Mahant Raju Das: महंत राजू दास का विवादित बयान, वक्फ बोर्ड को बताया ‘जमीन हड़पने वाला बोर्ड’
Mahant Raju Das: अयोध्या के हनुमानगढ़ी के प्रसिद्ध संत महंत राजू दास ने सुल्तानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा बयान दिया। उन्होंने वक्फ बोर्ड पर सवाल उठाए और कुशभवनपुर मेले को लेकर सख्त आपत्ति जताई। उनके इस बयान से राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस छिड़ गई है।
महंत राजू दास ने अपने बयान में कुशभवनपुर मेले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे "चोर, लुटेरे, बलात्कारी और राष्ट्रद्रोहियों" का मेला करार दिया और प्रशासन से इसे तुरंत बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जो सरकारें इस मेले को आयोजित होने की अनुमति देती थीं, अब उन्हें इसे बैन कर देना चाहिए।

यह सभी सनातनियों और राष्ट्रवादियों की मांग है। ऐसे अपराधियों और आतंकियों का मेला लगाना गलत है, जिन्होंने हजारों मंदिरों को तोड़ा और कत्लेआम किया। महंत राजू दास ने अपने बयान में कहा कि अब देश में राष्ट्रवादियों का समय है। उन्होंने कहा कि गाजी और पाजी का वक्त खत्म हो चुका है।
अब देश में सिर्फ राष्ट्रवादियों का दौर चलेगा। महंत के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाला मान रहे हैं।
पाकिस्तान पर भी साधा निशाना
महंत राजू दास ने पाकिस्तान में हो रही घटनाओं पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में बालोचियों पर जुल्म हो रहा है। उनकी मां-बेटियों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, लेकिन मानवाधिकार संगठन चुप हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मांग की कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाया जाए।
वक्फ बोर्ड को बताया 'जमीन हड़पने वाला बोर्ड'
महंत राजू दास ने वक्फ बोर्ड पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड सिर्फ जमीन कब्जाने के लिए बनाया गया है। भारत एक सेक्युलर देश है, लेकिन यहां इस्लामिक कानून लागू करने की कोशिश हो रही है। जब एक देश, एक संविधान है, तो फिर अलग कानून क्यों?
महंत ने मुस्लिम आबादी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनकी संख्या 40 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, तो उन्हें अब भी अल्पसंख्यक क्यों कहा जा रहा है? सुल्तानपुर के चौक में आयोजित इस कार्यक्रम में महंत राजू दास ने मां दुर्गा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। यह आयोजन जिला युवा अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के संयोजन में भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2082 के शुभारंभ और चैत्र नवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में किया गया था।












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