Acharya Satyendra Das Family Tree: सत्येंद्र दास के परिवार में कौन-कौन? जानें कैसा था बचपन?
Acharya Satyendra Das Family: राम नगरी अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का बुधवार (12 फरवरी) को माघ पूर्णिमा के दिन निधन हो गया। ब्रेन हेमरेज के कारण 85 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली।
महंत सत्येंद्र दास के निधन से राजनीति गलियारे के साथ-साथ देश में शोक की लहर है। रामलला के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास राम जन्मभूमि में कई सालों से मुख्य पुजारी के रुप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। 33 साल से रामलला की सेवा करने वाले महंत सत्येंद्र दास के परिवार के बारे में आप क्या जानते हैं? उनके परिवार में कौन-कौन था? आइए जानते हैं...
रिपोर्ट के मुताबिक, आचार्य सत्येंद्र दास एक धार्मिक परिवार में जन्मे थे। उनके परिवार में उनके माता-पिता के अलावा उनके दो भाई और एक बहन थीं। हालांकि,उनकी बहन का निधन हो चुका है।
Where Acharya Satyendra Das live:कहां और किसके साथ रहते थे आचार्य सत्येंद्र दास
अपना पूरा जीवन रामलाल को समर्पित करने वाले आचार्य सत्येंद्र दास का बचपन से ही संन्यास की ओर झुकाव रहा था। श्री राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास का जन्म 20 मई 1945 को हुआ था। वे मूल रुप से उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर के रहवासी थे। हालांकि,वह अपने भतीजे प्रदीप दास के साथ अयोध्या के तुलसी चौरा में रहते थे। राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बचपन से ही भक्ति भाव में रुचि रखते थे और अपने पिता के साथ अक्सर अयोध्या जाया करते थे। अयोध्या में उनके पिता अभिराम दास जी के आश्रम में आते थे, जहां सत्येंद्र दास भी जाने लगे।

बता दें कि,अभिराम दास वही संत थे, जिन्होंने 22-23 दिसंबर 1949 को राम जन्मभूमि में गर्भगृह में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता जी की मूर्तियों के प्रकट होने का दावा किया था। इन घटनाओं और अभिराम दास जी की रामलला के प्रति सेवा से प्रभावित होकर, सत्येंद्र दास ने 1958 में संन्यास लेने का निर्णय लिया और घर छोड़ दिया। उनके पिता ने उनके इस निर्णय का समर्थन किया और आशीर्वाद दिया।
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ये थे आचार्य सत्येंद्र दास के गुरु भाई
आचार्य सत्येंद्र दास ने अभिराम दास के आश्रम में ही संस्कृत पढ़ाना शुरू कर दिया था। अभिराम दास के आश्रम में ही उनको तीन गुरु भाई मिले थे। मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास, राम विलास वेदांती और संत धर्मदास ये तीनों गुरु भाई थे।












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