मेरठ: 'वंदेमातरम' पर जारी है खींचतान, नगर निगम में राष्ट्रगीत ही बन गया है मुद्दा
वंदे मातरम के विरोधी तीन कार्यकारिणी सदस्य व पार्षद काफी प्रतीक्षा के बाद भी सदन नहीं पहुंचे। जिसके बाद पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगीत गाया गया तो समाप्ति के तुरंत बाद ही तीनों सदस्य सदन में घुस आए।
मेरठ। मेयर का राष्ट्रगीत वंदेमातरम के अपमान को लेकर विरोधियों को दी गई चेतावनी का असर सोमवार को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में देखने को मिला। राष्ट्रगीत का विरोध करने वाले तीनों कार्यकारिणी सदस्य व पार्षद राष्ट्रगीत के समाप्त होने के बाद सदन में पहुंचे। हालांकि उन्होंने इसे किसी विवाद से बचने की वजह बताया है। वहीं मेयर ने तीखे तेवर दिखाते हुए भविष्य में कभी भी सदन या सड़क पर राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। वहीं सपा पार्षदों के विरोध के चलते बोर्ड उपाध्यक्ष का चुनाव भी कराया जाना तय हुआ, जिसकी प्रक्रिया जारी है।

क्या है मामला
दरअसल, पिछले दिनों टाउन हॉल में आयोजित नगर निगम की बोर्ड बैठक में कुछ मुस्लिम पार्षदों ने हमेशा की तरह वंदेमातरम शुरू होते ही सदन से वॉक आउट कर दिया। जिस पर हंगामा करते हुए भाजपा पार्षदों ने राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। मेयर हरिकांत अहलुवालिया ने भी वंदेमातरम के दौरान विरोध करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। जिसके बाद ये मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर गूंजा और मीडिया में हाइलाइट हुआ। मेयर ने इस मामले में विधिक राय लेने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही थी। सोमवार को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक प्रस्तावित थी, रविवार को मेयर हरिकांत अहलुवालिया ने इस बार वंदे मातरम का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। जिसके बाद सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक पर टिकी थीं।

मेयर ने आधा घंटा किया विरोधी पार्षदों का इंतजार
बैठक का समय सुबह 11 बजे से निर्धारित था। पूर्व निर्धारित समय के अनुसार नगर आयुक्त देवेन्द्र सिंह कुशवाहा और अन्य अधिकारी समय से टाउन हॉल पहुंच गए। विक्टोरिया पार्क कांड मृतकों के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने के चलते महापौर हरिकांत अहलुवालिया आधे घंटा देरी से बैठक में पहुंचे। इसके बावजूद उन्होंने लगभग 45 मिनट सभी पार्षदों के आने की प्रतीक्षा की। लेकिन वंदे मातरम के विरोधी तीन कार्यकारिणी सदस्य व पार्षद काफी प्रतीक्षा के बाद भी नहीं पहुंचे, जिसके बाद वंदेमातरम का गान हुआ, जिसमें सभी मौजूद पार्षद व अधिकारियों ने खड़े होकर राष्ट्रगीत का गान किया। वंदेमातरम की समाप्ति होते ही पार्षद शाहिद अब्बासी, आरिफ अंसारी और आदिल सदन में पहुंच गए। जिसके बाद विक्टोरिया पार्क अग्निकांड में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया और बैठक की शुरूआत हुई।

सपा पार्षद ने की उपाध्यक्ष पद पर चुनाव की मांग
कार्यकारिणी की बैठक में बोर्ड के उपाध्यक्ष का चुनाव होना था, जिस पर पहले से ही पार्षद रेनू गुप्ता के नाम पर सभी लोगों ने सहमती बना ली थी। जैसे ही इस संबध में घोषणा की गई तो सपा पार्षद शाहिद अब्बासी ने उपाध्यक्ष पद पर चुनाव की मांग करते हुए हंगामा कर दिया। जिसके बाद नगर आयुक्त देवेन्द्र सिंह कुशवाहा ने उनकी मांग को जायज बताते हुए दिनेश यादव को चुनाव अधिकारी नियुक्त करते हुए चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी।

'सड़क या सदन कहीं नहीं सहेंगे राष्ट्रगीत का अपमान'
महापौर हरिकांत अहलुवालिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने सदन में राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। जिसका सीधा असर कार्यकारिणी की बैठक में देखने को मिला और राष्ट्रगीत के विरोधी विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। उन्होंने साफ कहा कि भारतीय संविधान में राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समान ही सम्मान का दर्जा दिया गया है, चाहे सदन हो या सड़क राष्ट्रगीत का अपमान किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

'हम नहीं चाहते किसी विवाद में पड़ना'
वहीं सपा पार्षद शाहिद अब्बासी ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि हम किसी विवाद में पड़ना नहीं चाहते। इसलिए राष्ट्रगीत के समय सदन में मौजूद ही नहीं थे। उनका कहना है की राष्ट्रगीत का गान करने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता, राष्ट्रगान के समय वो सभी लोग मौजूद रहते हैं और राष्ट्रगान गाते भी हैं क्योंकि राष्ट्रगान का सम्मान करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है।












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