Pahalgam Attack: 'अब पानी नहीं, बस सीधे...', पहलगाम घटना पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान
Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हिंदुओं पर हुए हमले ने पूरे देश में आक्रोश फैला दिया है। धर्म पूछकर निर्दोषों की हत्या करना न केवल अमानवीयता का प्रतीक है, बल्कि यह सीधे युद्ध की चेतावनी भी है। इस घटना से व्यथित जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकार से त्वरित और सख्त कदम उठाने की मांग की है।
शुक्रवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आगरा पहुंचे, जहां उन्होंने दयालबाग स्थित एक आवास पर पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब निंदा करने का समय बीत चुका है, सरकार को दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए ताकि आतंकियों और उनके आकाओं को करारा जवाब दिया जा सके।

उन्होंने कहा कि सिर्फ सिंधु जल संधि खत्म करने की बातें कर जनता को बहलाया नहीं जा सकता। अब समय आ गया है कि सरकार सीधा एक्शन ले और देशवासियों के धैर्य की परीक्षा न ले।
आतंकवादियों को पहचानकर तुरंत कार्रवाई का आह्वान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सरकार को सबसे पहले हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान करनी चाहिए। इसके बाद उन्हें कठोरतम सजा दी जानी चाहिए ताकि आगे से कोई ऐसी घटना को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके।
उन्होंने कहा कि सीमापार बैठे आतंकी आकाओं को भी सबक सिखाने के लिए युद्ध जैसी कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस समय पूरी तरह से सरकार के साथ है और अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।
पानी बंद करने की धमकी से नहीं रुकेगा आतंकवाद
स्वामी जी ने सरकार द्वारा बार-बार सिंधु जल संधि को समाप्त करने की धमकी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पानी रोकने की धमकियों से आतंकवाद खत्म नहीं होने वाला। अगर सरकार को वाकई कदम उठाना है तो अब शब्दों से नहीं, सीधी कार्रवाई से जवाब देना होगा।
उन्होंने कहा कि आतंकवादी केवल भाषा समझते हैं, और वह भाषा है सीधा और कठोर उत्तर। उन्होंने कहा कि जनता अब और इंतजार नहीं करना चाहती, उसे कार्रवाई के ठोस परिणाम चाहिए।
गोमाता संरक्षण के लिए भी चल रही है विशेष मुहिम
पत्रकार वार्ता के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गोमाता के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि पूरे देश में 33 करोड़ मतदाताओं को जोड़कर एक बड़ा जन आंदोलन चलाया जा रहा है, जिसका मकसद हर विधानसभा क्षेत्र से एक-एक 'गो सांसद' का चयन करना है।
उन्होंने कहा कि जब संसद में गोमाता के सच्चे सेवक पहुंचेंगे, तभी वास्तविक गोसेवा का सपना साकार होगा। साथ ही, उन्होंने देसी गायों को 'रामा गाय' नाम से संरक्षित करने का आह्वान भी किया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आगरा में अल्प प्रवास के बाद शुक्रवार को ही सड़क मार्ग से हरिद्वार के लिए प्रस्थान कर गए। वहां वे आगामी दिनों में बद्रीनाथ और केदारनाथ धामों के पट खोलने की धार्मिक प्रक्रिया में भाग लेंगे।












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