कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर? 3 महीनों में 13 दोषियों को सुनाई मृत्युदंड, ज्ञानव्यापी से भी ही खास कनेक्शन
Who Is Judge Ravi Kumar Diwakar: उत्तर प्रदेश के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर एक बार अपने कड़क फैसले को लेकर सुर्खियों में हैं। मुजफ्फरनगर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में तैनात जज रवि दिवाकर ने महज तीन महीनों के भीतर गंभीर आपराधिक मामलों में लगातार कड़े फैसले सुनाकर नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने बीते 6 अप्रैल से 6 जुलाई 2026 के बीच हुए जघन्य हत्याकांडों में 13 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
मुज्जफरनगर में महज तीन महीने के दौरान अलग-अलग मामलों में 13 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद न्यायिक और सामाजिक हलकों में एक नई चर्चा छिड़ गई है। इससे न्याय प्रणाली में पीड़ित परिवारों का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।

भारत की न्यायिक प्रणाली में मृत्युदंड को "दुर्लभ से दुर्लभतम" (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) मामलों में ही दिया जाता है। जब कोई अपराध समाज की अंतरात्मा को झकझोर देता है और आरोपी के सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं बचती, तब अदालतें ऐसा कड़ा कदम उठाती हैं। मुजफ्फरनगर कोर्ट के जज रवि कुमार दिनकर ने जिन मामलों मृत्युदंड का फैसला सुनाया है इन अलग-अलग मामलों में क्रूरता की सीमाएं पार की गई थीं। आइए जानते हैं कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर और कौन से है वो मामले जिनमें 13 लोगों को फांसी के फंदे पर लटकाने का सजा सुनाकर कड़ा संदेश दिया है कि गंभीर अपराध करके बचना नामुमकिन है।
3 महीनों में किन मामलों में सुनाई मृत्युदंड की सजा?
मुजफ्फरनगर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) के जस्टिस रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने छह बड़े मामलों में एक के बाद एक मृत्युदंड के फैसले सुनाए हैं।
- 6 अप्रैल 2026: अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड के दोषी सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड की सजा
- 28 अप्रैल 2026: शेखर हत्याकांड के दोषी मुकेश और उसके तीन बेटे प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड की सजा
- 30 मई 2026 : राजेश देवी हत्याकांड के दोषी रईस को मृत्युदंड की सजा
- 20 जून 2026: राजेंद्र सैनी हत्याकांड जिसमें करौली निवासी राजेंद्र की वर्ष 2018 में हत्या कर शव को जलाने के मामले के रामकरण उर्फ सावन गिरी और गीलू को मृत्युदंड की सजा
- 2 जुलाई 2026: बुढ़ाना मोड़ पर वर्ष 2020 में गश्त के दौरान होमगार्ड रतिराम की चाकू मारकर हत्या करने के मामले में दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
- 6 जुलाई 2026: किसान राजबीर सिंह हत्याकांड के दोषी पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार और सहदेव उर्फ पप्पू को मृत्युदंड की सजा दी गई है।
16 साल बाद किसान के परिवार को मिला न्याय
24 अगस्त 2010 को तितावी क्षेत्र के मांडी गांव में प्रधानी चुनाव की रंजिश के चलते किसान राजबीर सिंह की खेत पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद 6 जुलाई 2026 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार और सहदेव उर्फ पप्पू को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना सुनाया। पीड़ित परिवार को इस फैसले के लिए करीब 16 साल तक न्याय का इंतजार करना पड़ा।
हालांकि कानून के अनुसार, इन सभी मामलों में दोषियों को मृत्युदंड की सजा के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील करने का संवैधिनिक अधिकार प्राप्त है। फांसी की सजा की सजा पर अमल उच्च न्यायालय की संपुष्टि और अपील के बाद ही तय होगा।

कौन हैं जस्टिस रवि कुमार दिवाकर?
जस्टिस रवि कुमार दिवाकर मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले हैं। निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म 05 जुलाई 1980 को जन्में रवि कुमार दिवाकर के पिता स्वर्गीय पुट्टू लाल थे। इन्होंने वर्ष 1997 में हाईस्कूल, 1999 में इंटरमीडिएट, 2002 में बी.कॉम., 2005 में एल.एल.बी. तथा 2007 में एल.एल.एम. की डिग्री हासिल की।
17 दिसंबर 2009 को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में मुनसिफ/सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में नियुक्त होकर न्यायिक सेवा का प्रारम्भ किया। 21 मार्च 2017 को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं क्लास-I पद पर प्रमोशन मिला।
ज्ञानवापी मस्जिद केस में सर्वे कराने का दिया था ऐतिहासिक निर्देश?
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर इससे पहले वाराणसी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की पोस्ट पर तैनात थे।वर्ष 2022 में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे कराने का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील आदेश दिया था। इन्होंने ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी के दैनिक दर्शन-पूजन और सर्वे संबंधी प्रकरण में अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया था। उस फैसले के बाद से वे देश भर की मीडिया और कानूनी जगत के केंद्र में आ गए थे। सुरक्षा चिंताओं के बीच उनका तबादला मुजफ्फरनगर किया गया था, जहां उनकी अदालत ने गंभीर अपराधों के मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की है।
"मेरी मां और पत्नी को मेरी फिक्र रहती है"
ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजय वर्मा को पत्र भेजा था और बताया था कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। लेटर में उन्होंने अपने घर पर स्थायी सुरक्षा गार्ड की तैनाती की मांग करते हुए खतरा का इनपुट भी शेयर किया था। इसके साथ इसमें उन्होंने लिखा था जब मैं घर से बाहर रहता हूं तो मेरी पत्नी और मेरी मां को हर वक्त मेरी फिक्र रहती है।












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