मुंबई में मूसलाधार बारिश का कहर: वसई-नालासोपारा के बीच जलभराव से लोकल ट्रेन सेवा ठप
मुंबई और उसके उपनगरीय इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर महानगर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा इस भारी बारिश के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। पश्चिमी रेलवे मार्ग पर वसई और नालासोपारा स्टेशनों के बीच रेल पटरियों पर भारी जलजमाव होने की वजह से लोकल ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह चरमरा गया है।
रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, चर्चगेट से विरार की तरफ जाने वाली लोकल ट्रेनों को फिलहाल वसई तक ही चलाया जा रहा है। इसका सीधा असर विरार जाने वाले रोजाना के यात्रियों पर पड़ा है, जो बीच रास्ते में ही फंस गए हैं। पटरियों पर पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों को रोका गया है।

वसई और नालासोपारा में पटरियों पर जलभराव, ट्रेनें प्रभावित
भारी बारिश के कारण वसई और नालासोपारा रेलवे स्टेशनों पर पटरियां पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। इसी स्थिति को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने वसई से विरार के बीच लोकल ट्रेन सेवा को पूरी तरह से स्थगित कर दिया है। पटरियों पर भरे पानी को पंप के जरिए निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन भारी बारिश के चलते इसमें लगातार बाधा आ रही है
इस बीच, विरार से डहाणू रोड के बीच चलने वाली लोकल ट्रेन सेवाएं भी लगभग आधे से पौने घंटे की देरी से चल रही हैं। इस रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को प्लेटफार्मों पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, मुंबई आने-जाने वाली कई लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों को भी काफी धीमी गति से चलाया जा रहा है ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके।
मुंबई की लोकल ट्रेनों में हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं। इस अचानक आई रुकावट की वजह से नौकरीपेशा वर्ग और जरूरी काम से बाहर निकले लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वसई रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई है, क्योंकि विरार और उसके आगे के स्टेशनों तक जाने के लिए कोई वैकल्पिक साधन उपलब्ध नहीं है।
प्रशासन ने जारी की सलाह: केवल जरूरी होने पर ही निकलें बाहर
रेल यात्रा में आई इस बड़ी बाधा को ध्यान में रखते हुए, रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील की है। यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने गंतव्य के लिए रवाना होने से पहले उपनगरीय ट्रेनों के समय और परिचालन की ताजा अपडेट जरूर जांच लें, ताकि उन्हें स्टेशन पर न फंसना पड़े।
प्रशासन ने विभिन्न निजी और सरकारी कार्यालयों के प्रबंधन से भी अपील की है कि वे वर्तमान स्थिति को देखते हुए अपने कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने की अनुमति दें। सड़कों पर भी भारी जलभराव के कारण यातायात की स्थिति खराब है, जिसके चलते निजी वाहनों और बसों से यात्रा करना भी इस समय सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।
मुंबई के इतिहास में जुलाई का महीना हमेशा से भारी बारिश के लिए जाना जाता रहा है। विशेष रूप से मुंबई के उत्तरी उपनगर जैसे वसई, विरार और नालासोपारा दलदली और निचले इलाकों में स्थित होने के कारण जलजमाव के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। जब भी समुद्र में ऊंची लहरें (हाई टाइड) उठती हैं और उसी समय भारी बारिश होती है, तो इन इलाकों से पानी की निकासी बेहद धीमी हो जाती है।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान: 8 जुलाई के बाद मिलेगी राहत
मौसम विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में अगले कुछ घंटों तक बारिश का यह दौर जारी रहने की आशंका है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 8 जुलाई के बाद बारिश की तीव्रता में कुछ कमी आ सकती है। इसके बाद ही पटरियों से पानी पूरी तरह साफ होने और ट्रेन सेवाओं के सामान्य होने की उम्मीद की जा रही है।
इस संकट की घड़ी में रेलवे की तकनीकी टीमें और राहत दल लगातार सक्रिय हैं। वसई और नालासोपारा के संवेदनशील स्थानों पर हाई-पावर पंप लगाए गए हैं ताकि बारिश रुकते ही पानी को तुरंत बाहर निकाला जा सके। पश्चिमी रेलवे के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर लगातार पल-पल की जानकारी साझा की जा रही है ताकि यात्रियों को सही और सटीक अपडेट मिल सके।
मौसम के इस मिजाज को देखते हुए फिलहाल सावधानी बरतना ही सबसे बड़ा उपाय है। जब तक बारिश पूरी तरह थम नहीं जाती और जलभराव की समस्या दूर नहीं होती, तब तक मुंबईकरों को अपनी यात्रा की योजना बहुत सोच-समझकर बनानी होगी। सुरक्षित दूरी बनाए रखना, अफवाहों पर ध्यान न देना और आधिकारिक सूचनाओं का पालन करना ही इस समय सबसे सुरक्षित तरीका है।












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