यूपी: भाजपा से नहीं मिला टिकट तो 2,000 के नोट पर लिखा- 'बेवफा है मेरा सांसद'
उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल में भाजपा में विरोध के सुर लगातार मुखर हो रहे हैं। यहां अपना टिकट कटने से लोग सांसद से नाराज हैं।
बस्ती। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने किसी भी कीमत पर चुनाव जीतने की ठानी है, इसके लिए बाहरियों को खूब मौका दिया गया लेकिन पार्टी का यह तरीका कार्यकर्ताओं को रास नहीं आया। पूर्वांचल के बस्ती मंडल में भाजपा की बगावत अब किसी से छिपी नहीं है। जब भाजपा ने प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी की तो यहां के 3 जिलों की 13 में से 10 सीटों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने टिकट का विरोध करना शुरू कर दिया।

बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी और संतकबीर नगर से सांसद शरद त्रिपाठी पर पैसे लेकर टिकट दिलाने का आरोप भी लगाया गया। अब कार्यकर्ता विरोध के सुर फिर से बुलंद कर रहे हैं। इससे पहले टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों ने 27 जनवरी तक का मौका पार्टी हाईकमान को दिया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो गई। जिसमें 2,000 रुपए के करेंसी नोट पर लिखा है- 'हरीश द्विवेदी बेवफा हैं।'
खून से लिखा पत्र
वहीं पार्टी कार्यकर्ताओं ने खून से पत्र लिख कर पार्टी हाईकमान से मांग है कि बस्ती जिले के अंतर्गत 5 सीटों से में से कम से कम 2 के प्रत्याशी बदल दिए जाएं। खून से लिखे पत्र में कहा गया है कि पहले सांसद हरीश द्विवेदी ने पवन कसौधन को जिलाध्यक्ष बना कर संगठन पर कब्जा किया और अब टिकट भी बेंच दिया।
बता दें कि बस्ती की सदर विधानसभा सीट से पार्टी ने दयाराम चौधरी, कप्तानगंज सीट से चंद्र प्रकाश 'सी.पी.' शुक्ला, रुधौली से संजय जायसवाल , महादेवा से रवि सोनकर और हर्रैया से अजय सिंह को टिकट दिया है। कार्यकर्ताओं में इस बात का रोष है कि पार्टी ने समर्पित लोगों को दरकिनार कर बाहरियों को मौका दिया है।
गौरतलब है कि हर्रैया से घोषित प्रत्याशी अजय सिंह ने 2012 में इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, वहीं रवि सोनकर ने बसपा के टिकट पर जिला पंचायत का चुनाव लड़ा था। साथ ही दयामराम लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा में आए और संजय जायसवाल ने बीते साल अगस्त में पार्टी ज्वाइन की थी। वहीं सीपी शुक्ल लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी में शामिल हुए। ये भी पढ़ें: पंजाब चुनाव में इस बाबा की मदद से चुनाव जीतना चाहते हैं दल!












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