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Video:'मां मैं जीना चाहता हूं लेकिन SIR का टारगेट पूरा नहीं कर पा रहा', BLO के आत्महत्या की कहानी रुला देगी

Moradabad Blo Death Case: ''मां मैं जीना चाहता हूं लेकिन SIR का टारगेट पूरा नहीं कर पा रहा हूं। पहली बार ये काम मिला है, मैं बहुत घुटन में हूं, डर महसूस कर रहा हूं, चार छोटी बेटियां हैं। बेटियां का ख्याल रखना, वो बहुत मासूम हैं। अगर मुझे ज्यादा वक्त मिलता तो मैं इस काम को पूरा कर देता। मुझे माफ कर देना। मैं जीना तो चाहता हूं, पर क्या करूं।'' ये बातें आत्महत्या करने से पहले उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के 42 वर्षीय BLO सर्वेश सिंह ने कही है। सर्वेश ने आत्महत्या से ठीक पहले ये भावुक वीडियो बनाया था।

मुरादाबाद में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दबाव में भोजपुर इलाके में रहने वाले सर्वेश सिंह ने शनिवार (29 नवंबर) देर रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुबह चार बजे जब उनकी पत्नी बबली उठीं, तो घर में सर्वेश नहीं दिखे। कुछ ही देर की तलाश के बाद वह मकान से थोड़ी दूर बने पशुशाला (गाय-भैंस के रहने की जगह) में फंदे से लटकते मिले। परिवार उन्हें आनन-फानन में लेकर प्राइवेट अस्पताल ले गई लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सर्वेश की मौत को समझने के लिए उसका सुसाइड नोट और बनाया गया वीडियो ही काफी हैं।

Moradabad Blo Death Case

🟡 3 पेज की सुसाइड नोट ने खोली सिस्टम की पोल

फॉरेंसिक टीम को मौके से तीन पन्नों की सुसाइड नोट मिली, जिसने पूरे मामले की दर्दनाक सच्चाई बयां कर दी। दो पन्ने बेसिक शिक्षा विभाग और जिला निर्वाचन अधिकारी के नाम लिखे गए हैं, जिनमें सर्वेश ने साफ कहा कि SIR का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाने का दबाव उन्हें अंदर से तोड़ रहा था। तीसरे पेज में उन्होंने यह भी लिखा कि लगातार बढ़ते काम के बोझ और समय की कमी ने उनका मानसिक संतुलन बिगाड़ दिया था। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

🟡'SIR का टारगेट पूरा नहीं कर पा रहा', सर्वेश सिंह का दर्द

सुसाइड नोट सर्वेश ने लिखा है,''मुझे पहली बार यह जिम्मेदारी मिली थी और काम की सही जानकारी न होने की वजह से दिन-रात मेहनत करने के बावजूद मैं अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा था। इसी दबाव में मैं बेहद टूट गया। मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई, जिससे मैं यह कदम उठाने का फैसला किया। परिवार ने मुझे बहुत संभालने की कोशिश की, हिम्मत भी दी, लेकिन मैं टूट गया हूं।''

🟡'मेरी चार छोटी बेटियां हैं, उनका ध्यान रखना, वे बहुत मासूम हैं'

सर्वेश आगे लिखते हैं, "कहने को बहुत कुछ है, लेकिन वक्त बहुत कम है। मैं अंदर से बेचैनी, घुटन और डर महसूस कर रहा हूं। मेरी चार छोटी बेटियां हैं, उनका ध्यान रखना। वे बहुत मासूम हैं। यह लिखते हुए मुझे तेज पीड़ा हो रही है। अगर मेरे पास थोड़ा और समय होता तो शायद मैं यह काम पूरा कर पाता, लेकिन मेरे लिए यह समय काफी नहीं था। मुझे माफ कर देना। मैं जीना चाहता हूं, पर मजबूर हूं। अपना ख्याल रखना। इस कदम के लिए सिर्फ मैं जिम्मेदार हूं, किसी और की कोई गलती नहीं है। विद्यालय के बच्चों को मेरा ढेर सारा प्यार। मन लगाकर पढ़ना मेरे बच्चों। मेरा दिल बहुत भारी है।"

सर्वेश के परिवार का कहना है कि पिछले पांच दिनों से वह लगातार भय और तनाव में था। कोई अनहोनी का डर उसे हर पल सताता रहता था, इसलिए घर में हर समय कोई न कोई उसके साथ रहता था, लेकिन फिर भी उसे बचाया नहीं जा सका। उधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि सर्वेश की मौत फांसी लगने से हुई।

🟡 पत्नी, साला और भांजा पूरी रात करते रहे डेटा फीडिंग

सर्वेश सिंह भगतपुर टांडा ब्लॉक के जाहिदपुर सीकमपुर कंपोजिट विद्यालय में सहायक अध्यापक थे और पहली बार BLO की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। SIR अभियान के तहत बूथ नंबर 406 की जिम्मेदारी उन्हें मिली थी।

शनिवार रात उनकी पत्नी बबली, साले अरुण कुमार और भांजे मोनू ने देर रात तक वही डेटा फीड किया, जो सर्वेश ने दिया था। काम खत्म कर सब सो गए, लेकिन सर्वेश अपने कमरे में जाकर फिर बाहर निकल आए और किसी से बिना कुछ कहे अपनी जिंदगी खत्म कर ली।

🟡 बाइक की लाइट ने दिखाई दर्दनाक तस्वीर

सुबह जब परिवार उन्हें खोजते हुए बाहर निकला, तो मकान से कुछ दूरी पर बने पशुशाला में बाइक की लाइट पड़ने पर भांजे मोनू ने सर्वेश को फंदे से लटका देखा। रस्सी काटी गई, अस्पताल ले जाया गया, पर उनकी सांसें थम चुकी थीं।

🟡 महिलाओं ने पोस्टमार्टम हाउस के बाहर किया जाम

घटना की खबर फैलते ही गांव की कई महिलाएं पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जमा हो गईं और सड़क पर जाम लगा दिया। उनका आरोप था कि अधिकारियों ने SIR का लक्ष्य पूरा करने के लिए BLO पर अनुचित दबाव बनाया, जिसके कारण सर्वेश ने जान दे दी। पुलिस ने समझाकर जाम खुलवाया और लोगों को शांत कराया।

🟡 जिलाधिकारी बोले-70% काम पूरा था, विभागीय दबाव साबित नहीं

डीएम अनुज सिंह ने कहा कि सर्वेश 70 फीसदी काम पूरा कर चुके थे और विभागीय स्तर पर दबाव की बात अभी सिद्ध नहीं होती। उन्होंने बताया कि सर्वेश ने BLO ट्रेनिंग में भी हिस्सा लिया था, उसके दस्तखत रिकॉर्ड में हैं। उनके मुताबिक, "सर्वेश क्यों टूट गए, यह पुलिस जांच के बाद साफ होगा।"

🟡 दुख की इस घड़ी में प्रशासन ने दिए भरोसे

प्रशासन ने घोषणा की है मृतक की पत्नी को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी दी जाएगी। सभी सरकारी देय तीन दिनों में उपलब्ध कराए जाएंगे। बच्चों की पढ़ाई जहां परिवार चाहेगा, वहीं कराई जाएगी और इसके साथ ही आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।

🟡 SIR का बोझ देशभर में ले रहा कर्मचारियों की जान

इस घटना से ठीक एक दिन पहले राजस्थान के धौलपुर में 42 वर्षीय BLO अनुज गर्ग की मौत हो गई थी। वे भी SIR के डेटा अपलोड करते हुए देर रात घर पर ही बेहोश होकर गिर पड़े। परिजनों ने काम के अत्यधिक दबाव को जिम्मेदार ठहराया। मध्य प्रदेश में भी पिछले एक महीने में कई बीएलओ की मौत की खबरें सामने आई हैं।

SIR अभियान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बंगाल समेत 12 राज्यों में चल रहा है, ताकि मतदाता सूची से गलतियां हटाई जा सकें। लेकिन हकीकत यह है कि दबाव, समय सीमा और बढ़ते टारगेट सरकारी कर्मचारियों के लिए जानलेवा बन रहे हैं। BLO के काम के बढ़ते दबाव को देखते हुए SIR की समयसीमा बढ़ाकर अब 11 दिसंबर तक कर दिया गया है।

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