यूपी विधानसभा चुनाव: सुनील बंसल के इशारों पर हो रहे BJP के सारे काम, लोग कहते हैं शाह का दायां हाथ
लखनऊ के भाजपा ऑफिस में सुनील बंसल की काम करने की जगह पहली मंजिल पर है। यहां पर वे आईपैड, टीवी और फोन के जरिए न केवल भाजपा के नेताओं, बल्कि सांसदों को भी दिशा-निर्देश देते हैं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश चुनाव के चार चरण पूरे हो चुके हैं और तीन चरण अभी बाकी हैं। इस चुनाव में किसकी जीत होगी, ये तो समय ही बताएगा, लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा का वजह कौन सा शख्स है, जिसके इशारों पर हर दिन के काम किए जाते हैं। इस शख्स का नाम है सुनील बंसल। लखनऊ के भाजपा ऑफिस में सुनील बंसल की काम करने की जगह पहली मंजिल पर है। यहां पर वे आईपैड, टीवी और फोन के जरिए न केवल भाजपा के नेताओं, बल्कि सांसदों को भी दिशा-निर्देश देते हैं। अगर ये कहा जाए कि यूपी चुनाव में सब कुछ सुनील बंसल के इशारे पर होता है, तो यह गलत नहीं होगा।

सुनील बंसल को अमित शाह दायां हाथ भी कहा जाता है। जहां एक ओर पीएम मोदी और अमित शाह दिन-रात यूपी चुनाव में जीतने का दम भरते हैं, वहीं सुनील बंसल इन दावों को धरातल पर उतारने की कोशिश में लगे हुए हैं। बंसल राजस्थान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक कार्यकर्ता थे। 2014 के लोकसभा चुनाव के समय अमित शाह ने इन्हें अपने साथ काम करने के लिए मिलाया था। सुनील बंसल ने अमित शाह के साथ काम करते-करते काफी कुछ सीखा और 2014 के चुनावों में जीत के बाद अमित शाह को भाजपा अध्यक्ष बना दिया गया। 2017 के चुनाव में अमित शाह ने सुनील बंसल को भाजपा का राज्य स्तरीय जनरल सेक्रेटरी बना दिया, जो भाजपा संगठन में काफी महत्वपूर्ण पद है। ये भी पढ़ें- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिग्विजय सिंह ने किया आपत्तिजनक ट्वीट, मचा हंगामा
2017 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने दो फैसले किए। पहले फैसले के तहत एक रणनीति बनाई कि उनका फोकस सवर्णों, पिछड़े वर्ग के यादव के अलावा अन्य लोग और जाटवों के अलावा जो अन्य दलितों पर किया गया, जो कुल आबादी का 55-60 फीसदी हैं। बंसल को इस रणनीति को धरातल पर उतारने के लिए कहा गया है। दूसरे फैसला यह किया गया कि संगठन में जल्दी से जल्दी जोश भरना है, ताकि जिस समय समाजवादी पार्टी अपने गृह कलह में लगी हो और बसपा तैयारी कर रही हो, उस समय भाजपा अपना लड़ाई शुरू कर चुकी हो। इसके पीछे का आइडिया यह था कि इस तरह भाजपा पार्टी की उत्तर प्रदेश में उपस्थिति को दर्ज कराया जा सके। भाजपा के कुछ कार्यक्रम अधिक सफल रहे और कम सफल रहे।












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