यूपी में योगी सरकार की 'ठोक दो' नीति पर ओवैसी और मोहसिन रजा में ठन गई, जानिए कौन पड़ा भारी
लखनऊ: बिहार विधानसभा और गुजरात निगम चुनावों में थोड़ी कामयाबी मिलने के बाद हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी का हौसला सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। पश्चिम बंगाल में तो लगता है कि उनकी दाल फिलहाल नहीं गलने वाली है, लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए वह अभी से सियासी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। उन्होंने यहां पर ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी समेत कई छोटे-छोटे दलों के साथ 'भागीदारी संकल्प मोर्चा' गठबंधन बनाया है और अभी से प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ मुस्लिम वोटों को गोलबंद करने में जुट गए हैं। रविवार को उन्होंने बलरामपुर में राजभर के साथ एक जनसभा की, जिसमें उन्होंने योगी सरकार की कथित एनकाउंटर नीति पर सवाल उठाते हुए अजीब दलील दे डाली। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मुसलमानों की तादाद की तुलना में उनका एनकाउंटर दो गुना ज्यादा हो रहा है। उनको जवाब देने के लिए यूपी सरकार ने मंत्री मोहसिन रजा को उतारा है।

'आबादी 18 या 19% फिर एनकाउंटर में मरने वाले 37% मुसलमान क्यों'
बलरामपुर की रैली में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाल ही में सेक्युलरिज्म पर दिए बयान पर पलटवार करते हुए उन्हें संविधान के आर्टिकल 14 और 19 पढ़ने की नसीहत दी है। सीएम ने कहा था कि भारत की समृद्ध विरासत को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने में यही सबसे बड़ा खतरा है। ओवैसी ने अब उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा है- "जब से बीजेपी की सरकार बनी 2017 से 2020 के दरमियान में 6,475 एनकाउंटर हुए, जिसमें से मरने वालों की तादाद 37 फीसदी मुसलमानों की थी; और उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी 18 या 19 पर्सेंट के दरमियान में है। आखिर ये जुल्म क्यों ? यह जुल्म क्यों हो रहा है कि एक देश के बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री कहता है कि ठोक दो...क्या ये हुकूमत संविधान के तहत काम कर रही है? क्या उत्तर प्रदेश में रूल ऑफ लॉ है? या रूल ऑफ गन है?" उनके इस आरोप पर यूपी सरकार के मंत्री मोहसिन रजा ने भी जोरदार जवाब दिया है।
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'ओवैसी ऐसे भाषण देते हैं कि वो अपराधी बन जाते हैं'
मोहसिन रजा ने दावा किया है कि ओवैसी के पूर्वज देश के विभाजन में शामिल रहे हैं और खुद उनकी भाषा से भी एक और विभाजन की बू आती है। यूपी सरकार के मंत्री ने हैदराबाद के सांसद पर आरोप लगाया है कि "(ओवैसी)जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल देश में करते हैं उससे साफ जाहिर है कि अभी इनके मन में एक और विभाजन की तस्वीर उभर करके सामने आती है.....अगर वास्तव में आपके अंदर इस तरह के भाव हैं कि यह नहीं होना चाहिए कि अपराधी नहीं बनना चाहिए किसी को तो आप जाकर जिनका ठेका लिया है उनको समझाइए.....उनको कहिए कि इतनी पर्सेंटेज क्यों आ रही है आपकी? आप बैरिस्टर बनिए हमारी तरह....अपनी तरह बैरिस्टर बनाइए....भाषण तो आप ऐसे देते हैं कि वो अपराधी बन जाते हैं....."

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी
बता दें कि ओवैसी ने यूपी में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए राजभर के अलावा बीएसपी सरकार में पूर्व मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा और बीजेपी की सहयोगी अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल की पार्टी समेत करीब एक दर्जन छोटी पार्टियों का 'भागीदारी संकल्प मोर्चा' बनाया है। यह मोर्चा 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के अलावा समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस के खिलाफ भी लोहा लेने की बात कर रही है। ओवैसी को यकीन है कि इतने दलों को साथ लेकर वह प्रदेश के मतदाताओं के करीब पांचवें हिस्से के बराबर मुस्लिम वोटरों को अपने पीछे गोलबंद कर सकते हैं। यही वजह है कि यहां बीजेपी के बाद उनका सबसे ज्यादा निशाना सपा के खिलाफ है, जिसे कि राज्य में मुस्लिम वोटों का सबसे बड़ा दावेदार माना जाती है। ओवैसी ने पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा है, 'वह सेक्युलरिज्म को नहीं बचा सके, बल्कि सिर्फ अपने परिवारों और रिश्तेदारों को बचाते रहे।' उन्होंने अखिलेश यादव पर भी बिना नाम लिए हमला किया कि बीजेपी के सत्ता में आने से उन्हें निजी तौर पर कोई नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि मुसलमानों को भुगतना पड़ा है, जिनकी आवाज दबा दी गई है।(आखिरी तस्वीर-ओवैसी के ट्विटर हैंडल से)












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