पैंगबर पर नूपुर शर्मा के विवादित बयान पर मुस्लिम धर्मगुरु बोले-कानून के दायरे में विरोध करें
पैंगबर पर नूपुर शर्मा के विवादित बयान पर मुस्लिम धर्मगुरु बोले-कानून के दायरे में विरोध करें
बरेली, 11 जून: भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा के द्वारा दो हफ्ते पहले पैंगबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी को लेकर जमकर बवाल मचा हुआ है। बीते शुक्रवार को कई जगहों पर मारपीट और बवाल भी हुआ। वहीं अब निलंबित भाजपा नेता नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल द्वारा पैगंबर मुहम्मद पर विवादास्पद टिप्पणियों पर नाराजगी के बीच एक मुस्लिम धर्मगुरु ने शनिवार को लोगों से कानून के दायरे में विरोध करने की अपील की।

बरेली स्थित अखिल भारतीय तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने कहा
"पैगंबर मुहम्मद ने कहा कि एक अच्छा मुसलमान वह है जो अपने हाथों (कर्मों) या जीभ (शब्दों) से किसी को दर्द नहीं देता है। ... इसलिए मैं सभी से कानून के दायरे में विरोध करने की अपील करता हूं।"
रिजवी की अपील रांची और हावड़ा सहित कई शहरों में पैगंबर पर विवादास्पद टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के एक दिन बाद आई है।
#WATCH | Bareilly: National Gen-Secy, All India Tanzeem Ulema-e-Islam, Maulana Shahabuddin Rizvi says, "Prophet Muhammad said that a good Muslim is one who gives no pain to anyone with his hands (deeds) or tongue (words)...So I appeal to everyone to protest within purview of law" pic.twitter.com/F0oZo0oNr3
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 11, 2022
कल, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने मुस्लिम विद्वानों को सलाह दी कि वे उन टीवी चैनलों की बहस में हिस्सा ना लें। जिनका उद्देश्य केवल 'इस्लाम का उपहास करना और मुसलमानों का मजाक बनाना है।रिजवी की अपील रांची और हावड़ा सहित कई शहरों में पैगंबर पर विवादास्पद टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के एक दिन बाद आई है।
शुक्रवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने मुस्लिम विद्वानों को सलाह दी कि वे उन टीवी चैनलों की बहस में भाग न लें जिनका उद्देश्य केवल 'इस्लाम का उपहास करना और मुसलमानों का मजाक बनाना है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने बयान में कहा कार्यक्रमों में भाग लेकर, वे इस्लाम और मुसलमानों की कोई सेवा नहीं करते हैं, लेकिन परोक्ष रूप से इस्लाम और मुसलमानों का अपमान और उपहास करते हैं, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य रचनात्मक के माध्यम से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना नहीं है। चर्चा। बल्कि यह इस्लाम और मुसलमानों का उपहास और बदनामी करना है।
बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि ये चैनल अपनी तटस्थता साबित करने के लिए एक मुस्लिम चेहरे को भी बहस में शामिल करना चाहते हैं। हमारे उलेमा और बुद्धिजीवी अज्ञानतावश इस साजिश के शिकार हो जाते हैं, अगर हम इन कार्यक्रमों और चैनलों का बहिष्कार करते हैं, तो इससे न केवल उनकी टीआरपी कम होगी, बल्कि वे अपने उद्देश्य में बुरी तरह विफल भी होंगे।












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