रामगोपाल ने किया ऐसा पुख्ता इंतजाम, SC तक में नहीं होगी मुलायम शिवपाल की सुनवाई
समाजवादी पार्टी अब भले अखिलेश यादव की हो चुकी हो, फिर भी तमाम और विवादों से सुरक्षित करने के लिए रामगोपाल यादव ने यह चाल चली है।
लखनऊ। चुनाव आयोग की ओर से समाजवादी पार्टी और साइकिल चुनाव चिन्ह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गुट को देने के एक दिन बाद पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव ने मंगवार को सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया है। कैविएट में यादव ने अपील की है कि वो बिना अखिलेश गुट को सुन, आयोग के निर्णय के बाद कोई सुनवाई ना करें। कैविएट में कहा गया है, अगर असंतुष्ट पक्ष, मुलायम सिंह यादव और शिवपाल, सुप्रीम कोर्ट में किसी याचिका के लिए आते हैं तो बिना हमारा पक्ष सुने, सुप्रीम कोर्ट एक पक्षीय सुनवाई ना करे।

बता दें कि अखिलेश के समर्थन में 205 विधायक, में से 56 विधान परिषद से विधायक, सांसदों में से 15 सांसद ( राज्यसभा और लोकसभा ), में से 28 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, 4716 राष्ट्रीय अधिवेशन प्रतिनिधियों ने समर्थन में हलफनामा दिया था। यह बात दीगर है कि मुलायम सिंह यादव ने राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया था, जिसे रद्द कर दिया था। हालांकि अखिलेश के पक्ष में आए फैसले के संबंध में नई बात यह भी सामने आई थी कि मुलायम सिंह यादव अपने खेमे का संख्याबल की ताकत नहीं दिखा सके। बता दें कि आयोग ने विवाद के बाद 9 जनवरी को अखिलेश और मुलायम के समूह से समर्थन के संबंध में शपथ पत्र मांगा था।
अखिलेश की ओर से विधायक ( विधानसभा और विधान परिषद ) सांसदों (राज्यसभा और लोकसभा ) के शपथपत्र दिए गए लेकिन मुलायम के समूह की ओर से सिर्फ मुलायम का शपथ पत्र ही दाखिल किया गया था। इसके बाद आयोग 1968 के इलेक्शन सिंबल ऑर्डर के अनुसार संख्या बल के आधार पर मु्ख्यमंत्री अखिलेश के पक्ष में अपना फैसला दिया। बता दें कि समाजवादी पार्टी में झगड़ा उस समय बढ़ा जब 1 जनवरी को राष्ट्रीय सम्मेलन में अखिलेश यादव को एक धड़े ने पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। ये भी पढ़ें: 'हमें आडवाणी बना दिया रे अक्लेस.. लोग हंस रए हैं हमाए ऊपर'












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