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Ram Mandir: अपनी तनख्वाह से लगाते थे भोग, जानें रामलला की सेवा में 3 दशक से लगे मुख्य पुजारी की कहानी

राम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला विराजमान होने वाले हैं। लेकिन रामलला के इस मंदिर में विराजमान होने का समय काफी लंबा रहा। भक्तों को तीन दशक से भी ज्यादा वक्त से रामलला के राम मंदिर में आने का इंतजार है।

ये 32 साल रामलला ने नीम के पेड़ तले बिताए। इस दौरान उनकी पूजा-पाठ, सेवा, भोग आदि का ध्यान रखने वाले मुख्य पुजारी ने कई कष्ट झेले लेकिन रामलला की सेवा में कभी कोई कमी नहीं आने दी। आज हम आपको बताएंगे रामलला के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास की कहानी।

satyendra das

रामलला के मुख्य पुजारी का घर रामघाट पर स्थित है। अखाड़ों से बड़े द्वार वाला यह घर जिसके दरवाजे से हाथी पर बैठ कर इंसान पार हो जाए, उसके अंदर है रामलला के मुख्य पुजारी का घर।

सत्येंद्र दास को 1 मार्च, 1992 को रामलला का मुख्य पुजारी बनाया गया। पुराने पुजारी लालदास महंत को उनके पद से बेदखल कर दिया गया था। कहा जाता है उनके लक्षण पुजारियों वाले नहीं थे।

सत्येंद्र दास 1949 में गुंबद के भीतर रामलला को स्थापित करने वाले महाराज अभिराम दास जी के शिष्य और संस्कृत विद्यालय के अध्यापक थे। मार्च से दिसंबर तक सब ठीक चला। फिर आया 6 दिसंबर 1992 का दिन। कारसेवकों का हुजूम गुंबद ढहाने की तैयारी में था।

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सत्येंद्र दास ने रामलला को भोज लगाने के बाद सहायक पुजारियों और कुछ कारसेवकों के साथ मिलकर रामलला को सिंघासन सहित पास के नीम के पेड़ के नीचे ले आए। उन्हें डर था कि विवादित ढांचा गिरने से रामलला को कोई नुकसान ना हो।

रामलला उस दिन से गुंबद की बजाय तिरपाल के नीचे पूजे जाने लगे। सत्येंद्र दास बताते हैं कि जितनी सामग्री भोग के लिए मांगी जाती थी प्रशासन उतना उपलब्ध नहीं कराती थी। तब वो अपनी शिक्षक वाली तनख्वाह से रामलला के भोग का इंतजाम करते थे।

मुख्य पुजारी कहते हैं कि साल में दो बार रामलला के लिए वो कपड़े मांगते थे लेकिन केवल रामनवमी पर ही कपड़े भिजवाए जाते थे। आज हर रोज रामलला नए कपड़े पहनते हैं।

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अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार 28 साल तक रामलला की पूजा तिरपाल में हुई। सत्येंद्र दास बताते हैं, जब बारिश में तिरपाल फट जाता था तब फटे तिरपाल को बदलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से इजाजत लेनी पड़ती थी। पानी अंदर घुस जाता था और रामलला के कपड़े भी भीग जाते थे। लेकिन वो कुछ कर नहीं पाते थे।

सत्येंद्र दास ने अपने सहायकों के साथ मिलकर जैसे-तैसे रामलला का ख्याल रखा। उस वक्त उनके चार सहायक हुआ करते थे। अब जल्द ही रामलला अपने नए घर में जाएंगे। वहां तैनाती के लिए 20-25 नए पुजारियों को काशी के पंडित ट्रेंनिंग दे रहे हैं।

सत्येंद्र दास कहते हैं, मंदिर में रामलला के अलावा 16 और मंदिर होंगे, कई सारे भगवान भी, दर्शन करनेवाले भी ज्यादा होंगे, इसलिए ज्यादा पुजारियों की जरूरत रहेगी। जगह बदलेगी, लोग बदलेंगे लेकिन कुछ नहीं बदलेगा तो वो है रामलला का भोग, राग, सेवा, पूजा, अर्चना, आरती और रामधुन।

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