Hormuz Crisis: ओमान का सरेंडर! ट्रंप के डर से रद्द हुआ टोल टैक्स का प्लान, दुनिया ने ली राहत

Donald Trump Oman warning: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट फिर चर्चा में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की कड़ी चेतावनी के बाद ओमान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टोल नहीं लगाएगा।

अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने दावा किया कि ओमान ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिससे वैश्विक व्यापार, तेल सप्लाई और समुद्री सुरक्षा प्रभावित हो। इस बीच खाड़ी क्षेत्र में करीब 2,000 जहाज फंसे होने की खबर ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

Strait of Hormuz crisis

Strait of Hormuz crisis: ट्रंप की धमकी के बाद बदला ओमान का रुख

होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल लगाने की चर्चा के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी। इसके तुरंत बाद ओमान ने अमेरिका को भरोसा दिया कि वह इस योजना का हिस्सा नहीं बनेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि ओमान के राजदूत ने फोन पर साफ कहा कि ऐसी कोई योजना लागू नहीं की जाएगी। ओमान नहीं चाहता कि उस पर अमेरिकी प्रतिबंध लगें या उसके बैंकिंग सिस्टम और व्यापार पर असर पड़े। इससे साफ है कि ट्रंप की चेतावनी का असर सीधे दिखाई दिया है।

क्यों इतना अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा तेल और LNG इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। अगर यहां आवाजाही रुकती है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। भारत, चीन, जापान और यूरोप के कई देश भी इस रूट पर निर्भर हैं। यही वजह है कि अमेरिका लगातार चाहता है कि यहां जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहे और समुद्री सुरक्षा बनी रहे।

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खाड़ी में फंसे 2,000 जहाजों से बढ़ी चिंता

स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, तनाव बढ़ने के कारण करीब 2,000 जहाज इस समय खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं। यह खुलासा दिखाता है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं। जहाजों की आवाजाही धीमी होने से तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है और कई देशों में ईंधन महंगा हो सकता है। शिपिंग कंपनियां भी जोखिम लेने से बच रही हैं। अगर यह स्थिति लंबे समय तक रहती है तो वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापार दोनों पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

ट्रंप प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल करना है। अमेरिका का मानना है कि समुद्री रास्ते खुले और सुरक्षित रहने चाहिए। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है कि जहाज बिना डर और रुकावट के गुजर सकें। अमेरिका को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा तो तेल बाजार में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। यही कारण है कि वॉशिंगटन लगातार ओमान और दूसरे खाड़ी देशों के साथ बातचीत कर रहा है।

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तेल की कीमतों को लेकर राहत की उम्मीद

हालांकि हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन अमेरिका को उम्मीद है कि स्थिति जल्द सामान्य हो सकती है। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जैसे ही शिपिंग दोबारा पटरी पर लौटेगी, तेल की सप्लाई बेहतर हो जाएगी और कीमतें नीचे आ सकती हैं। पिछले कुछ दिनों से निवेशकों की नजर भी इसी इलाके पर बनी हुई है। अगर होर्मुज में तनाव कम होता है तो दुनियाभर के बाजारों को राहत मिल सकती है। लेकिन अगर ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ा, तो फिर तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

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