नीतीश कुमार यूपी की फूलपुर सीट से लड़ें 2024 का चुनाव, जेडीयू क्यों कर रही ये मांग? जानिए
बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने मांग की है कि वे 2024 में यूपी की फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लडें। पार्टी राज्य की 6 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटी हुई है।

जेडीयू की ओर से यह मांग की गई है कि बिहार के मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार उत्तर प्रदेश की फूलपुर लोकसभा सीट से 2024 का चुनाव लड़ें। पार्टी के वरिष्ठ नेता धनंजय सिंह ने लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी एकता की वकालत करते हुए कहा है कि यूपी के पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि बिहार के सीएम फूलपुर से बाजी आजमाएं।
सपा,बसपा,कांग्रेस को एकजुट करने की कोशिश-जदयू नेता
यूपी के जदयू नेता धनंजय सिंह ने यह भी कहा है कि उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रही है, ताकि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी को सत्ता में लौटने से रोका जा सके।
फूलपुर से चुनाव लड़ें नीतीश कुमार- धनंजय सिंह
न्यूज एजेंसी पीटीआई से सिंह ने कहा, 'पार्टी यह भी चाहती है कि नीतीश कुमार जी राज्य की फूलपुर सीट (उत्तर प्रदेश) से चुनाव लड़ें।' विपक्षी एकता की कोशिशों को लेकर वे बोले, 'हमें लगता है कि बीजेपी को सत्ता में लौटने से रोकना जरूरी है। अगर विपक्ष एकजुट होता है तो यह पूरी तरह से संभव है और चुनाव एनडीए बनाम यूपीए हो जाएगा।'
बीएसपी को भी मना लेने की उम्मीद में जेडीयू
जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव के मुताबिक, 'हमारे नेता राज्य में सपा, बसपा और कांग्रेस को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। आरएलडी पहले से ही सपा के साथ है।' जब उनसे पूछा गया कि बीएसपी इस एकता के लिए तैयार होगी तो उन्होंने कहा कि 'हम आशांवित हैं।' गौरतलब है कि नीतीश विपक्षी एकता की कोशिशों के तहत हाल ही में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मुलाकात भी कर चुके हैं।
फूलपुर सीट के माध्यम से खास संदेश देना चाहती है जदयू
दरअसल, जदयू की ओर से नीतीश को फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने की मांग के पीछे बड़ी वजह है। एक तो इस सीट का प्रतिनिधित्व जवाहर लाल नेहरू और वीपी सिंह भी कर चुके हैं। नीतीश अगर यहां से चुनाव लड़ते हैं तो विपक्षी एकता के सबसे सक्रिय अगुवा के तौर पर उसका खास राजनीतिक संदेश दिया जा सकता है। हालांकि, खुद नीतीश अब तक प्रधानमंत्री बनने की महात्वाकांक्षा को खारिज करते रहे हैं।
जेडीयू क्यों कर रही ये मांग?
दूसरी तरफ फूलपुर सीट से रिकॉर्ड 8 बार पटेल (कुर्मी) जाति के उम्मीदवारों को जीत मिल चुकी है। नीतीश कुमार भी कुर्मी हैं और बिहार की जातीय राजनीति में उनका यही सबसे मजबूत आधार रहा है। फूलपुर से बीजेपी की वर्तमान सांसद केशरी देवी पटेल भी कुर्मी हैं। इसलिए जेडीयू के नेताओं को लगता है कि नीतीश के लिए यह सुरक्षित सीट हो सकती है।
कई विपक्षी नेताओं से मिल चुके हैं नीतीश
यूपी से देश में लोकसभा की सबसे ज्यादा यानि 80 सीटें हैं। भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम में जुटे नीतीश कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मौजूदा समय में पार्टी के सबसे प्रभावी नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं। उनका ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल से भी मिलना हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि नीतीश को लगता है कि कांग्रेस मायावती को विपक्षी खेमे में लाने में मदद कर सकती है।
यूपी में 50 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा
2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा अपनी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के साथ मिलकर 64 सीटें जीती थी। जबकि, बसपा को 10, सपा को 5 और कांग्रेस को 1 सीट से संतोष करना पड़ा था। लेकिन, 2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर जदयू नेता को लगता है कि प्रदेश में विपक्ष आधी से ज्यादा सीटें जीत सकता है।
धनंजय सिंह के मुताबिक, 'अगर हम एक होकर चुनाव लड़े तो उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों में 50 से अधिक सीटें जीत सकते हैं। नीतीश जी यही चाहते हैं कि बीजेपी के खिलाफ पूरा यूपीए एक होकर चुनाव लड़े।'
यूपी में इन 6 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में ही जेडीयू
जदयू नेता ने कहा है कि, 'उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में लोकसभा की कुल 134 सीटें हैं। हमारी कोशिश 60-70 फीसदी सीटें जीतने की है। उत्तर प्रदेश में भी पार्टी का जमीनी काम चल रहा है और राज्य में हमारी पार्टी 6 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।' उनके मुताबिक ये सीटें हैं, जौनपुर, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बस्ती और फूलपुर।
'तो बीजेपी 200 सीटों से ज्यादा नहीं जीत पाएगी'
धनंजय सिंह 2009 में जौनपुर से बसपा के टिकट पर चुने गए थे। अभी वहां से बीएसपी के श्याम सिंह यादव सांसद हैं। उनका दावा है कि 'पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में बीजेपी कहीं नहीं है। अगर हम तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार में अपनी रणनीति में कामयाब हो जाते हैं तो बीजेपी 200 के आंकड़े को पार नहीं कर पाएगी।'
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