Arvind Singh Bisht : प्रतीक यादव को 'रहस्यमय' कहने वाले अरविंद सिंह बिष्ट कौन? क्यों दी मुखाग्नि?
Arvind Singh Bisht : समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के सौतेले भाई और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव अब पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं, उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें गुरुवार को मुखाग्नि दी, जो कि इस वक्त लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि सपा प्रमुख अपने पूरे परिवार संग बैकुंठ धाम पहुंचे थे लेकिन प्रतीक की चिता को आग अपर्णा के पिता ने ही दी। प्रतीक की दोनों बेटियां भी श्मशान घाट पर मौजूद थीं। दोनों ने भी पिता की चिता पर लकड़ी रखी।
मालूम हो कि अरविंद सिंह यूपी खासकरके लखनऊ का जाना-पहचाना नाम है। वो यूपी के प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकार और सूचना आयुक्त रह चुके हैं। उन्होंने 28 वर्षों तक 'टाइम्स ऑफ इंडिया' (लखनऊ) में काम किया है जहां वे राजनीतिक संपादक जैसे उच्च पद को संभाल चुके हैं।

ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने दी प्रतीक यादव को मुखाग्नि
वो मुलायम सिंह के केवल समधी ही नहीं थे बल्कि प्रतीक-अपर्णा की शादी के बाद उनका बर्ताव मुलायम संग दोस्ताना जैसा ही रहा और आज प्रतीक को अंतिम विदाई देकर उन्होंने ये साबित कर दिया कि प्रतीक उनके लिए दामाद नहीं बल्कि बेटे ही थे। हालांकि इससे पहले सोशल मीडिया पर लिखी अपनी पोस्ट में उन्होंने प्रतीक यादव को रहस्यमय कहा था।
'जीवन हो या मृत्यु प्रतीक यादव एक रहस्य ही बने रहे'
आज तक के मुताबिक उन्होंने लिखा था कि 'जैसे जीवन में, वैसे ही मृत्यु में भी प्रतीक यादव एक रहस्य ही बने रहे', वो शांत, सादगीपूर्ण और संवेदनशील इंसान थे, मैं उन्हें फिटनेस प्रेमी और बॉडीबिल्डर के तौर पर याद करता हूं,उन्होंने लखनऊ में आधुनिक जिम संस्कृति को नई पहचान दी। स्कूल के दिनों में हैवी वेट प्रतीक ने हाईस्कूल आते-आते फिटनेस के प्रति ऐसा जुनून दिखाया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।'

राजनीति के बजाय फिटनेस, अनुशासन और निजी जीवन में रहा झुकाव
'मुलायम सिंह और साधना गुप्ता के पुत्र होने के बावजूद, प्रतीक ने हमेशा अपनी अलग पहचान बनाई। उनका झुकाव सक्रिय राजनीति के बजाय फिटनेस, अनुशासन और निजी जीवन की ओर रहा। उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स में दाखिला लिया, जहां भी फिटनेस के प्रति उनका जुनून बरकरार रहा।'
'भारत लौटने के बाद, उन्होंने लखनऊ में एक आधुनिक जिम स्थापित किया, जिसमें टेक्नोजिम जैसी उन्नत मशीनें लगाई गईं। यह जिम जल्द ही शहर के युवाओं में लोकप्रिय हो गया और स्थानीय फिटनेस संस्कृति को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। वे स्वभाव से शांत थे और खुद को राजनीति से दूर रखकर रियल एस्टेट व्यवसाय में व्यस्त रखा।'

साधना गुप्ता के जन्मदिन समारोह में पहली बार मिले थे अपर्णा-प्रतीक
अरविंद सिंह बिष्ट ने अपर्णा यादव से प्रतीक की पहली मुलाकात को याद करते हुए लिखा कि 'मुझे याद है दोनों कि मुलाकात प्रतीक की मां साधना गुप्ता के जन्मदिन समारोह में क्लार्क्स अवध होटल में हुई थी, जहां से उनकी दोस्ती शुरू हुई, मैं ही तो छोड़कर आया था अपर्णा को वहां, अपर्णा के विदेश पढ़ने जाने पर भी उनके बीच संपर्क बना रहा। 2010 में परिवार वालों ने दोनों की सगाई का निर्णय लिया और फिर 2011 में इनकी शादी हो गई।'
कोरोना महामारी के बाद बीमार रहने लगे थे प्रतीक यादव
अपने नोट में उन्होंने प्रतीक के जीवन के कठिन दौर का भी जिक्र किया है, उन्होंने साफ तौर पर लिखा है कि 'कोरोना महामारी के दौरान न केवल उनकी शारीरिक सेहत प्रभावित हुई, बल्कि वे मानसिक रूप से भी परेशान रहने लगे थे, इसके बाद उन्हें माता-पिता के निधन जैसी दो बड़ी क्षतियों का सामना करना पड़ा, जिससे वे भीतर तक टूट गए थे, बार-बार अस्पताल भी जाना पड़ा, पर इन सभी चुनौतियों के बावजूद, प्रतीक का स्वभाव अंत तक शांत और विनम्र ही बना रहा।'

क्या ससुर दामाद को दे सकता है मुखाग्नि?
काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग समुदायों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। सामान्य तौर पर मुखाग्नि देने का पहला अधिकार बेटे, पिता या सबसे करीबी पुरुष रिश्तेदार को माना जाता है लेकिन यदि ऐसी स्थिति हो कि बेटा मौजूद न हो, या परिवार की सहमति हो, तो दामाद को भी मुखाग्नि दी जा सकती है। उसी तरह कुछ परिस्थितियों में ससुर भी अपने दामाद को मुखाग्नि दे सकते हैं।














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