NIA Raids: बिहार से दिल्ली तक NIA की ताबड़तोड़ छापेमारी, कंबोडिया नौकरी रैकेट पर एक्शन
NIA Raids Cambodia Cyber Scam: कंबोडिया में भारतीय युवाओं को नौकरी का झांसा देकर फंसाने वाले मानव तस्करी और साइबर गुलामी रैकेट के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कुल छह ठिकानों पर छापेमारी की। बिहार के गोपालगंज, सीवान, सारण और पूर्वी चंपारण में भी तलाशी ली गई।
इस दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल उपकरण और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में सामने आया है कि युवाओं को अच्छी नौकरी का लालच देकर कंबोडिया भेजा जाता था, जहां उन्हें जबरन ऑनलाइन ठगी करने वाली कंपनियों में काम कराया जाता था।

बिहार समेत तीन राज्यों में NIA की छापेमारी
NIA ने इस मामले में बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के छह अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। बिहार के गोपालगंज, सीवान, सारण और पूर्वी चंपारण जिले कार्रवाई के केंद्र रहे। जांच एजेंसी ने बताया कि ये ठिकाने गिरफ्तार आरोपियों और फरार लोगों के सहयोगियों से जुड़े थे। तलाशी के दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। इनके जरिए एजेंसी पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
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नौकरी का झांसा देकर युवाओं को भेजा जाता था कंबोडिया
जांच में पता चला है कि गिरोह भारत के बेरोजगार और जरूरतमंद युवाओं को विदेश में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी का लालच देता था। इसके लिए अलग-अलग राज्यों में एजेंट और ट्रैवल एजेंटों का इस्तेमाल किया जाता था। जब युवक कंबोडिया पहुंचते थे, तो उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते थे और उन्हें ऐसी कंपनियों के हवाले कर दिया जाता था जो ऑनलाइन ठगी का काम करती थीं। इस तरह युवाओं को धोखे से साइबर अपराध के जाल में फंसा दिया जाता था।
मना करने पर दी जाती थी अमानवीय यातना
पीड़ितों ने NIA को बताया कि कंबोडिया पहुंचने के बाद उन्हें जबरन साइबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया जाता था। यदि कोई काम करने से इनकार करता था तो उसके साथ मानसिक और शारीरिक अत्याचार किया जाता था। कई लोगों को बिजली के झटके दिए गए, कमरे में बंद रखा गया और खाना-पानी तक नहीं दिया गया। पीड़ितों के मुताबिक उन्हें लगातार डराकर रखा जाता था ताकि वे भाग न सकें और मजबूरी में गिरोह के लिए काम करते रहें।
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मास्टरमाइंड आनंद कुमार सिंह अब भी फरार
इस पूरे गिरोह का मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह बताया गया है, जो अभी भी फरार है। NIA ने मई 2026 में उसके साथ प्रह्लाद कुमार सिंह, अभय नाथ दुबे, अभिरंजन कुमार और रोहित यादव के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इससे पहले फरवरी 2026 में अभय, अभिरंजन और रोहित को कंबोडिया से लौटने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है।
पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी NIA
NIA अब इस मानव तस्करी और साइबर अपराध से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जाएगी ताकि देश और विदेश में फैले इस गिरोह के बाकी सदस्यों की पहचान हो सके। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि अब तक कितने भारतीय युवाओं को इस तरीके से कंबोडिया भेजा गया और इस रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे भी जारी रहेगी।












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