तीन तलाक के खिलाफ मुजफ्फरनगर का गांव एकजुट, तलाक देने वाले का बहिष्कार हो

गांववाले बाले, इस प्रवृति को रोकना बहुत जरूरी है।

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)। भारत में मुस्लिमों के एक बड़े हिस्से के बीच प्रचलित तीन तलाक पर बहस और कानूनी लड़ाई के बीच मुजफ्फरनगर के एक गांव में लोग तलाक के इस तरीके के खिलाफ खड़े हो गए हैं। यहां तक कि वो धर्मगुरुओं से भी इस पर सवाल-जवाब करने को तैयार दिख रहे हैं।

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मुजफ्फरनगर की चरथावल विधानसभा क्षेत्र का गांव न्यामू फोन पर तीन तलाक के खिलाफ एकजुट हो गया है। दरअसल गांव की एख लड़की को जिस तरह से उसके शौहर ने फोन पर तलाक दिया, उसने गांव के बुजुर्ग और बूढ़े सबको सोचने पर मजबूर कर दिया।

इस्लामी शिक्षा के बड़े मरकज देवबंद से तकरीबन 25 किमी की दूरी पर बसे न्यामू गांव की ज्यादातर आबादी मुसलमानों की है। गांव की ही आसमा की शादी पड़ोस के गांव के शाहनवाज से दो साल पहले हुई थी।

आसमा को कुछ महीने पहले उसका शौहर उसके मायके न्यामू छोड़कर सऊदी अरब चला गया। आसमा अपने मायके में रह रही है। उसी के साथ उसकी एक साल की बेटी भी है।

सास से फोन पर कहा, मैंने तेरी बेटी आजाद कर दी

पिछले हफ्ते आसमा के शौहर ने अरब से फोन किया और आसमा की अम्मी से कहा कि तेरी बेटी से मेरा निकाह नहीं मैं उसे तलाक दे रहा हूं, मैंने तेरी बेटी आजाद कर दी।

आसमा के कानों में तलाक लफ्ज पड़ा तो उसके होश उड़ गए। आसमा के पिता और खानदान के लोग ही नहीं धीरे-धीरे पूरा गांव के लोग प्रधान के यहां जमा हो गए।

सबने एक सुर में यही बात कही कि आज आसमा है तो कल किसी और की बेटी भी हो सकती है। ये आखिर कब तक चलेगा। इस तरह से तलाक देने वाले लोगों का समाज से बाहिष्कार किया जाए।

मुफ्ती बोले, फोन पर तलाक हो गया

गांव के लोग फोन पर दिया तलाक क्या सही है, के सवाल को लेकर देवबंद पहुंचें। अपने फतवों के लिए मशहूर देवबंद ने गांव को लोगों को एक पर्चा थमा दिया जिसमें लिखा गया कि भले ही लड़की मां को कहा लेकिन तलाक हो गया।

देवबंद की बात का गांव वाले विरोध नहीं कर रहे और ना ही वो अब लड़की को दोबारा उसके शौहर के घर भेजना चाहते हैं लेकिन हर कोई यही कह रहा है कि कम से कम उसको कोई सजा तो मिले।

गांव के लोगों का कहना है कि हमारे समाज में बुराईया लगातार बढ़ रही हैं। गांववासी कहते हैं कि शादी हमारे यहां शादी लड़की और लड़के की नहीं बल्कि दो परिवार, गांव और पूरे समाज के बीच होती है।

ग्रामीण कहते हैं कि तलाक दे लड़का और मुसीबत उठाए लड़की ये कहां का इंसाफ है। वो कहते हैं कि किसी की बददिमागी और तीन बार कहा गया तलाक का अल्फाज किसी दूसरे परिवार को समाजी, जहनी और माली तौर पर बुरी तरह से तोड़ देता है।

मेरी कोख से बेटी पैदा होने की सजा है ये: आसमा

आसमा का कहना है कि शादी के एक साल तक तो सब ठीक था लेकिन जब शादी के एक साल बाद उसको लड़की पैदा हुई तो जैसे मैं पूरे घर की दुश्मन हो गई। वो लड़का चाहते थे और मुझे लड़की हुई।

आसमा कहती हैं कि एक साल तक उनके साथ कभी मारपीट को कभी तानाकशी होती रही लेकिन घर ना टूटे इसलिए वो सब सहती रहीं। उसको कई बार तो डंडो तक से मारा गया ये सब उसकी कोख से लड़की पैदा होने की वजह से हो रहा था।

आसमा कहती हैं कि वो अपने पिता के घर ही अपना वक्त गुजार लेगी। उसका शौहर उसे लेने आए वो तब भी उस घर नहीं जाना चाहेगी।

आंखों में आंसू भरकर आसमा कहती हैं कि जो उनके साथ हुआ अल्लाह किसी के साथ ना करे। इतना कहने के बाद 'तीन तलाक' की शिकार आसमां के मुंह से अल्फाज नहीं निकलते बस आंखों से आंसू बहने लगते हैं।

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