UP में ओवैसी से निपटने के लिए प्रियंका का प्लान, इमरान प्रतापगढ़ी के सहारे AIMIM को काउंटर करने की तैयारी
लखनऊ, 27 अगस्त: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस यहां अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी पूरी कोशिश में जुटी हैं कि यूपी में 2022 में होने वाले चुनाव में पार्टी और संगठन को किसी तरह खड़ा किया जाए। इसके लिए वो लगातार कड़े फैसले भी ले रही हैं। प्रियंका ने हाल ही में मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी को कांग्रेस के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक सेल का अध्यक्ष बनाया था। कांग्रेस के सूत्रों की माने तो इमरान को यह पद इसलिए मिला क्योंकि वो यूपी में प्रियंका के काफी नजदीक थे। हालांकि कांग्रेस के रणनीतिकारों की माने तो इमरान प्रतापगढ़ी को आगे लाने का मकसद IMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के असर को कम करना है। कांग्रेस को पता है कि बिहार चुनाव की तरह यूपी में भी ओवैसी की पार्टी कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने महाराष्ट्र, बिहार और फिर पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ा। कांग्रेस को इसका नुकसान भी उठाना पड़ा था। ऐसा माना गया कि बिहार में कांग्रेस का मुस्लिम वोट बैंक बंट गया और कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के लोग ही यह स्वीकार करते हैं कि असदुद्दीन ओवैसी का बेबाक अंदाज, भाषण देने का तरीका मुस्लिम युवाओं को काफी पसंद आता है।
यूपी में ओवैसी की पार्टी अकेले लड़ी कांग्रेस का नुकसान
कांग्रेस के नेताओं को यह भी डर सता रहा है कि ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में भी अकेले दम पर चुनाव लड़ा तो इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकेगा। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अपना-अपना दावा करती आ रही हैं। ऐसे में अगर AIMIM भी चुनाव लड़ती है तो इसका नुकसान भी कांग्रेस को ही उठाना पड़ेगा। एआईएमआईएम के यूपी चीफ ने भी साफतौर पर कहा है कि यदि किसी दल के साथ समझौता नहीं हुआ तो वो यूपी में अकेले ही ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

एआईएमआईएम के यूपी चीफ शौकत अली हालांकि कांग्रेस के साथ ही सपा, बसपा की नीतियों पर जमकर बरसे। शौकत कहते हैं कि,
'' देखिए। हम तो चाहते हैं कि सभी पार्टियां एकजुट होकर बीजेपी का मुकाबला करें। लेकिन हमारे साथ कोई हाथ मिलाने को तैयार ही नहीं है। बीजेपी को सत्ता में न आने से रोकने की जिम्मेदारी सबकी है। अंतिम समय तक हमारा प्रयास गठबंधन का ही रहेगा लेकिन यदि बात नहीं बनी तो यूपी में 150 सीटों पर हम चुनाव लड़ सकते हैं।''
इमरान प्रतापगढ़ी को सामने लाकर ओवैसी को काउंटर करने का प्लान
कांग्रेस के सूत्रों की माने तो राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी का मानना था कि इमरान चूंकि मशहूर शायर हैं और मुस्लिम युवाओं के भीतर उनकी फैन फालोइंग ज्यादा है लिहाजा इमरान ओवैसी को सीधेतौर पर काउंटर कर सकते हैं। कांग्रेस की यह रणनीति है कि जिस तरह ओवैसी सरकार की नीतियों के खिलाफ हमेशा आक्रामक तेवर में ही हमल बोलते हैं वह मुस्लिम युवाओं में काफी पंसद किया जाता है। इसी तरह इमरान की भी मुस्लिम यूथ के बीच अच्छी पहचान है और फैन फालोइंग भी काफी तगड़ी है इसलिए वह हर लिहाज से ओवैसी को टक्कर दे सकते हैं।

कम समय में इमरान प्रतापगढ़ी को मिली बड़ी पहचान
इमरान प्रतापगढ़ी हालांकि कांग्रेस के लिए स्टार प्रचारक की भूमिका भी निभा चुके हैं। इमरान ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से MA की डिग्री हासिल की है। उनका राजनीतिक सफर 2019 में शुरू हुआ जब कांग्रेस ने उन्हें मुरादाबाद लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। एआईएमआईएम ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 38 सीटों पर चुनाव लड़ी और एक भी सीट नहीं जीती। पार्टी का चुनाव में महज 0.24 फीसदी वोट शेयर रहा।
2017 के चुनाव में 36 सीटों पर जमान जब्त हुई थी
औवैसी की पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में 38 सीटों पर चुनाव लड़ी थी लेकिन इसमें से 37 सीटों पर उनके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। इस बार ओवैसी की नजर सबसे पहले उन 7 सीटों पर है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें 7 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। संभल जिले की सदर सीट पर ओवैसी की पार्टी दूसरे नंबर पर थी। मुरादाबाद, संभल की चार विधानसभा सीटों के अलावा सिद्धार्थनगर, कुशीनगर और फिरोजाबाद की एक-एक सीट पर ओवैसी की पार्टी कैंडिडेट को 2017 चुनाव में 7000 से ज्यादा वोट मिले थे।
हालांकि यूपी में ओवैसी के आने और उनसे निपटने की तैयारियों के बारे में जब इमरान प्रतापगढ़ी से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कुछ बोलने से मना कर दिया।












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