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जेवर एयरपोर्ट का नाम DXN ही क्यों पड़ा? चौंका देगी 3 अक्षरों के पीछे की ये खास वजह!

Noida International Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) अब उड़ानों के लिए पूरी तरह तैयार है। साल 2001 में देखा गया यह सपना लगभग 25 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 2026 में हकीकत बन चुका है। यह एयरपोर्ट न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि दिल्ली-एनसीआर के करोड़ों निवासियों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने इस एयरपोर्ट को 'DXN' कोड आवंटित किया है। दुनिया भर में एयरपोर्ट्स की विशिष्ट पहचान के लिए ये तीन अक्षरों के कोड दिए जाते हैं।

noida jewar international airport
  • क्या है DXN का अर्थ: एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमान के अनुसार, 'DXN' कोड इसकी दिल्ली (D), पश्चिमी उत्तर प्रदेश (X) और नोएडा (N) से निकटता और कनेक्टिविटी को दर्शाता है।
  • IATA की भूमिका: यह संस्था दुनिया की लगभग 300 एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करती है, जो कुल हवाई ट्रैफिक का 83% हिस्सा है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कब शुरू होंगी उड़ानें?

शनिवार, 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के साथ इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का औपचारिक उद्घाटन किया।

  • कमर्शियल ऑपरेशंस: हालांकि भौतिक रूप से एयरपोर्ट तैयार है, लेकिन यात्रियों के लिए उड़ानें अप्रैल के मध्य या मई 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।
  • कारण: एयरलाइंस के साथ तालमेल, टैरिफ क्लीयरेंस और शेड्यूलिंग जैसी अंतिम प्रक्रियाओं में लगभग 45 से 60 दिनों का समय लगता है।

क्या है नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ताकत?

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में से एक है, जिसे पीपीपी (PPP) मॉडल पर विकसित किया गया है।

  • निवेश: पहले चरण में लगभग 11,200 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
  • क्षमता: शुरुआती दौर में यह हर साल 1.2 करोड़ (12 MPPA) यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा, जिसे 2040 तक बढ़ाकर 7 करोड़ (70 MPPA) करने का लक्ष्य है।
  • तकनीक: यहां 3,900 मीटर लंबा रनवे है, जहां बड़े विमान भी आसानी से लैंड कर सकेंगे। साथ ही, आधुनिक नेविगेशन और 'इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम' (ILS) की मदद से खराब मौसम में भी दिन-रात उड़ानें संचालित हो सकेंगी।

कनेक्टिविटी का नया केंद्र

1,300 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को कम करेगा। शुरुआत में यहां से सीमित घरेलू उड़ानें शुरू होंगी, जबकि साल 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय सेवाओं के भी शुरू होने की संभावना है।

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