आरएलडी के वादों की क्या है पूरी हकीकत: जानिए क्यों उठ रहें हैं इनके संकल्प पत्र पर सवाल
लखनऊ, 1 नवंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन अभी तक सियासी तस्वीर साफ नहीं हो पायी है। एक तरफ आरएलडी के चौधरी जयंत सपा और कांग्रेस को दोनों को साधने की कवायद में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर पार्टी ने अपना चुनावी संकल्प पत्र जारी कर दिया है। लेकिन सवाल यह है कि गबंधन की तस्वीर साफ होने से पहले ही जयंत ने संकल्प पत्र क्यों घोषित कर दिया। क्या सपा या कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद इसे बदला जाएगा और एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाकर इन मुद़दों को शामिल किया जाएगा। इन सभी सवालों के जवाब देते हुए आरएलडी ने कहा है कि यह पार्टी के वादे हैं जो सरकार बनने के बाद पूरे किए जाएंगे। इसका किसी दूसरे दल से कोई लेना देना नहीं है।

राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने रविवार को यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसमें सत्ता में आने के पहले छह महीनों में एक करोड़ युवाओं को नौकरियों और रोजगार में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का वादा किया है। रालोद ने यह भी वादा किया कि रालोद की सरकार बनी तो विधानसभा सत्र में एक प्रस्ताव पारित करेगी जिसमें केंद्र से किसानों के विरोध को सम्मानजनक मान्यता देने और नए कृषि कानूनों को तत्काल रद्द करने के लिए कहा जाएगा।
रविवार को जयंत ने जारी किया था घोषणा पत्र
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत सिंह ने सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर लखनऊ में 'लोक संकल्प पत्र 2022' शीर्षक से घोषणापत्र जारी किया। आरएलडी, जो यूपी में विधानसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी करने वाला पहला राजनीतिक संगठन है, ने यह भी वादा किया है कि नए कृषि कानूनों का विरोध करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वालों को सम्मान देने और शहीदों का दर्जा देने का प्रावधान किया जाएगा।
यह पूछे जाने पर कि आरएलडी ने महिला उम्मीदवारों को 40 फीसदी टिकट देने के कांग्रेस के वादे के बाद विधानसभा चुनाव में महिलाओं को कितने टिकट देने की मांग की, जयंत ने कहा कि उनकी पार्टी उन उम्मीदवारों को टिकट देगी, जिनके पास जीतने की क्षमता है। .यह पूछे जाने पर कि वह अपनी 'विजय रथ यात्रा' में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ कब शामिल होंगे, उन्होंने कहा था कि दोनों पार्टियों द्वारा अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के बाद वह मंच साझा करना शुरू कर देंगे।

क्या यूपी के जाट बहुल इलाकों में रालोद को मिलेगी सीटें?
रालोद महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा कि किसान संघों का आंदोलन जारी है, पार्टी को जाट बहुल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सीटें जीतकर वापसी की उम्मीद है। किसानों से उनकी बचत लूटी जा रही है। डीजल की कीमत आसमान छू रही है, उत्पाद का बाजार में कम मूल्य है, और केंद्र सरकार ने प्रत्येक बोरी में उर्वरक की मात्रा में पांच किलोग्राम की कमी की है। एक किसान कैसे जीवित रहेगा यदि ये तीनों कृषि कानूनों को लागू किया जाता है? "
यूपी में बीजेपी को हराने के लिए गठबंधन के लिए तैयार
उन्होंने कहा, 'हम गठबंधन के लिए तैयार हैं और सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत कर रहे हैं। रालोद महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा, हम किसके साथ गठबंधन करेंगे और सीटों को कैसे साझा करेंगे, यह जल्द ही घोषणापत्र से पहले तय किया जाएगा। त्यागी ने कहा कि,
"हम चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र की घोषणा करने वाले पहले दल होंगे। त्यागी ने कहा, "हमें यकीन है कि भाजपा सरकार फिर से सत्ता में नहीं आ रही है, और हमारा गठबंधन पूरी तरह से उसी पर केंद्रित होगा। हमारा एजेंडा स्पष्ट और किसान हितैषी है। विपक्षी दल मिलकर भाजपा को हराएंगे। आरएलडी ने जो भी वादा किया है वो सभी पार्टी का संकल्प है। सरकार बनी तो हम जिसके साथ भी गठबंधन में रहेंगे उससे ये वादे पूरा कराएंगे। चुनाव से पहले किसी तरह का कोई कॉमन मिनिमम प्रोग्राम लागू नहीं होगा। गठबंधन के बाद सरकार बनने पर इस सिलसिलेवार तरीके से लागू किया जाएगा।"

जयंत को साधने में जुटी है कांग्रेस
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अब बस कुछ ही महीने दूर है और सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी अपनी गोटियां सेट करने में लगी हुई हैं। कांग्रेस ने भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए आरएलडी को साधने की कौशिश में जुटी हुई है। इसी को देखते हुए रविवार शाम को एयरपोर्ट पर प्रियंका और जयंत की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अमौसी एयरपोर्ट पर प्रियंका और जयंत के बीच लगभग एक घंटे तक बातचीत हुई और उसके बाद प्रियंका की चार्टड प्लेन से ही जयंत दिल्ली गए।

आरएलडी का दावा- सपा के साथ बन चुकी है सहमति
हालांकि आरएलडी के नेता हमेशा से ये दावा करते रहे हैं कि सपा के साथ उनकी सैद्धांतिक सहमति बन गई है लेकिन राजनीति में संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं और इसीलिए कांग्रेस भी आरएलडी चीफ जयंत चौधरी को लुभाने में जुटी हुई है क्योंकि इसकी जिम्मेदारी जाट नेता दीपेंद्र हुड्डा को सौंपी गई है। सूत्रों का दावा है की कांग्रेस ने जयंत को डिप्टी सीएम बनाने का ऑफर भी दिया है लेकिन गेंद अब जयंत के पाले में है कि वो क्या फैसला लेते हैं। बताया जा रहा है कि जयंत भी इसमें अपने नफा नुकसान का आंकलन कर रहे हैं।












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