Muzaffarnagar: 750 बीघा जमीन चबा गए मुजफ्फरनगर के SDM साहब! जांच हुई तो लखनऊ से मिला डोज!
Muzaffarnagar: मुजफ्फरनगर में भू-माफिया से मिलीभगत का मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कदम उठाया है। जिले की जानसठ तहसील के एसडीएम जयेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
मामला क्या है?
पूरा विवाद जानसठ तहसील के इसहाकवाला गांव से जुड़ा है। यहां 1962 में डेरावाल कोऑपरेटिव फॉर्मिंग सोसायटी बनाई गई थी। इस सोसायटी के सदस्य हरबंस ने 1972 में अपनी 23 एकड़ जमीन लेकर अलग हो गए थे। हरबंस के पोते अमृतपाल और सोसायटी के सचिव जीवन दास के बेटे गुलशन के बीच जमीन को लेकर कई सालों से विवाद चल रहा था।
2018 में तहसील के पटवारी, तहसीलदार और तत्कालीन एसडीएम ने हाईकोर्ट को बताया था कि हरबंस का सोसायटी की जमीन में कोई हिस्सा नहीं है। मामला कोर्ट में लंबित था।

एसडीएम पर आरोप
मार्च 2025 में जयेंद्र सिंह को जानसठ तहसील का एसडीएम बनाया गया। उन्होंने इस केस की सुनवाई शुरू की और 19 जुलाई 2025 को सोसायटी की 600 बीघा से ज्यादा जमीन और लगभग 150 बीघा सरकारी जमीन अमृतपाल के नाम कर दी। आरोप है कि इस जमीन को अमृतपाल के नाम करने के लिए एसडीएम ने ₹3 करोड़ रिश्वत ली। जैसे ही सोसायटी के सदस्य गुलशन को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने 29 जुलाई को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा से शिकायत कर दी।
जांच और कार्रवाई
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने तुरंत तीन एडीएम की जांच समिति गठित कर जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई। शिकायत मिलते ही एसडीएम जयेंद्र सिंह ने अपना आदेश वापस ले लिया।
जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई और लखनऊ से आदेश मिलने के बाद जयेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
भ्रष्टाचारियों पर योगी का हंटर
सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं से मिलीभगत करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है और अधिकारियों के बीच सतर्कता बढ़ गई है।
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