UP में समाजवादी पार्टी की करारी हार के बाद क्यों एक्टिव हुए मुलायम सिंह यादव, जानिए

लखनऊ, 13 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव इस समय चौतरफा चुनौतियों से घिरे हुए हैं। एक तरफ जहां अखिलेश यादव चुनाव दर चुनाव पार्टी को मिल रही हार से बेचैन हैं वहीं दूसरी ओर चाचा शिवपाल यादव और अंकल आजम खान का मुद्दा उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। चुनौतियों के भंवर में फंसे अखिलेश की सियासत भी हिचकोले खा रही है। उन्हें सूझ नहीं रहा कि ऐसे समय में क्या किया जाए। इन परेशानियों के बीच ही अब उनके पिता और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव एक बार फिर सक्रिय हुए हैं। उनकी सक्रियता भी खास मायने रखती है क्योंकि आजम और शिवपाल ने यदि एक साथ सपा को अलविदा कहा तो फिर अखिलेश के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी।

पहले यूपी के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार

पहले यूपी के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार

उत्तर प्रदेश में हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में सपा को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ी थी। अखिलेश ने रणनीति के तहत पश्चिम में रालोद के मुखिया जयंत चौधरी और पूर्वांचल में ओम प्रकाश राजभर से गठबंधन किया था। इन गठबंधनों के बाद ऐसा लगने लगा था कि अबकी बार सपा यूपी में सरकार में आने में कामयाब हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सपा की सीटें तो बढ़ीं लेकिन वह उस आंकड़े को नहीं छू पायी जहां से वह सरकार बना सके। सरकार ने बनने की वजह से चुनाव के बाद सहयोगियों को संभालना भी अब अखिलेश के लिए काफी चुनौतिपूर्ण साबित होगा। इन परेशानियों को देखते हुए अब मुलायम खुद सक्रिय हुए हैं। सूत्रों की माने तो मुलायम अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर फीडबैक ले रहे हैं ताकि समय रहते वो कुछ कर सकें।

विधानसभा के बाद MLC चुनाव में भी सपा को मिली शिकस्त

विधानसभा के बाद MLC चुनाव में भी सपा को मिली शिकस्त

विधानसभा चुनाव के बाद यूपी में 36 सीटों पर एमएलसी का चुनाव हुआ जिसमें सपा को एक भी सीट नहीं मिली। आजमगढ़ जिसे सपा का गढ़ कहा जाता है वहां पार्टी के प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। सपा के नेताओं की माने तो आजमगढ़ के नतीजों ने मुलायम सिंह को चिंता में डाल दिया है। सपा का ऐसा मानना था कि वह आजमगढ़ की सीट रमाकांत यादव के सहारे जीत सकती है लेकिन बीजेपी ने ऐसा दांव खेला कि सपा की रणनीति धरी की धरी रह गई। पूर्वांचल के अलावा पश्चिम में भी अखिलेश-जयंत का गठबंधन चुनाव के हिसाब से फायदेमंद साबित नहीं हुआ और इस क्षेत्र की सभी सात सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमा लिया। सपा के सूत्रों की माने तो पार्टी के भीतर काफी घमासान मचा हुआ है जिसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ रहा है। समय रहते इन चीजों को नहीं संभाला गया तो स्थिति और विस्फोटक हो सकती है।

परिवार में अखिलेश- शिवपाल के बीच बढ़ती दरार

परिवार में अखिलेश- शिवपाल के बीच बढ़ती दरार

चुनाव में एक तरफ जहां सपा को हार मिल रही है वहीं दूसरी ओर अखिलेश के अपने भी साथ छोड़ रहे हैं। अखिलेश और शिवपाल के बीच चुनाव के बाद से एक बार फिर मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं जिससे मुलायम सिंह को एक्टिव होने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच मतभेद चुनाव के समय से ही चल रहे थे लेकिन चुनाव में सपा को हार मिलने के बाद अब यह और गहरा गए हैं। चुनाव के दौरान शिवपाल ने कई बार अखिलेश पर बेइज्जती करने का आरोप लगाया था। तब उन्होंने अपने समर्थकों को धैर्य रखने की सलाह दी थी। चुनाव बीतने के बाद शिवपाल अपनी शिकायत लेकर मुलायम के दरबार में दिल्ली पहुंच गए। उनकी मुलाकात के कुछ दिनों बाद अखिलेश ने भी मुलायम से मुलाकात की थी और सारी चीजों से अवगत कराया था। हालांकि इस बीच शिवपाल जैसे ही दिल्ली से लखनऊ लौटे तो उनकी बीजेपी के साथ नजदीकीयों की खबरें आने लगीं और इन्हीं अटकलों के बीच शिवपाल ने सीएम योगी से भी मुलाकात की थी। बढ़ते मतभेदों की वजह से एक बार फिर मुलायम सक्रिय होकर दोनों के बीच मामले को सुलझाना चाहते हैं ताकि सपा को नुकसान न हो।

आजम विवाद से भी आहत हैं मुलायम सिंह यादव

आजम विवाद से भी आहत हैं मुलायम सिंह यादव

शिवपाल का मामला अभी ठंडा पड़ा भी नहीं था कि अखिलेश यादव एक बार फिर आजम खां के विवाद में घिर गए। आजम के एक करीबी के बयान के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आजम जेल से बाहर आते ही नई पार्टी बना सकते हैं। आजम के करीबी ने आरोप लगाया था कि अखिलेश ने आजम का साथ नहीं दिया। उन्हें केवल मुसलमानों के वोट से मतलब है। वह आजम को जेल से बाहर नहीं निकालना चाहते हैं इसीलिए आज तक वह उनसे मिलने तक नहीं गए। हालांकि इस विवाद में अब तक अखिलेश की ओर से बयाान नहीं आया है। आजम खान को मुलायम का करीबी माना जाता है ऐसे में मुलायम एक बार फिर इस मामले को ठंडा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बहरहाल मुलायम की सक्रियता अखिलेश को कितना फायदा पहुंचाएगी यह देखने वाली बात होगी।

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