Prayagraj Mahakumbh 2025: गंगा किनारे बनेगा 12 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट, 95 करोड़ खर्च करेगी योगी सरकार
यूपी की राजधानी लखनऊ में गोमती किनारे बने रिवर फ्रंट की तर्ज पर यूपी सरकार ने अब प्रयागराज में गंगा के किनारे रिवर फ्रंट बनाने की कवायद शुरू कर दी है।
Mahakumbh-2025 preparations: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रयागराज में 2025 में होने वाले महाकुंभ की तैयारियों में अभी से जुट गई है। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन को दिव्य और भव्य बनाने की कवायद के तहत ही यूपी सरकार अब लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर प्रयागराज में गंगा किनारे 12 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट बनवाएगी।
95 करोड़ की लागत से बनेगा रिवर फ्रंट
अधिकारियों की माने तो 95.20 करोड़ का प्रस्ताव सिंचाई विभाग द्वारा अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को भेजा गया है। महाकुंभ-2025 की तैयारियों के हिस्से के रूप में इस परियोजना को शुरू करने की योजना बनायी गई है।

प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद जल्द शुरू होगा काम
इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों की माने तो अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो जल्द ही प्रयागराज में गंगा के दोनों किनारों पर सात खंडों में रिवरफ्रंट जैसी सड़कें बनाई जाएंगी। अधिकारियों के मुताबिक, रसूलाबाद घाट से नागवासुकी मंदिर तक और सूरदास से छतनाग तक दोनों तरफ इन रिवरफ्रंट सड़कों के लिए बजट की मंजूरी और प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद ही इस संबंध में काम शुरू होगा।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता सिद्धार्थ कुमार सिंह ने योजनाओं की पुष्टि करते हुए कहा कि,
इस परियोजना से जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह महाकुंभ-2025 में आने वाले करोड़ों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण होगा। इससे उन्हें संगम के पवित्र संगम तक आसानी से पहुंचने में भी मदद मिलेगी।
श्रद्धालुओं को होगा काफी फायदा
अगर किसी को रसूलाबाद से संगम की ओर जाना है तो उसे शहर के अंदर आना होगा और तेलियरगंज, जवाहर लाल नेहरू रोड या जीटी जवाहर चौराहे से मेला क्षेत्र में प्रवेश करना होगा। रसूलाबाद घाट से संगम की दूरी लगभग 12 किमी है। लेकिन महाकुंभ-2025 के दौरान प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं को प्रस्तावित सड़क के जरिए रसूलाबाद से सीधे संगम तक गंगा तट तक पहुंचने का मौका मिल सकता है।
12 किलोमीटर की दूर घटकर पांच किलोमीटर हो जाएगी
इसके साथ 12 किमी की दूरी घटकर मात्र 5 किमी रह जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि दोनों प्रस्तावित सड़कें कुल सात खंडों में पूरी की जाएंगी। इसकी कुल लंबाई करीब 13.25 किमी होगी। कुल प्रस्तावित लागत 95.20 करोड़ रुपये रखी गयी है। उन्होंने बताया कि निर्माण के लिए किसानों से 7.30 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। इन सड़कों पर इंटरलॉकिंग, बोल्डर क्रेट का निर्माण और स्लोप पिचिंग सुनिश्चित करने का कार्य किया जाएगा।
मेले के समय तीर्थयात्रियों को नहीं जाना पड़ेगा शहर के भीतर
एक बार तैयार होने के बाद ये सड़कें तीर्थयात्रियों को शहर के अंदर आए बिना संगम तक पहुंचने में सक्षम बनाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि इससे स्नान पर्वों के दिन शहर के यातायात प्रवाह को प्रभावित किए बिना श्रद्धालुओं को संगम तक ले जाने और फिर शहर से बाहर ले जाने की व्यवस्था भी की जा सकेगी। इन सड़कों के किनारे बेंच और सेल्फी पॉइंट भी उपलब्ध कराए जाएंगे।












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