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VIDEO: संघर्षों के पहाड़ को पार कर IAS की परीक्षा निकालने वाला एक हलवाई का बेटा

मऊ। निरंतर कठिन परिश्रम और सच्ची लगन से की गई मेहनत कभी असफल नहीं होती। लगन से की गई मेहनत का परिणाम हमेशा सकारात्मक ही रहता है फिर चाहे किनती भी परेशानियां आड़ें आ जाएं। देर-सवेर सफलता कदम चूमती ही है। तमाम परेशानियों से जूझते हुए बड़ी सफलता अर्जित करने वाले मऊ के अरविंद चौहान की भी कहानी कुछ ऐसी ही है। अरविंद ने सभी मुश्किलों को दर किनार करते हुए देश की सबसे बड़ी परीक्षा यूपीएससी में 659 रेंक हासिल कर अपने घर का नाम तो रौशन किया ही बल्कि उन्होंने अपने जिले का भी नाम रौशन किया। बता दें कि अरविंद की माली हालत कुछ खास अच्छी नहीं थी फिर भी वे लगे रहे और अंत में जीत हासिल की।

 mau arvind singh secured 659 rank in upsc exam 2017-18

जुनून से मिली सफलता
'मंजिल कितनी भी कठिन हो, मन में जुनून उसे पाने का है, हार नहीं मानूंगा मेरा लक्ष्य शिखर पर जाने का है।' इस व्यक्तव्य को चरितार्थ किया है मऊ शहर सिथि एलआईसी बिल्डिंग के पास रहने रहने वाले अरविंद चौहान ने। अरविंद ने अपनी कड़ी मेहनत से और मजबूत इरादों की बदौलत UPSC की परीक्षा में 659 रैंक हासिल की। उन्होंने इस सफलता के पीछे युवाओं को एक संदेश भी दिया है कि अगर ईमानदारी व मेहनत कोई काम किया जाए तो मंजिल खुद आपको खोज लेती है। दअरसल अरविन्द एक मिठाई व्यवसायी चन्द्र ज्योति स्वीट्स के मालिक बलिराम चौहान के बेटे है। आईएएस में चयन होने के बाद एक तरफ खुशी का जश्न मनाया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

युवाओं को दिया संदेश
अरविन्द चौहान ने हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट की शिक्षा केन्द्रीय विद्यालय, मऊ से अर्जित की। उसके बाद ग्रेजुएशन की पढ़ाई बीएचयू व पोस्ट ग्रेजुएशन जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से पास किया था। इसके बाद वहीं से एमफिल व पीएचडी की पढ़ाई की और अंत में आएएसएस की परीक्षा में परचम लहराया है। इस सफलता का श्रेय अरविन्द चौहान ने अपने पिता, माता, परिजनों, शुभचिंतकों को दिया है। उनका कहा कि उनके आदर्श उनके पिता हैं। उनके कई साथी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। छात्र-छात्राओं व युवाओं को सफत होने के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि शॉर्टकट कभी किसी सफलता का विकल्प नहीं हो सकता। अरविंद ने बताा कि उनका लक्ष्य देश सेवा है। उनके इस सफलता पर उनके घर बधाई देने देने वालों का तांता लगा हुआ है उधर पिता बलिराम चौहान का खुशी का ठिकाना नहीं है।

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