Ram Mandir Donation Scam: CM Yogi कल अयोध्या में, Champat Rai कार्यक्रम से बाहर, SIT के रडार पर 200 लोग
Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर के पावन परिसर में भक्तों के चढ़ावे की कथित चोरी का विवाद इन दिनों उत्तर प्रदेश की राजनीति को हिला रहा है। ठीक इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार (19 जून 2026) को अयोध्या पहुंच रहे हैं। वे राम मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे, लेकिन इस कार्यक्रम में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को शामिल नहीं किया जा रहा है। प्रशासन ने प्रोटोकॉल लेटर में साफ अनुरोध किया है कि चंपत राय किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि भेजें।
यह घटनाक्रम महज प्रोटोकॉल की औपचारिकता नहीं लगती। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की जांच चल रही है, जिसमें ट्रस्ट की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दल भाजपा पर हमला बोल रहे हैं, जबकि सरकार और ट्रस्ट पारदर्शिता बनाए रखने का दावा कर रहे हैं। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं...

CM योगी का अयोध्या दौरा: प्रोटोकॉल में चंपत राय को छोड़ने का मतलब
मीडिया सूत्रों के अनुसार, CM योगी के कार्यक्रम का प्रोटोकॉल लेटर जारी कर दिया गया है। इसमें चंपत राय से अनुरोध किया गया है कि वे अपना प्रतिनिधि नामित करें और ड्यूटी मजिस्ट्रेट को सूचना दें। राम मंदिर के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई बड़ा कार्यक्रम चंपत राय की अनुपस्थिति में हो रहा है। वे हमेशा VIP कार्यक्रमों में मौजूद रहते थे।
यह दूरी संयोग नहीं मानी जा रही। चढ़ावा चोरी विवाद में SIT सक्रिय है और चंपत राय से पूछताछ हो चुकी है। योगी सरकार ने ट्रस्ट की ही मांग पर SIT गठित की थी। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर दूरी बनाकर सरकार निष्पक्ष जांच का संदेश दे रही है।
चढ़ावा चोरी विवाद: क्या है पूरा मामला?
राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए नकद, सोने-चांदी और अन्य दान की गिनती और रखरखाव में अनियमितताओं के आरोप लगे। सपा नेता पवन पांडेय ने 7 जून को दावा किया कि 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी हुई। अखिलेश यादव ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया। कांग्रेस ने भी हमला बोला।
ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज किया। चंपत राय ने कहा कि आंतरिक ऑडिट चल रहा है और कोई बड़ी अनियमितता नहीं पाई गई। फिर भी ट्रस्ट ने खुद CM योगी से SIT जांच की मांग की ताकि अफवाहें खत्म हों और राम मंदिर की पवित्र छवि बनी रहे।
SIT की जांच:
- 13 जून 2026 को योगी सरकार ने 3 सदस्यीय SIT गठित की (लखनऊ कमिश्नर, IG और फाइनेंस डिपार्टमेंट के स्पेशल सेक्रेटरी)।
- SIT ने राम मंदिर पहुंचकर रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, बैंक डिटेल्स और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की।
- अब तक लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे, रामशंकर (टिन्नू) जैसे कर्मचारियों के नाम सामने आए। कुछ स्थानों पर 2 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई।
- SIT चंपत राय, गोपाल राव और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से पूछताछ कर रही है।
अब बात करते हैं चंपत राय की, रामलला के पटवारी की पूरी कहानी...
Who Is Champat Rai: कौन हैं चंपत राय?
चंपत राय राम मंदिर आंदोलन के सबसे पुराने और प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। उनका जन्म 18 नवंबर 1946 को बिजनौर जिले की नगीना तहसील में हुआ। पिता रामेश्वर प्रसाद बंसल, माता सावित्री देवी। RSS से जुड़ाव युवावस्था में हुआ। आपातकाल में जेल गए। केमिस्ट्री लेक्चरर की नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन में कूद पड़े।
उनकी भूमिका क्या...
- दस्तावेज संग्रह और कानूनी लड़ाई में अहम योगदान।
- VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
- 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव बने।
- भूमि पूजन से प्राण प्रतिष्ठा तक हर प्रक्रिया की निगरानी।
वे अविवाहित हैं और अपना पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया। उन्हें 'रामलला का पटवारी' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि हजारों दस्तावेज और साक्ष्य उन्होंने सुरक्षित रखे और अदालत में हिंदू पक्ष को मजबूत किया।
चंपत राय और गोपाल राव की गिरफ्तारी की मांग?
आपको बता दें कि यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय 18 जून को अयोध्या पहुंचे और बोले कि भाजपा चढ़ावा चोरी कर रही है। चंपत राय और गोपाल राव की गिरफ्तारी होनी चाहिए। सोने की ईंटें गायब हैं। हाईकोर्ट जज से जांच कराई जाए। सपा ने भी सरकार पर दबाव बनाया।
राम मंदिर में CEO नियुक्ति की संभावना?
विवाद के बाद ट्रस्ट और सरकार काशी विश्वनाथ मंदिर मॉडल पर विचार कर रही है। एक सीनियर IAS अधिकारी को CEO बनाकर वित्तीय पारदर्शिता, दान प्रबंधन और प्रशासन को मजबूत करने की चर्चा है। यह कदम जवाबदेही बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किन बड़े सवाल पर SIT तलाश रही जवाब?
- चढ़ावा गिनती की प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
- CCTV फुटेज डिलीट होने के आरोप सही हैं?
- अकाउंट्स ऑफिसर महिपाल सिंह को क्यों हटाया गया?
- सोने-चांदी की ईंटों और मूल्यवान दान का हिसाब कहां है?
- ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी कहां कमजोर पड़ी?
राम मंदिर आंदोलन दशकों की मेहनत का नतीजा है। चंपत राय जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं ने इसे संभव बनाया। अब समय है कि व्यवस्था को और मजबूत किया जाए ताकि रामलला के दरबार में कोई अनियमितता न हो। भक्तों का विश्वास सबसे ऊपर है।
यह विवाद यूपी की सियासत को भी प्रभावित करेगा। 2027 चुनाव से पहले राम मंदिर मुद्दा फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार पारदर्शिता और जवाबदेही पर। योगी सरकार की छवि और राम मंदिर ट्रस्ट की साख दोनों दांव पर हैं।
CM Yogi Adityanath Ayodhya Visit Schedule: सीएम योगी का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम
बात करें पूरे दौरे की तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर अयोध्या की रुदौली विधानसभा क्षेत्र में स्थित मां कामाख्या धाम हेलीपैड पर उतरेंगे। यहां वे सबसे पहले प्रसिद्ध मंदिर में पूजा-अर्थना करेंगे और वीरांगना झलकारी बाई की भव्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसी के साथ वे क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण जनोपयोगी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर जनता को बड़ी सौगात देंगे।
समय स्थान और कार्यक्रम
- सुबह 10:35 बजे कामाख्या धाम पहुंचेंगे, प्रतिमा अनावरण व विकास परियोजनाओं की शुरुआत
- दोपहर 12:05 बजे गोंडा प्रस्थान, पीडब्ल्यूडी परियोजनाओं की समीक्षा बैठक
- दोपहर 02:40 बजे वापसी अयोध्या आगमन
- दोपहर 03:00 बजे हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन व पूजन
- दोपहर बाद जैन मंदिर कार्यक्रम और महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव में शिरकत
- शाम 05:10 बजे रामायण वैक्स म्यूजियम का उद्घाटन
- शाम 06:00 बजे लखनऊ के लिए प्रस्थान













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