Mahakumbh 2025: महाकुंभ में अंतिम स्नान आज, क्राउड मैनेजमेंट के लिए किए गए ये पुख्ता इंतजाम
Mahakumbh 2025: महाकुंभ-2025 का आयोजन प्रयागराज में भव्यता के साथ 26 फरवरी को शिवरात्रि के अवसर पर अंतिम अमृत स्नान के साथ संपन्न हो जाएगा। यह महाकुंभ करोड़ों श्रद्धालुओं का साक्षी बन चुका है, अब तक महाकुभ में 63 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान कर चुके हैं।
वहीं बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर होने वाले अंतिम स्नान पर करोड़ों की संख्या में भक्त जुटने वाले हैं, श्रृद्धालुओं की व्यापक सुरक्षा और उनकी सुविधा के लिए यूपी सरकार और प्रशासन की ओर से व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

महाकुंभ DIG वैभव कृष्ण ने बताया स्नान के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी शिवालयों पर पुलिस तैनात की गई है और स्नान घाटों पर सुरक्षा बल मौजूद रहेंगे। महाकुंभ क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है और यातायात संचालन के लिए 6 और आईपीएस अफसरों को भेजा गया है।
तैनात किए गए हैं आईपीएस अधिकारी
महाकुंभ के महाशिवरात्रि स्नान के लिए प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है, जिसके मद्देनजर ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। एडीजी पीएसी सुजीत पांडे की अगुवाई में पांच अन्य आईजी अधिकारियों को भी विभिन्न रूटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और बंगाल सहित अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे हैं। रेलवे विभाग ने भी इस भीड़ को देखते हुए 15,000 से अधिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया है, और सभी प्रमुख स्टेशनों पर सुरक्षा और सहायक स्टाफ की तैनाती की गई है।
यूपी में अतिरिक्त बसों का संचालन
यही नहीं, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 4500 बसों का संचालन किया है, ताकि वे सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
विशाल आयोजन पर लगाई गई रोक
महाशिवरात्रि के दौरान प्रयागराज में आने वाले भक्तों की भीड़ की देखते हुए कोई जन उत्सव या विशाल आयोजन नहीं किया जाएगा, ताकि भीड़-भाड़ से बचा जा सके और श्रद्धालुओं को शांति से पूजा अर्चना करने का अवसर मिले।
13 जनवरी को शुरू हुआ था महाकुंभ 2025
महाकुंभ-2025, जिसका आरम्भ 13 जनवरी को हुआ था, ने भारत की धार्मिक आस्था और संतों के आशीर्वाद से एक नया अध्याय जोड़ा है। यह महाकुंभ न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी उदाहरण पेश करता है।












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