Mainpuri Loksabha by Election: शिवपाल यादव की चुप्पी डिंपल यादव पर पड़ेगी भारी ?

उत्तर प्रदेश में मैनपुरी लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुना ( Mainpuri Loksabha by Election) को लेकर माहौल गरम हो गया है। समाजवादी पार्टी की ओर से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी और पूर्व सांसद डिंपल यादव ने अपना नामांकन भर दिया है। यह सीट पहले अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव के पास ही थी लेकिन उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गई है। जिस पर उपचुनाव होने जा रहा है। हालांकि डिंपल यादव अपने ससुर मुलायम सिंह यादव की सीट पर कितना सफल होंगी यह बहुत कुछ मुलायम के छोटे भाई शिवपाल के रुख पर निर्भर करता है कि वह क्या करते हैं।

शिवपाल की चुप्पी के क्या है सियासी मायने

शिवपाल की चुप्पी के क्या है सियासी मायने

समाजवादी प्रगतिशील पार्टी के चेयरमैन शिवपाल यादव मैनपुरी की विधानसभा जसवंतनगर सीट से विधायक हैं। वह जिस सीट से आते हैं वह भी मैनपुरी का ही एक हिस्सा है। शिवपाल ने हालांकि अभी तक डिंपल के समर्थन या विरोध को लेकर कोई बयान नहीं दिया है लेकिन सपा के नेता प्रो रामगोपाल यादव ने नामांकन के बाद कहा था कि शिवपाल की सहमति से ही डिंपल को चुनाव मैदान में उतारा गया है। यानी अगर शिवपाल की सहमति है तो वो नामांकन के दौरान क्यों नहीं उपस्थित थे। शिवपाल की नामांकन से दूरी ने कई सवालों को जन्म दे दिया है।

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    शिवपाल इच्छा को नहीं भांप पाए अखिलेश यादव

    शिवपाल इच्छा को नहीं भांप पाए अखिलेश यादव

    मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद से ही शिवपाल की इच्छा थी कि वो अपने बड़े भाई की विरासत संभालें। कई मौकों पर वो अपनी इच्छा जाहिर भी कर चुके थे। शिवपाल ने यह भी कहा था कि यदि मुलायम सिंह यादव 2024 में चुनाव नहीं लड़ते हैं तो वो मैनपुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहेंगे। दुर्भाग्यवश उनका मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया है और अब मैनपुरी में उपचुनाव की नौबत आ गई है। शिवपाल की इस दबी इच्छा को अखिलेश नहीं समझ पाए और उन्होंने अपनी पत्नी डिंपल यादव को चुनाव मैदान में उतार दिया। अब देखना यह होगा कि शिवपाल का अगला कदम क्या होता है।

    शिवपाल के रुख पर टिकी हैं बीजेपी की निगाहें

    शिवपाल के रुख पर टिकी हैं बीजेपी की निगाहें

    शिवपाल के रुख पर और उनके अगले कदम पर सपा ही नहीं बीजेपी की निगाहें भी टिकी हुई हैं। बीजेपी हालांकि मैनपुरी के लिए उपयुक्त उम्मीदवार की तलाश कर रही है लेकिन वह शिवपाल को भी साधना चाहती है। डिंपल के नामांकन से दो दिन पहले ही शिवपाल दिल्ली भी गए थे। दिल्ली की उनकी यात्रा को लेकर कई तरह की अटकलें लगाईं जा रही हैं। बीजेपी ने पिछली बार इस सीट से प्रेम सिंह शाक्य को मैदान में उतारा था। इस बार भी वह इस सीट पर यादव बनाम शाक्य की लड़ाई बनाना चाहती है। मैनपुरी में यादव के बाद शाक्य बिरादरी ही सबसे अधिक है जिनके वोटों की काफी अहमियत है।

    पर्दे के पीछे से बीजेपी की मदद करेंगे शिवपाल ?

    पर्दे के पीछे से बीजेपी की मदद करेंगे शिवपाल ?

    बीजेपी के एक नेता ने कहा कि चुनाव का रुख बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि शिवपाल क्या स्टैंड लेते हैं। शिवपाल खुलकर डिंपल का प्रचार करेंगे या चुप्पी साधे रखेंगे यह देखना दिलचस्प होगा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि शिवपाल बैक डोर से बीजेपी की मदद कर सकते हैं। इसके लिए वह शाक्य बिरादरी को डिंपल के खिलाफ लामबंद करेंगे। हालांकि शिवपाल पर्दे के पीछे से बीजेपी को कितना लाभ पहुंचा पाएंगे यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।

    डिंपल यादव का खुला विरोध करते नहीं दिखना चाहते शिवपाल

    डिंपल यादव का खुला विरोध करते नहीं दिखना चाहते शिवपाल

    मैनपुरी के एक स्थानीय लोगों की माने तो शिवपाल के सामने संकट ये है कि वह डिंपल का खुलकर विरोध नहीं कर सकते हैं। डिंपल की उम्मीदवारी अखिलेश ने काफी सोच समझकर और रणनीति के तहत की है। डिंपल की जगह यदि कोई और मैदान में होता तो शिवपाल खुलकर विरोध करने की स्थिति में भी होते लेकिन डिंपल के खिलाफ वह नहीं बोलना चाहेंगे। शिवपाल के पास यही विकल्प बचा है कि यदि वो सपा के साथ नहीं जाते हैं तो शाक्य समुदाय को बीजेपी के फेवर में वोट करने के लिए लामबंद कर सकते हैं।

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