महंत नरेंद्र गिरी की आत्महत्या का मामला: कब मिलेंगे इन पांच सवालों के जवाब, CBI जांच पर टिकी सबकी निगाहें
लखनऊ, 28 सितंबर: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर अभी रहस्य बना हुआ। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम हालांकि जांच कर रही है लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजे सामने नहीं आए हैं। सीबीआई उन सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है जो अब तह रहस्य बने हुए हैं। सीबीआई के सामने इस हाइप्रोफाइल केस को सुलझाने में कई चुनौतियां भी हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नरेंद्र गिरी की मौत से रहस्य का पर्दा उठ पाएगा और इन पांच सवालों के जवाब मिल पाएंगे जो उनकी मौत को लेकर उठ रहे हैं। हालांकि एक संत ने कहा कि नरेंद्र गिरी की मौत के पीछे केवल एक या दो लोग हैं इसकी संभावना काफी कम है।

दअरसल, नरेंद्र गिरी की मौत के संबंध में एक जानकारी सामने आयी है कि जिस दिन उनकी मौत हुई उस दिन मठ में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद कर गए थे। सूत्र बताते हैं कि बाघंबरी मठ में स्थापित कई सीसीटीवी कैमरे आश्चर्यजनक रूप से उस दिन बंद कर दिए गए थे, जिस दिन महंत की मृत्यु हुई थी, जो किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरा मठ सीसीटीवी की निगरानी में है। पहली मंजिल पर महंत नरेंद्र गिरि के कमरे के सामने 15 लगाए गए हैं, जिनमें से 43 कैमरे वहां लगाए गए हैं।
मौत के दिन सभी कैमरे बंद कैसे हो गए ?
मृतक महंत नरेंद्र गिरि के कमरे के सामने लगे सभी 15 सीसीटीवी कैमरों ने उनकी मृत्यु के दिन ही काम करना बंद कर दिया था। हालांकि, पुलिस को तब आश्चर्य हुआ जब उन्होंने पाया कि मठ की पहली मंजिल पर सभी 15 कैमरे, जहां महंत का कमरा स्थित था, 20 सितंबर को बंद कर दिया गया था, जिस दिन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मृत पाए गए थे।
नरेंद्र गिरी की मौत को लेकर एक प्रमुख संत ने कहा कि,
''उनकी मृत्यु के पीछे का राज काफी गहरा है। संभावना है कि इसके पीछे केवल एक या दो लोग नहीं हैं। 2016 में अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बनने के बाद कई ऐसे फैसले लिए जिससे कुछ लोग परेशान थे। आपको याद होगा कि 2017 में उन्होंने नकली साधुओं की एक सूची जारी की थी। इससे भी लोग काफी गुस्से में थे। उन्होंने कहा था कि इस तरह के पाखंडी बाबाओं को जेल में डाल देना चाहिए। उनकी संपत्ति की जांच होनी चाहिए। उनके इस बयान से देशभर में साधुओं के बीच हड़कंप मच गया था।''

घटना के दिन अपने कमरे में कब और कैसे पहुंचे नरेंद्र गिरी ?
रिपोर्ट बताती है कि इसके परिणामस्वरूप, पुलिस को यह निर्धारित करने में समस्या हो रही है कि महंत घटना के दिन पहली मंजिल पर अपने कमरे में कैसे और कब पहुंचे। इसके अलावा, पुलिस यह भी पता नहीं लगा पा रही है कि घटना के वक्त कोई कमरे में था या महंत के आराम करने के लिए उसके कमरे में जाने के बाद कोई अंदर आया या नहीं। ये अनसुलझा सवाल है जिनका उत्तर सीबीआई की जांच के बाद सामने आएगा।
मठ के प्रवेश द्वार से लेकर कमरे तक की रिकॉर्डिंग गायब ?
अब तक की जांच के मुताबिक मठ के प्रवेश द्वार से लेकर महंत नरेंद्र गिरि के कमरे तक लगे कैमरों में घटना की कोई रिकॉर्डिंग नहीं है। हालांकि, मठ के कुछ सदस्यों ने पुलिस को बताया है कि 20 सितंबर को मठ में बिजली गुल होने के कारण कैमरे बंद कर दिए गए थे। अन्य ने कहा कि कैमरों से जुड़ी एक डीवीआर मशीन कुछ दिन पहले खराब हो गई थी, जिससे कैमरों ने काम करना बंद कर दिया। हालांकि, पुलिस को इन सिद्धांतों पर विश्वास करना और मामले की जांच करना मुश्किल हो रहा है।
महंत नरेंद्र गिरी ने क्यों बदली अपनी वसीयत ?
मामले में एक अन्य घटनाक्रम में, रिपोर्टें सामने आई हैं कि महंत नरेंद्र गिरि ने वर्ष 2010 में अपनी वसीयत बनाने के बाद से दो बार अपनी वसीयत बदली थी। महंत नरेंद्र गिरि के वकील ने खुलासा किया था कि नरेंद्र गिरी ने 2010 में अपनी वसीयत बनाई थी। उन्होंने तब इसे क्रमशः 2011 और जून 2020 में दो बार बदला। अपनी अंतिम बदली हुई वसीयत में, उन्होंने अंततः बलबीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बताया था।

कथित सुसाइड नोट पर हैंड राइटिंग के पीछे क्या राज ?
जब से 20 सितंबर को महंत की अचानक मौत की खबर सामने आई उसके बाद से ही कथित तौर पर उनके द्वारा लिखे और हस्ताक्षरित सुसाइड नोट को मामले में संदिग्ध आपराधिक गड़बड़ी के संदेह को दूर करने के लिए सबूत के तौर पर बांधा जा रहा था। हालांकि, 22 सितंबर को, ऑपइंडिया ने बताया कि कैसे महंत नरेंद्र गिरी द्वारा हस्ताक्षरित सुसाइड नोट के सात पन्नों पर सात अलग-अलग हस्ताक्षर थे, जिससे इसकी प्रामाणिकता पर संदेह पैदा हुआ।
2004 में नरेंद्र गिरी ने संभाला था बाघंबरी मठ का जिम्मा
महंत नरेंद्र गिरि ने 2004 में तत्कालीन इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में बाघंबरी मठ के प्रमुख के रूप में पदभार संभाला। बाघंबरी मठ देश के 13 मुख्य अखाड़ों या मठों में से एक है। गिरि सभी 13 अखाड़ों का प्रतिनिधित्व करने वाली अखाड़ा परिषद के प्रमुख थे। प्रयागराज का बाघंबरी मठ देश के विभिन्न हिस्सों में तीन दर्जन से अधिक धार्मिक स्थलों का संचालन करता है, जिसमें लेटे हुए (लेटे हुए) हनुमान मंदिर भी शामिल है।

विवादित बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते थे नरेंद्र
गिरि हमेशा अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते थे। पिछले महीने ही उन्होंने प्रख्यात उर्दू कवि मुनव्वर राणा को अफगानिस्तान में रहने के लिए कहा था, क्योंकि उन्होंने कहा था कि अगर योगी आदित्यनाथ फिर से मुख्यमंत्री चुने गए तो वे यूपी छोड़ देंगे। नरेंद्र गिरि अपने राजनीतिक संबंधों के लिए भी जाने जाते थे। 2017 तक समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध थे। लेकिन जैसे ही राज्य में भाजपा की सरकार आई, महंत ने अपने आपको योगी आदित्यनाथ सरकार का खास बना लिया।
हालांकि प्रयागराज के पुलिस महानिरीक्षक के.पी. सिंह केवल इतना कहा कि जांच में सभी मुख्य बिंदुओं को शामिल किया गया है। पुलिस जल्द ही मामले की तह तक जाएगी।
प्रयागराज में संस्कृति विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक अशोक तिवारी कहते हैं कि,
"नरेंद्र गिरि ने कभी भी चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल का प्रत्यक्ष रूप से समर्थन नहीं किया। जनवरी 2019 में कुंभ के बाद भाजपा के साथ उनकी निकटता बढ़ गई। इससे गिरि को बहुत मदद मिलती थी। आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे को फैलाने की तैयारी भी उन्होंने की थी। कहा जाता है कि यूपी में जब जब सत्ता बदली नरेंद्र गिरी उसी के हो लिए। अखिलेश यादव के समय में वो उनके भी खास बन गए थे।"
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