मायावती की मेरठ रैली पश्चिमी यूपी में साबित करेगी बसपा की लोकप्रियता
मेरठ में मेगा रैली की तैयारी में मायावती, मायावती की लोकप्रियता का बड़ा टेस्ट, 18 सितंबर को मेरठ में होगी रैली, 2019 से पहले मायावती तलाश रही हैं जमीन
मेरठ। उत्तर प्रदेश में लोकसभा के उप चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती 18 सितंबर को इन चुनावों से पहले मेरठ में एक विशालकाय रैली को संबोधित करने जा रही हैं। ऐसे में सभी की इस बात पर नजर होगी कि क्या अभी भी मायावती की लोकप्रियता लगातार चुनाव हारने के बाद बरकरार है, क्या अभी भी उनकी रैली में बड़ी संख्या में लोग जमा होंगे। लिहाजा मेरठ में होने वाली मायावती की रैली में आने वाली भीड़ पर हर किसी की नजर रहेगी। जिस तरह से 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में मायावती की पार्टी ने शर्मनाक प्रदर्शन किया और पूरी पार्टी सिर्फ 17 सीट ही हासिल कर सकी, उसने मायावती के राजनीतिक अस्तित्व पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया था।

मायावती की लोकप्रियता का बड़ा टेस्ट
यूपी विधानसभा चुनाव में जिस तरह से भाजपा ने जबरदस्त जीत हासिल की उसने मायावती की मुश्किलों को काफी बढ़ा दिया है। लिहाजा यूपी के तीन अहम डिविजन मेरठ, मुरादाबाद और सहारनपुर मे मायावती की लोकप्रियता का बड़ा टेस्ट है और इस टेस्ट का पहला चरण 18 सितंबर को मेरठ की रैली में देखने को मिलेगा। बसपा इस इलाके में सिर्फ एक ही सीट गाजियाबाद से जीत सकी है। गाजियाबाद की ढोलाना सीट पर बसपा को जीत हासिल हुई है, जबकि इस पूरे डिवीजन से यूपी की विधानसभा में 60 विधायक पहुंचते हैं।

हर जगह से 5000 लोगों को लाने की जिम्मेदारी
इससे पहले मायावती ने इस बात की योजना बनाई थी कि वह दो डिविजन में रैली करेंगी, लेकिन अब उन्होंने फैसला लिया है कि वह मुरादाबाद के पार्टी के अहम नेताओं, सदस्यों और समर्थकों को मेरठ की रैली में बुलाएंगी। मायावती के इस फैसले से साफ होता है कि वह मेरठ की रैली को लेकर काफी संजीदा हैं, वह चाहती हैं कि इस रैली में वह अपनी ताकत को दिखा सके। बसपा के सूत्रों का कहना है कि जिला स्तर के नेताओं से कहा गया है कि हर विधानसभा क्षेत्र से कम से कम 5000 लोगों को इस रैली में लाया जाए। उन्होंने बताया कि हम चाहते हैं कि इस रैली में बड़ी संख्या में लोग आएं।

राज्यसभा से इस्तीफे को बनाएंगी बड़ा मुद्दा
माना जा रहा है कि राज्यसभा से मायावती के इस्तीफे को पार्टी भाजपा के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई के तौर पर लोगों के बीच दिखाने की कोशिश करने जा रही है। मायावती ने 18 जुलाई को राज्यसभा से इस्तीफा दिया था और यह फैसला लिया था कि वह हर महीने की 18 तारीख को यूपी के अलग-अलग डिविजन में रैलियों को संबोधित करेंगे। इस कड़ी में वह वाराणसी और आजमगढ़ मे भी रैलियों को संबोधित करेंगी।

पार्टी में फिर से आत्मविश्वास जगाना चाहती हैं मायावती
वहीं इन सब के बीच बसपा ने उन तमाम उम्मीदवारों से भी संपर्क साधा है जिन्होंने बसपा के टिकट पर 2017 में चुनाव लड़ा है। जिस तरह से यूपी के विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है, उसके बाद मायावती चाहती हैं कि पार्टी के नेताओं के भीतर एक बार फिर से आत्मविश्वास को जगाया जा सके, इसी के चलते वह कई रैलियों को आयोजित करने की भी योजना बना रही हैं। पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले जमीन पर अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहती है। ऐसे में अगर बसपा अपनी रणनीति को लागू करने में सफल होती है तो मुमकिन है कि बसपा भाजपा विरोधी दलों के साथ गठबंधन करना है या नहीं इस पर फैसला ले सके। मायावती ने पहले ही इस बात को साफ कर दिया है कि वह किसी भी दल के साथ गठबंधन तभी करेंगी जब वह सीटों के बंटवारे की तस्वीर को साफ तरह से समझ लेंगी।












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