जब तक कानून वापसी नहीं तब तक घर वापसी नहीं'

सहारनपुर। नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन को तीन महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है लेकिन ना तो किसान और ना ही सरकार कोई भी अपनी बात से टस से मस हो रहा है। रविवार को उत्‍तर प्रदेश के सहारनपुर में भारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राकेश टिकैत ने कृषि कानून को लेकर जमकर मोदी सरकार पर हमला बोला है, उन्होंने फिर से दोहराया है कि हमें संशोधन नहीं चाहिए, हम बस चाहते हैं कि सरकार नए कृषि कानून को खत्म कर दे। सरकार ने बिना सलाह-मशवरा के कानून बनाया है और अब हमसे पूछ रहे हैं कि कानून में कमी क्या है?

Saharanpur Kisan Mahapanchayat: जब तक कानून वापसी नहीं तब तक घर वापसी नहीं

टिकैत ने कहा कि सरकार नए कानून के जरिए अनाज को तिजोरी में बंद करना चाहती है, भूख पर व्यापार करना चाहती हैं तो ऐसा नहीं होगा, हम ऐसा नहीं होने देंगे। टिकैत ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान एकजुट हैं और इनको सरकार को वापस लेना ही पड़ेगा।सरकार को एमएसपी की गारंटी देनी होगी। जब तक तीनों कानूनों की वापसी नहीं होगी, तब तक किसानों की घर वापसी नहीं होगी। राकेश टि‍कैत ने कहा कि आंदोलन स्‍थल पर सरकार ने हमारे लि‍ए पहले तारबंदी की, फि‍र कटीले तार लगाए।

'सरकार ने किसान की पगड़ी उछाली, तिरंगे का अपमान किया '

सरकार ने किसान की पगड़ी उछालने का काम किया और तिरंगे को ठेस पहुंचाई। सरकार को एमएसपी की गारंटी देनी होगी। जब तक तीनों कानूनों की वापसी नहीं होगी, तब तक किसानों की घर वापसी नहीं होगी। आपको बता दें कि भारतीय किसान यूनियन ने अपने मार्च का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन के नेता टिकैत 1 मार्च को उधमसिंह नगर के रुद्रपुर की महापंचायत में शिरकत करेंगे और इसके बाद वो 2 मार्च को राजस्थान के झुंझनू में महापंचायत में शामिल होंगे तो वहीं 3 मार्च को राजस्थान के ही नागौर में एक बार फिर से महापंचायत होगी। इसके बाद 5 मार्च को यूपी के सैफई में और 6 मार्च को तेलंगाना में किसानों के आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

संसद का घेराव चार लाख की जगह 40 लाख ट्रैक्टरों से होगा

आपको बता दें कि इससे पहले किसान नेता राकेश टिकैत राजस्थान के सीकर में संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत में किसानों को फिर से ट्रैक्टर मार्च के लिए तैयार रहने को कहा था। टिकैत ने कहा था कि अगर केंद्र सरकार तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त नहीं करती है, तो प्रदर्शनकारी किसान संसद का घेराव करेंगे। किसान इसके लिए पूरी तरह से तैयार रहें, उन्हें किसी भी वक्त इससे संबंधित निर्देश दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार संसद का घेराव चार लाख की जगह 40 लाख ट्रैक्टरों से होगा।

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