MahaKumbh 2025: अंतिम स्नान के बाद श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने की विशेष व्यवस्था, जानिए पूरी डिटेल्स
MahaKumbh 2025: महाकुंभ 2025 का आज यानी 26 फरवरी को अंतिम दिन है। महाशिवरात्रि के अवसर पर आज अमृत स्नान है। इसको लेकर सुबह से ही त्रिवेणी संगम पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी हुई है।
इसी स्नान के साथ ही छह हफ्तों तक चले आ रहे दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन समाप्त हो जाएगा। महाकुंभ 2025 में अब तक 63 करोड़ से ज्यादा लोग आस्था की डुबकी लगा चुके हैं।

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सीएम योगी कर रहे हैं मॉनिटरिंग
आज सुबह से ही सीएम योगी पवित्र स्नान पर्व की व्यवस्थाओं की गोरखपुर स्थित कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सीएम योगी वहां से अधिकारियों को सभी जरूरी दिशा निर्देश दे रहे हैं।
प्रशासन अलर्ट
महाशिवरात्रि के अवसर पर 26 फरवरी को अंतिम स्नान से पहले, प्रयागराज जिला प्रशासन ने पूरे शहर में अतिरिक्त बलों की तैनाती की है। लगभग 37 हजार से अधिक पुलिस बल और 14 हजार से अधिक होमगार्ड के जवानों की तैनाती की गई है।
प्रयागराज के DM ने कहा, महाशिवरात्रि पर अंतिम 'स्नान' के लिए हम अपनी सभी तैयारियों के साथ तैयार हैं। हम अमृत 'स्नान' के दिन अतिरिक्त बल की तैनाती करते हैं। रेलवे और हवाईअड्डा प्राधिकरणों के साथ हमारे अच्छे समन्वय हैं।'
'हमने अपने अधिकारियों को पार्किंग स्थानों के बेहतर प्रबंधन के निर्देश दिए हैं ताकि यातायात नियंत्रण में रहे। वरिष्ठ अधिकारी सभी जंक्शनों और पार्किंग स्थानों पर बेहतर प्रबंधन के लिए तैनात हैं।'
भारतीय रेलवे ने की विशेष व्यवस्था
इस बीच, भारतीय रेलवे ने महाशिवरात्रि के लिए विशेष व्यवस्था की है और 26 फरवरी को महाकुंभ 2025 के अंतिम अमृत स्नान के बाद तीर्थयात्रियों की वापसी के लिए प्रयागराज से 350 से अधिक अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन करने की योजना बनाई है।
वहीं रेलवे ने बताया कि, 'रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ, सत्यश कुमार, ग्राउंड ऑपरेशंस की देखरेख कर रहे हैं।'
'तीनों रेलवे जोनों के जनरल मैनेजर्स यात्री भीड़ को नियंत्रित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं। रेलवे मंत्री ने अधिकारियों को अतिरिक्त विशेष ट्रेनों की आवश्यकता होने पर उन्हें चलाने के निर्देश भी दिए हैं।'
अब तक 6 अमृत स्नान हो चुके हैं
महाकुंभ मेला कि शुरुआत 13 जनवरी को शुरू हुई थी। इस दौरान कुल छह अमृत स्नान का आयोजन हुआ, जिसमें पहला अमृत स्नान 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा, दूसरा 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर, तीसरा 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन, चौथा 3 फरवरी को बसंत पंचमी के दिन, पांचवां 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर और आखिरी अमृत 'स्नान' 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन।












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