VIDEO: 'पहले हम जाएंगे वहां व्यवस्था करेंगे, फिर आप आना', प्रेमानंद महाराज ने किस से किया ये वादा?
वृंदावन के श्री हित केली कुंज आश्रम में हाल ही में भक्ति और वात्सल्य का एक अत्यंत दुर्लभ और मार्मिक पल देखने को मिला। पूज्य भाई जी महाराज की कृपापात्र कही जाने वाली कमल बहन जी ने आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। दोनों की बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। वायरल हो रहा है।
गिरते स्वास्थ्य के बावजूद, कमल बहन जी की इच्छा थी कि वे प्रेमानंद महाराज के दर्शन करें, और इसी के चलते वह आश्रम पहुंचीं। जब महाराज ने बहन जी का कमजोर होता शरीर देखा, तो उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि 'आपका शरीर तो बहुत कमजोर हो रहा है।' इस पर बहन जी ने अत्यंत भावुकता से उत्तर दिया कि 'अब वो (ईश्वर) बुला रहे हैं।'

'पहले हम जाएंगे और वहां व्यवस्था करेंगे'
इस मार्मिक जवाब पर प्रेमानंद महाराज ने एक अविस्मरणीय वादा किया। उन्होंने बहन जी से कहा कि 'पहले हम जाएंगे और व्यवस्था करेंगे, फिर आप आना। श्री जी (राधा रानी) और उनकी सखियों संग व्यवस्था करेंगे।' बहन जी ने इस पर कहा कि उनकी इच्छा महाराज के दर्शन करने की थी। इस दौरान महाराज ने उन्हें बरसाना की राधा रानी का लहंगा प्रेम पूर्वक भेंट किया।
इस मिलन का सबसे भावुक पल तब आया जब कमल बहन जी ने पूज्य भाई जी महाराज की चरण रज (चरणों की धूल) प्रेमानंद महाराज को अर्पित की। महाराज ने बिना किसी विलंब के इस पवित्र रज को अपने मुख में ग्रहण किया और अत्यंत श्रद्धा से सिर पर लगाया।
बहन जी ने भी महाराज को रज का टीका लगाया। जब बहन जी ने विनम्रता से कहा कि उनके पास महाराज को देने के लिए कुछ नहीं है, तो प्रेमानंद महाराज ने तुरंत जवाब दिया कि 'इससे बड़ी कोई वस्तु हो सकती है क्या?' इस भेंट के दौरान, दोनों संतों के बीच भागवत चर्चा भी देर तक चली।
कौन हैं कमल बहन जी?
कमल बहन जी को आध्यात्मिक जगत में अत्यंत पूजनीय माना जाता है, क्योंकि वे राधा बाबा और भाई जी महाराज के सबसे निकटस्थ सत्संगियों में से एक थीं। वह विशेष रूप से पूज्य भाई जी (श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार), जो गीता प्रेस, गोरखपुर के संस्थापक और कल्याण पत्रिका के संपादक थे, की प्रमुख शिष्या और कृपापात्र थीं। कमल बहन जी को उनकी गहरी भक्ति, त्याग और राधा-कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम के लिए उच्च स्थान प्राप्त है, और उन्हें भाई जी एवं राधा बाबा की आध्यात्मिक विरासत की जीवित कड़ी माना जाता है।












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