यूपी: जिला अस्पताल में बांटा जा रहा था 'बिहार गवर्नमेंट सप्लाई' लिखा सीरप, बड़ी धांधली की आशंका
रायबरेली। रायबरेली के जिला अस्पताल में एक्सपयारी दवाओं के मिलने से हड़कंप मच गया है। ये दवाएं एक्सपायरी तो है हीं साथ ही बिहार सप्लाई की दवाएं हैं। जिसमें साफ साफ लिखा है कि इन्हें किसी अन्य राज्य में बेचना निषेध है। ये सीरप मरीजों और डॉक्टरों के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर किसी की जुबानपर यही सवाल है कि आखिर 'बिहार गवर्नमेंट सप्लाई, नाट फार सेल' लिखी सीरप रायबरेली कैसे पहुंच गई। सबके मन में यह सवाल है कि, क्या दवाओं के खेल में बडे़ स्तर पर कोई गैंग काम कर रहा है या फिर बिहार प्रांत में गड़बड़झाला करके इन दवाओं को यूपी के जिला अस्पतालों मे बंटवाया जा रहा है।

रायबरेली में बट रहा बिहार की सीरप
सरकारी अस्पतालों में रोगियों को दवाएं उपलब्ध कराने के लिए बकायदा शासन स्तर से आरसी जारी की जाती है। सीधे शासन स्तर से ही फर्मो को दवाओं की आपूर्ति करने का ठेका दे दिया जाता है। सीएमओ गोदाम या फिर जिला अस्पताल से सिर्फ दवाओं के लिए डिमांड ही भेजी जाती है। उसी डिमांड के आधार पर दवाएं उपलब्ध कराई जाती है। यह अलग बात है कि कभी भी समय से सारी दवाएं जिला अस्पताल को उपलब्ध नही कराई जाती हैं। पूर्व में भी इस तरह की दवाएं यहां आ चुकी होंगी, लेकिन किसी को कानोकान खबर नही लगी। 'बिहार गवर्नमेंट सप्लाई, नाट फार सेल' लिखी सीरप के जिला अस्पताल में भारी संख्या में पहुंचने के बाद पूरा सिस्टम संदेह कें घेरे में आ गया है।

सीएमएस ने दिए जांच के आदेश
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि जिले के गोदामों में दवाएं पहुंचने के बाद ही उन पर प्रदेश की मोहर और नाट फार सेल की मोहर लगाई जाती है। इससे प्रतीत होता है कि बिहार प्रांत के सरकारी गोदाम में यह सीरप पहुंचने के बाद ही रायबरेली के जिला अस्पताल लाई गई है। उच्च स्तरीय जांच के बाद ही इसकी सच्चाई उजागर हो सकेगी और इस गोरखधंधे में कई लोगों के फंसने की उम्मीद है। सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि फर्म को नोटिस देकर जवाब मांगा जा रहा है। बिहार से यहां सीरप कैसे आई, इसकी जांच और जानकारी फर्म ही दे सकती है।

क्या बिहार में रिजेक्ट हो चुका है सीरप
जिला अस्पताल मे पकड़ी गई बिहार प्रांत की सीरप को कहीं बिहार प्रांत ने रिजक्ट तो नही कर दिया। जिसके बाद फर्म ने चुपके से सेटिंग करके यहां आपूर्ति कर दी हो। इतनी अधिक संख्या में सीरप यहां पहुंच गई और किसी को कानोकान खबर तक नही लगी। यहां सीरप आ भी गई तो जिला अस्पताल प्रशासन ने वितरण से पहले सीरप की सच्चाई को क्यों नहीं जांची। हालांकि अधिकारी तो दावा हकीकत से कोसो दूर है।

एक्सपायर होने से पहले तक डंप रखते हैं दवाएं
एनआरएचएम घोटाले के पकड़ में आने के बाद भी सरकारी अस्पतालों की दवाओं में गोलमाल थम नही रहा है। जिला अस्पताल में कई दिनों से बिहार गवर्नमेंट सप्लाई नाट फार सेल लिखे सीरप का वितरण लाडलो में हो रहा था। जिला अस्पताल प्रशासन को मामले को गभींरता से लेने की फुरसत नहीं मिली। यहां तक कि दवाएं उपलब्ध न होने का बहाना करके दवाओं को एक्सपायर होने से कुछ महीने तक डंप रखा जाता है और बाद में आनन-फानन में उसका वितरण होता है।












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