सपा का राष्ट्रीय अधिवेशन: 30 सालों से मुलायम परिवार के पास अध्यक्ष की कुर्सी, तीसरी बार चुने जाएंगे अखिलेश
लखनऊ, 28 सितंबर: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार से सपा का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू हो रहा है। इस सम्मेलन में एक ओर जहां 25 हजार नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे वहीं दूसरी ओर 2024 में होने वाले आम चुनावों के लिहाज से सपा के चीफ अखिलेश यादव के लिए ये अधिवेशन काफी अहम साबित होगा। अखिलेश यादव के लिए सबसे ज्यादा चुनौती यूपी में ही है क्योंकि 80 सांसद भेजने वाले यूपी में इस समय बीजेपी हावी हो चुकी है। बीजेपी को कड़ी चुनौती पेश करने के लिए अखिलेश को काफी मशक्कत करनी होगी और सधी हुई रणनीति के तहत चुनाव में उतरना होगा। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश जब तीसरी बार अध्यक्ष बनेंगे तो तब उनके पिता मुलायम सिंह और आजम खान सम्मेलन में मौजूद रहेंगे या नहीं।

1992 से सपा के अध्यक्ष की कुर्सी मुलायम परिवार के पास
दरअसल अक्टूबर 1992 में गठित सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद हमेशा यादव परिवार के पास रहा है। मुलायम सिंह यादव 1992 से 2017 तक और इसके बाद से अखिलेश यादव इस पद पर काबिज हैं। इस बीच, चुनावी रूप से प्रभावशाली ओबीसी वोटों को मजबूत करने के लिए सपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल के अपने पद पर बने रहने की संभावना है। लखनऊ में 1 जनवरी, 2017 को पहली बार आपातकालीन राष्ट्रीय सम्मेलन में अखिलेश को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद 5 अक्टूबर, 2017 को आगरा में अपने निर्धारित राष्ट्रीय अधिवेशन में सपा ने अखिलेश को फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना था।

नए राजनीतिक समीकरणों पर अखिलेश की नजर
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ दिनों पहले दिल्ली में सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर नीतीश और अखिलेश के पोस्टर भी लगाए गए थे। इससे ये संकेत गया था कि नीतीश कुमार और अखिलेश यादव बीजेपी को रोकने के लिए एक साथ आ सकते हैं। इसके कुछ दिन बाद ही नीतीश के यूपी से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी सामने आईं थीं लेकिन नीतीश ने बाद में इनको खारिज कर दिया था। इन सारे समीकरणों पर गौर करते हुए अखिलेश को आगे बढ़ना होगा। राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान यह देखना रोचक होगा कि सपा के संरक्षक मुलायम सिंह और सपा के कद्दावर नेता आजम खान यहां दिखाई देते हैं या नहीं।

कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश
अखिलेश ने यूपी विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान अपने 'सड़क से विधानसभा' विरोध प्रदर्शनों के साथ पार्टी के गिरते मनोबल को प्रभावी ढंग से पुनर्जीवित करने में कामयाबी हासिल की। यूपी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पद देखा गा। अखिलेश यादव गुरुवार को लखनऊ में अपने राष्ट्रीय सम्मेलन में लगातार तीसरी बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में फिर से चुने जाने के लिए तैयार हैं। इस अधिवेशन के बाद सपा पूरी तरह से चुनावी तैयारियों में जुग जाएगी।

हार का चौका लगा चुकी है समाजवादी पार्टी
दरअसल 2014 के लोकसभा, 2017 के विधानसभा, 2019 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की लगातार चुनावी विफलताओं के बाद सपा का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। पिछले कई चुनावों में मिल रही हार से सबक लेते हुए, पार्टी नेतृत्व नवंबर-दिसंबर में आगामी शहरी निकाय चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए संगठन को फिर से सक्रिय करने की दिशा में काम कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि सपा प्रमुख ने यूपी विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पार्टी के गिरते मनोबल को बढ़ाने का काम किया।

मुलायम और आजम की मौजूदगी पर रहेगी सबकी नजर
इन सम्मेलनों में राष्ट्रीय और राज्य के नेताओं सहित पार्टी के लगभग 25,000 प्रतिनिधि भाग लेंगे। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच पारिवारिक विवाद के बीच पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की जगह 1 जनवरी, 2017 को पहली बार लखनऊ में आपातकालीन राष्ट्रीय सम्मेलन में अखिलेश को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। इस बीच, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष पटेल ने कहा कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनकी तबीयत खराब होने के कारण उनके शामिल होने की संभावना कम है। यही हाल संस्थापक सदस्य और पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का भी है। मुलायम और आजम दोनों स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर हफ्तों से दिल्ली में हैं। ये देखना काफी दिलचस्प होगा कि ये दोनों नेता दिखाई देते हैं या नहीं।












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