सांसद रहते हुए भी सीएम-डिप्टी सीएम क्यों हैं योगी और केशव? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने AG को किया तलब
योगी और केशव, सांसद रहते हुए राज्य सरकार में सीएम और डिप्टी सीएम हैं। इसी से जुड़ी एक याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में आई है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भारत सरकार के महाधिवक्ता को तलब किया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से जुड़ी एक याचिका की सुनावई के दौरान महाधिवक्ता को तलब किया है।

दरअसल, अदालत सीएम योगी और डिप्टी सीएम मौर्य के खिलाफ आई उस याचिका सुनवाई कर रही थी जिमसें यह कहा गया है कि सांसद होते हुए भी वो अपने पद पर आसीन है। बता दें कि सीएम योगी और डिप्टी सीएम मौर्य, प्रदेश के किसी भी विधानसभा क्षेत्र या विधानपरिषद से विधायक नहीं, बल्कि सांसद हैं। योगी जहां गोरखपुर के सांसद हैं वहीं मौर्य इलाहाबाद स्थित फूलपुर से सांसद हैं।
6 माह के भीतर बनना होता है विधायक
नियमतः किसी भी विधायक दल का नेता चुने जाते समय विधायक होने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सीएम, डिप्टी सीएम या मंत्री पद। की शपथ लेने के 6 माह के भीतर उन्हें किसी भी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर सदन में आना होता है। यदि राज्य में विधान परिषद का प्रावधान है तो वह रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
माना जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव होने तक योगी और केशव, सांसद पद से इस्तीफा नहीं देंगे। हालांकि पूर्व रक्षामंत्री और राज्यसभा सांसद रहे मनोहर पर्रिकर ने सीएम पद की शपथ लेने के कुछ दिनों के भीतर ही राज्यसभा के सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था।
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