UP में "विपक्षी एकता" की उम्मीदों को जिंदा कर गई राहुल गांधी की Bharat Jodo Yatra ?
Rahul Gandhi's Bharat Jodo Yatra : यूपी में पार्टी नेताओं ने भारत जोड़ो यात्रा से काफी उम्मीदें लगाई हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा जीती गई दो सीटें राज्य में उसका अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है।

Bharat Jodo Yatra Rahul Gandhi : उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को कांग्रेस की उम्मीदों को कितना जिंदा रख पायी। राहुल ने तीन दिन तक यूपी में अपनी यात्रा निकाली। इस दौरान राहुल यूपी के तीन जिलों से होकर गुजरे। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं का जमावड़ा देखा गया। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो राहुल गांधी की इस यात्रा से यूपी में कांग्रेस को कितना लाभ हुआ है यह बड़ा सवाल है। खासतौर से ऐसे समय में जब यूपी में कांग्रेस विधानसभा में दो और लोकसभा में एक सीट तक सिमट गई है, तब राहुल केवल तीन जिलों से ही होकर क्यों निकल गए। हालांकि कांग्रेस इसका आंकलन अपने हिसाब से कर रही है। कांग्रेस के सूत्रों की माने तो कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के उत्तर प्रदेश चरण ने राज्य में विपक्षी एकता की नई उम्मीद जगाई है।

अखिलेश-माया-जयंत ने दी थी शुभकामनाएं
हालांकि प्रमुख विपक्षी नेता- समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी राहुल गांधी के साथ यात्रा में शामिल नहीं हुए। हालांकि इन नेताओं ने राहुल की यात्रा को अपनी शुभकामनाएं जरूर दीं। इसके अलावा, उनकी पार्टियों के कैडर के साथ-साथ चंद्रशेखर आज़ाद की भीम आर्मी ने न केवल यात्रा का स्वागत किया बल्कि स्थानीय नेता भी मार्च में शामिल हुए। राहुल की यह यात्रा गाजियाबाद, बागपत और शामली से होकर गुजरा था।

मिशन 2024 के लिए सपा-बसपा का साथ रहना जरूरी
यूपी में राहुल की यात्रा के केवल तीन जिलों से होकर निकलने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि एक तो यूपी में कांग्रेस का कोई वजूद नहीं बचा है। विधानसभा में दो सीटों और लोकसभा में एक सीटों वाली कांग्रेस यह नहीं चाहती थी कि वह सपा और बसपा को अपनी यात्रा की वजह से नाराज करे। कांग्रेस को भी पता है कि 2024 के आम चुनाव के लिहाज से यूपी में रालोद, सपा और बसपा का साथ रहना बहुत जरूरी है क्योंकि यूपी में कांग्रेस का अस्तित्व संकट में है। ऐसे में यदि 2024 में गठबंधन जैसी कोई स्थिति आती है तो कांग्रेस को इन दलों का साथ मिलना बहुत जरूरी है।
Recommended Video


कांग्रेस का दावा- राहुल की यात्रा ने कार्यकर्ताओं को दी नई ऊर्जा
हालांकि कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि भारत जोड़ो यात्रा में जनता की प्रतिक्रिया ने कांग्रेस की प्रदेश इकाई में ऊर्जा भर दी है। भारत जोड़ो यात्रा के कोआर्डिनेटर और प्रदेश के कांग्रेस नेता अंशु अवस्थी ने कहते हैं, ''यात्रा की प्रतिक्रिया ने न केवल भाजपा बल्कि अन्य दलों को भी उठ खड़ा होने और नोटिस लेने के लिए मजबूर कर दिया है। हमें हर जगह से समर्थन मिल रहा है। हर कोई राहुल गांधी के साथ चलना चाहता है। यूपी में कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि सपा, बसपा और रालोद अब 2024 के लिए भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने में कांग्रेस के महत्व को स्वीकार करने के लिए मजबूर होंगे।''

दिग्गजों का साकारात्मक संदेश महागठबंधन के लिहाज से अच्छा संकेत
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि विपक्षी दिग्गजों के सकारात्मक संदेश भाजपा के खिलाफ महागठबंधन में तब्दील हो सकते हैं या नहीं। अभी इसके लिए 2024 के आने का इंतजार करना होगा। जैसे जैसे लोकसभा चुनाव करीब आएगा वैसे वैसे तस्वीर साफ होगी। कांग्रेस की इस यात्रा को लेकर सपा प्रवक्ता राजीव राय ने कहा, "समाजवादी पार्टी विपक्षी एकता में विश्वास करती है, लेकिन महागठबंधन का फैसला हमारे आलाकमान के पास होगा। गठबंधन स्थिति और परिस्थिति के अनुसार विकसित होते हैं। फिलहाल तो एक बात तय है कि हर कोई बीजेपी से तंग आ चुका है।"

भारत जोड़ो यात्रा से यूपी कांग्रेस को है काफी उम्मीदें
यूपी में कांग्रेस की गंभीर स्थिति को देखते हुए पार्टी नेताओं ने भारत जोड़ो यात्रा से काफी उम्मीदें लगाई हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा जीती गई दो सीटें राज्य में उसका अब तक का सबसे खराब चुनावी प्रदर्शन है। 2017 के राज्य चुनाव में पार्टी का वोट शेयर 6.25 प्रतिशत से गिरकर 2.33 प्रतिशत हो गया। 2017 में, कांग्रेस ने 403 सदस्यीय विधान सभा में केवल सात सीटें जीती थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में, कांग्रेस ने रायबरेली से सिर्फ एक सीट जीती थी। राहुल अमेठी में भाजपा की स्मृति ईरानी से हार गए थे।

राहुल की यात्रा ने दिया विपक्ष को एकसाथ आने का मौका
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राहुल की यात्रा ने वास्तव में विपक्ष को एक साथ आने का मौका दिया है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर आर पी पांडेय कहते हैं कि, ''लोग राज्य के चुनावों में स्थानीय मुद्दों पर मतदान करते हैं, लेकिन लोकसभा के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, यूपी में पार्टी के मजबूत न होने पर भी कांग्रेस की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है।"












Click it and Unblock the Notifications